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पहले घर भेजते थे पैसा, अब घर वाले भेज रहे खर्चा
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पहले वो चलाते थे घर, अब घर वाले भेज रहे पैसा
मीरगंज। लॉडाउन के चलते परदेश में फंसे लोगों को उनकी आजीविका के लिए अब लोग घर से पैसे भेज रहे हैं। रोजी रोटी के सिलसिले में परदेश गए लोग अभीतक वहां से घर वालों को पैसे भेजते थे लेकिन कोरोना संक्रमण की रोकथाम के चलते घोषित लॉकडाउन ने उनके सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। कोई पेटीएम के माध्यम से तो कोई उनके बैंक खाते में पैसे भेज रहा है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत जैसे महानगरों में प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करने वाले या फिर वहां धंधा करने वाले संकट में हैं। लॉकडाउन के एक महीने से अधिक समय गुजरने के साथ लोगों की जेब खाली हो चुकी है। कुछ लोग वहां से जैसे तैसे पलायन कर रहे तो तमाम लोग ऐसे भी हैं जो घर वालों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। मीरगंज के भटहर चौधरीपुर गांव निवासी दिनेश यादव ने बताया कि मुंबई के उप नगरी इलाके गोरेगांव में फंसे अपने जीजा को सात हजार रुपये और गुजरात से सूरत शहर में रह रहे छोटे भाई सौरभ यादव को दस हजार रुपये भेज चुके हैं। सवैया गांव के अशोक यादव बाबा ने बताया की मुंबई के नाला सोपारा इलाके में रह रही अपनी बहन सविता यादव को सात हजार और कोलकाता में फंसे एक रिश्तेदार प्रेमचंद्र को दस हजार रुपये भेज चुके हैं। अगहुआ गांव के आलोक मौर्या, मछलीशहर के अनिल कुमार भी लुधियाना पंजाब, और दिल्ली में फंसे रिश्तेदारों को पैसे भेज चुके हैं।
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मीरगंज। लॉडाउन के चलते परदेश में फंसे लोगों को उनकी आजीविका के लिए अब लोग घर से पैसे भेज रहे हैं। रोजी रोटी के सिलसिले में परदेश गए लोग अभीतक वहां से घर वालों को पैसे भेजते थे लेकिन कोरोना संक्रमण की रोकथाम के चलते घोषित लॉकडाउन ने उनके सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। कोई पेटीएम के माध्यम से तो कोई उनके बैंक खाते में पैसे भेज रहा है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत जैसे महानगरों में प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करने वाले या फिर वहां धंधा करने वाले संकट में हैं। लॉकडाउन के एक महीने से अधिक समय गुजरने के साथ लोगों की जेब खाली हो चुकी है। कुछ लोग वहां से जैसे तैसे पलायन कर रहे तो तमाम लोग ऐसे भी हैं जो घर वालों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। मीरगंज के भटहर चौधरीपुर गांव निवासी दिनेश यादव ने बताया कि मुंबई के उप नगरी इलाके गोरेगांव में फंसे अपने जीजा को सात हजार रुपये और गुजरात से सूरत शहर में रह रहे छोटे भाई सौरभ यादव को दस हजार रुपये भेज चुके हैं। सवैया गांव के अशोक यादव बाबा ने बताया की मुंबई के नाला सोपारा इलाके में रह रही अपनी बहन सविता यादव को सात हजार और कोलकाता में फंसे एक रिश्तेदार प्रेमचंद्र को दस हजार रुपये भेज चुके हैं। अगहुआ गांव के आलोक मौर्या, मछलीशहर के अनिल कुमार भी लुधियाना पंजाब, और दिल्ली में फंसे रिश्तेदारों को पैसे भेज चुके हैं।
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