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संकट में किसान, टूट गए सारे अरमान

Sun, 15 Mar 2020 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2020 11:51 PM IST
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Farmers in crisis, all desires broken
21- सुजानगंज में बारिश व आंधी के चलते गिरी गेहूं की फसल। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। किसानों ने मुश्किल से फसल तैयार की लेकिन एक झटके से मौसम की मार ने उनको बरबाद कर दिया है। अबकी अच्छी उपज को लेकर आशान्वित किसानों ने अरमानों पर आंधी, ओला और बारिश ने पानी फेर दिया। कोई बेटी की शादी और दवा-इलाज को लेकर चिंतित हो गया है तो किसी की परेशानी यह है कि घर-गृहस्थी की गाड़ी अब कैसे चलेगी।
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पिछले कई वर्षों से प्रकृति का मिजाज किसानों के प्रतिकूल ही रहा है। बुवाई के समय खेत पानी को तरसते हैं और फिर कटाई के समय आंधी-बारिश और ओलों की बरसात फसल को चौपट कर रही है। छुट्टा पशुओं भी फसलों को बरबाद कर देते हैं। इन सब मुश्किलों के बावजूद इस साल रबी की खेती अच्छी हुई थी। किसानों ने अच्छी फसल को लेकर कई तरह के जरूरी कामों के पूरे होने की आस पाल ली थी। पर मुनाफा तो दूर किसानों की लागत भी डूब गई है। रतजगा कर खेतों की रखवाली करने वाले किसान अब फसलों की हालत देख छाती-पीट रहे हैं।
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बेटी की शादी की सता रही चिंता
मीरगज के भिदुना गांव निवासी 48 वर्षीय जड़ावती देवी करीब दस वर्ष पूर्व पति की मौत के बाद से खेती और परिवार की जिम्मेदारी अकेले निभा रही हैं। उन्हें दो लड़के व तीन लड़की हैं। करीब सात बीघा खेत हैं, जिसमें पांच बीघा में गेहूं की खेती हुई थी। यह खेत ही आजीविका का साधन है। सबसे छोटी बेटी नीतू की शादी आठ मई को होनी है। शादी की तारीख ऐसी ही रखी गई थी, जिससे गेहूं की उपज बेचकर पैसे का इंतजाम हो जाए। बेमौसम बरसात ने पूरी फसल चौपट कर दिया है। अब उन्हें चिंता है कि बेटी की शादी कैसे होगी।
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गृहस्थी की गाड़ी खींचनी मुश्किल
सुजानगंज के अरुवा गांव निवासी सुरेंद्र पाल एक एकड़ खेत है। इसमें सरसों और गेहूं की बुवाई की थी। तीन बच्चों की पढ़ाई समेत घर-गृहस्थी का पूरा खर्च इसी खेती के भरोसे ही है। बारिश और ओलावृष्टि के बाद पूरा परिवार संकट में है। बकौल सुरेंद्र, समूचे खेत की फसल और बारिश और आंधी से गिर गई। ओलावृष्टि के कारण बालियां टूट गई। अब इसमें दाने नहीं निकलेंगे। पत्नी के साथ दिन-रात मेहनत कर खेती की थी। खुद मजदूरी भी करते थे, ताकि पैसा बचा सकें। फसल चौपट होने के बाद अब कुछ नहीं सूझ रहा। आगे क्या होगा, यह भगवान जाने। अगर सरकार का कोई सहयोग मिल जाए तो अच्छा ही रहेगा।
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