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अतिक्रमण की मार...रात में चौड़ी, दिन में सिकुड़ीं सड़कें
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रात में चौड़ी दिखने वाली सड़कें दिन में अतिक्रमण के कारण सिकुड़ जाती हैं। इन सड़कों की पटरियों पर बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े रहते हैं। खाली स्थानों पर ठेले लगे रहते हैं। दुकानदार भी सामने सड़क की पटरियों पर कब्जा किए रहते हैं। इससे लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है। इससे दुर्घटनाएं भी होती हैं। जिम्मेदार भी अतिक्रमण हटाने के लिए सिर्फ कोरम पूरा करते हैं। अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने का कार्य करते हैं, लेकिन एक-दो दिन में ही अभियान समाप्त कर देते हैं। इससे शहर की सड़कें अतिक्रमण मुक्त नहीं हो पाती हैं।
सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में जाम लगना आम बात हो गई है। कारण, शहरवासियों के अलावा अपनी समस्याओं का निस्तारण कराने और सामानों की खरीदारी के लिए काफी संख्या में लोग ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, लेकिन वाहन खड़ा करने के लिए कोई स्थान नहीं होने से लोग सड़कों पर ही खड़ी कर सामानों की खरीदारी करते हैं। वहीं, ठेले-खोमचे वाले भी सड़कों की पटरियों पर अपनी दुकानें लगा कर सामान बेचते हैं। ऐसा नजारा ओलंदगंज, कोतवाली, सब्जीमंडी, लाइनबाजार, सुतहट्टी, भंडारी, चहारसू, सद्भावना, बदलापुर पड़ाव व कचहरी चौराहा आदि स्थानों पर देखा सकता है। इन स्थानों पर मौजूद कई दुकानदार भी सड़कों की पटरियों पर कब्जा कर लिए हैं। इससे आए दिन जाम में फंसकर लोगों को दिक्कत होती है। इस दौरान दुर्घटना भी होती रहती है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार प्रशासन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है। प्रशासन सिर्फ एक या दो माह में एकाध दिन अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर शांत बैठ जाता है। सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार अग्निहोत्री का कहना है कि समय-समय पर अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाता है। जहां तक वाहन पार्किंग की बात है तो इसके लिए स्थान चिह्नित किया जा रहा है। व्यापारियों को भी दुकानों के सामने मौजूद नाली पर ढाई फीट ग्रिल लगाने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। शीघ्र स्थान का चयन कर ठेले-खोमचे वालों को भी स्थापित करने का कार्य किया जाएगा।
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वाहन पार्किंग की नहीं है सुविधा
जौनपुर। शहर में वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा नहीं है। इससे लोगों को वाहन खड़ा करने में दिक्कत होती है। लोग सामानों की खरीदारी के लिए सड़कों पर ही वाहन खड़ा करने को विवश हो रहे हैं। अगर शहर में वाहन पार्किंग के लिए स्थान निर्धारित होता तो सड़कों पर लोग वाहन नहीं खड़ा करते, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
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सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में जाम लगना आम बात हो गई है। कारण, शहरवासियों के अलावा अपनी समस्याओं का निस्तारण कराने और सामानों की खरीदारी के लिए काफी संख्या में लोग ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, लेकिन वाहन खड़ा करने के लिए कोई स्थान नहीं होने से लोग सड़कों पर ही खड़ी कर सामानों की खरीदारी करते हैं। वहीं, ठेले-खोमचे वाले भी सड़कों की पटरियों पर अपनी दुकानें लगा कर सामान बेचते हैं। ऐसा नजारा ओलंदगंज, कोतवाली, सब्जीमंडी, लाइनबाजार, सुतहट्टी, भंडारी, चहारसू, सद्भावना, बदलापुर पड़ाव व कचहरी चौराहा आदि स्थानों पर देखा सकता है। इन स्थानों पर मौजूद कई दुकानदार भी सड़कों की पटरियों पर कब्जा कर लिए हैं। इससे आए दिन जाम में फंसकर लोगों को दिक्कत होती है। इस दौरान दुर्घटना भी होती रहती है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार प्रशासन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है। प्रशासन सिर्फ एक या दो माह में एकाध दिन अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर शांत बैठ जाता है। सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार अग्निहोत्री का कहना है कि समय-समय पर अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाता है। जहां तक वाहन पार्किंग की बात है तो इसके लिए स्थान चिह्नित किया जा रहा है। व्यापारियों को भी दुकानों के सामने मौजूद नाली पर ढाई फीट ग्रिल लगाने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। शीघ्र स्थान का चयन कर ठेले-खोमचे वालों को भी स्थापित करने का कार्य किया जाएगा।
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वाहन पार्किंग की नहीं है सुविधा
जौनपुर। शहर में वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा नहीं है। इससे लोगों को वाहन खड़ा करने में दिक्कत होती है। लोग सामानों की खरीदारी के लिए सड़कों पर ही वाहन खड़ा करने को विवश हो रहे हैं। अगर शहर में वाहन पार्किंग के लिए स्थान निर्धारित होता तो सड़कों पर लोग वाहन नहीं खड़ा करते, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
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