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सौ दिन काम का वादा झूठा, कैसी यह गारंटी
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जौनपुर। मनरेगा के तहत वर्ष में सौ दिन काम की गारंटी देने का दावा छलावा साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में अब तक सिर्फ 2064 मजदूरों को ही सौ दिन काम मिल पाया है, जबकि जिले में 3.32 लाख जॉब कार्डधारक मजदूर हैं। काम न मिलने से उन्हें मजदूरी के अन्यत्र पलायन के लिए विवश होना पड़ रहा है।
गांव से बेरोजगारों का पलायन रोकने और गांव में काम उपलब्ध कराने के मकसद से मनरेगा की शुरुआत हुई थी। दावा किया गया था कि केंद्र सरकार की इस योजना से गांव और उसके पांच किमी की परिधि में ही जॉब कार्डधारक को वर्ष में कम से कम सौ दिन काम की गारंटी रहेगी। काम न उपलब्ध हो पाने पर उन्हें बेरोजगारी भत्ता भी देने का प्रावधान है। जमीनी हकीकत इससे बिलकुल अलग है। वर्ष में सौ दिन काम मजदूरों के लिए सपना बना हुआ है। जिले में अब तक कुल 3 लाख 32 हजार 129 लोगों का जॉब कार्ड बनाया गया है। इसके सापेक्ष वित्तीय सत्र 2019-20 में सिर्फ दो लाख 41 हजार 349 लोगों को ही काम मिल पाया है। इसमें भी महज 2064 जॉब कार्डधारक ऐसे रहे, जिन्हें वर्ष में सौ दिन काम दिया जा सका।
91 हजार जॉब कार्ड धारकों को एक भी दिन काम नहीं
जौनपुर। जिले 91080 जॉब कार्ड धारक ऐसे भी हैं, जिन्हें वर्ष में एक दिन भी काम नहीं दिया जा सके। इसके लिए मनरेगा सेल के जिम्मेदार मजदूरों को ही दोषी बता रहे हैं। उनकी दलील है कि इन मजदूरों ने काम की कभी डिमांड ही नहीं की तो उन्हें काम कैसे उपलब्ध कराया जाए। बिना डिमांड किए बेरोजगारी भत्ता भी नहीं दिया जा सकता। मामला चाहे जो हो, लेकिन सवाल यह भी है कि अगर इन लोगों द्वारा काम नहीं मांगा गया तो जॉब कार्ड कैसे बना दिया गया।
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50 हजार मनरेगा श्रमिकों की 19 करोड़ मजदूरी बकाया
जौनपुर। जिले में 50 हजार मनरेगा मजदूरों का दो माह से मजदूरी नहीं मिली है। बकाया मजदूरी के लिए मजदूर ब्लाक व जिला मुख्यालय पर मनरेगा सेल के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं मनरेगा सेल शासन से धनराशि नहीं मिलने की बात कह रहा है। उपायुक्त मनरेगा भूपेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि 20 दिसंबर से लेकर अब तक लगभग 50 हजार मजदूरों का 19 करोड़ रुपया मजदूरी बकाया है। इसके लिए शासन से बजट मांगा गया है। शीघ्र ही शासन से धनराशि मिलेगी। जिसके बाद उनका बकाये मजदूरी का भुगतान कर दिया जाएगा।
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गांव से बेरोजगारों का पलायन रोकने और गांव में काम उपलब्ध कराने के मकसद से मनरेगा की शुरुआत हुई थी। दावा किया गया था कि केंद्र सरकार की इस योजना से गांव और उसके पांच किमी की परिधि में ही जॉब कार्डधारक को वर्ष में कम से कम सौ दिन काम की गारंटी रहेगी। काम न उपलब्ध हो पाने पर उन्हें बेरोजगारी भत्ता भी देने का प्रावधान है। जमीनी हकीकत इससे बिलकुल अलग है। वर्ष में सौ दिन काम मजदूरों के लिए सपना बना हुआ है। जिले में अब तक कुल 3 लाख 32 हजार 129 लोगों का जॉब कार्ड बनाया गया है। इसके सापेक्ष वित्तीय सत्र 2019-20 में सिर्फ दो लाख 41 हजार 349 लोगों को ही काम मिल पाया है। इसमें भी महज 2064 जॉब कार्डधारक ऐसे रहे, जिन्हें वर्ष में सौ दिन काम दिया जा सका।
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91 हजार जॉब कार्ड धारकों को एक भी दिन काम नहीं
जौनपुर। जिले 91080 जॉब कार्ड धारक ऐसे भी हैं, जिन्हें वर्ष में एक दिन भी काम नहीं दिया जा सके। इसके लिए मनरेगा सेल के जिम्मेदार मजदूरों को ही दोषी बता रहे हैं। उनकी दलील है कि इन मजदूरों ने काम की कभी डिमांड ही नहीं की तो उन्हें काम कैसे उपलब्ध कराया जाए। बिना डिमांड किए बेरोजगारी भत्ता भी नहीं दिया जा सकता। मामला चाहे जो हो, लेकिन सवाल यह भी है कि अगर इन लोगों द्वारा काम नहीं मांगा गया तो जॉब कार्ड कैसे बना दिया गया।
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50 हजार मनरेगा श्रमिकों की 19 करोड़ मजदूरी बकाया
जौनपुर। जिले में 50 हजार मनरेगा मजदूरों का दो माह से मजदूरी नहीं मिली है। बकाया मजदूरी के लिए मजदूर ब्लाक व जिला मुख्यालय पर मनरेगा सेल के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं मनरेगा सेल शासन से धनराशि नहीं मिलने की बात कह रहा है। उपायुक्त मनरेगा भूपेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि 20 दिसंबर से लेकर अब तक लगभग 50 हजार मजदूरों का 19 करोड़ रुपया मजदूरी बकाया है। इसके लिए शासन से बजट मांगा गया है। शीघ्र ही शासन से धनराशि मिलेगी। जिसके बाद उनका बकाये मजदूरी का भुगतान कर दिया जाएगा।