बाढ़ उतरी, नहीं हुआ क्षति का आकलन
जबकि किसान मुआवजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन क्षति का आंकलन नहीं हो पाने का कारण लेखपालों के हड़ताल पर रहना बताकर चुप्पी साध ले रहा है। वहीं पिछले वर्ष भी सूखा पड़ने के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। वजह मानक से कम सूखा पड़ना था।
जिले में तीन लाख 99 हजार 713 हेक्टेयर भूमि में खेती की जाती है। जिसमें इस वर्ष दो लाख 29 हजार फसलों में खरीफ के फसल की खेती की गई है। जिसमें लगभग एक लाख 46 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती हुई है। शेष भूमि पर मक्का, बाजारा, ऊर्द आदि की खेती की गई है।
उधर इस साल मेघ भी मेहरबान हैं। जिससे लगातार बारिश हो रही है। सूत्रों पर विश्वास करें तो अगस्त माह में मानक से अधिक वर्षा हुई है। जिससे अच्छी फसल होने की उम्मीद किसानों में जगी हैं। लेकिन गोमती नदी का जल स्तर बढ़ने से चंदवक ब्लाक में बाढ़ आ गई थी। जिससे 10 गांव में पानी घुस गया था।
इस दौरान लगभग डेढ़ सौ एकड़ फसलें जलमगभन होने से नष्ट हो गई थी। हलांकि प्रशासन द्वारा उक्त इलाकों का भ्रमण जरुर किया गया। जिससे किसानों में फसलों का मुआवजा मिलने की उम्मीद जगी है। लेकिन हालत यह है कि प्रशासन अभी तक क्षति हुए फसलों का आंकलन ही नहीं करा सकता है।
वहीं पिछले वर्ष सूखा पड़ने के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। जबकि एक लाख 91 हजार 749 हेक्टेयर में खेती की गई थी। जिसमें सूखा पड़ने के कारण 27.53 प्रतिशत फसलों का नुकसान हुआ था। लेकिन किसानों को मुआवजा इस लिए नहीं दिया गया क्यों की फसलों का नुकसान मानक से कम हुई थी। सूखा पड़ने पर 35 प्रतिशत और इससे उपर नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा मिलता है।