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ट्रेन आने के दौरान फंसी स्कूल वैन
jaunpur
Updated Fri, 20 Jan 2017 01:37 AM IST
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एटा में हुए हादसे में स्कूली बच्चों की मौत के बाद गुरुवार को जौनपुर के नईगंज रेलवे क्रासिंग के बीच में फंसी स्कूली वैन।
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स्कूल संचालक डग्गामार वाहनों में बच्चों को ढो रहे हैं। कई घटनाओं के बाद भी वह सबक नही ले रहे हैं। एटा में हुई घटना में कई स्कूली बच्चों की मौत के बाद भी एक स्कूली वैन नई गंज क्रासिंग पर ट्रेन आने के दौरान गेट के अंदर फंस गई। वैन में कुछ बच्चे बैठे थे।
इसी तरह की लापरवाही चालक बरत रहे हैं। जिससे बच्चों की जान जोखिम में है। उधर, स्कूल संचालक 1000 से 2500 तक प्रति माह बच्चों के अभिभावक से वसूल कर रहे हैं। सिद्दीकपुर स्थित एक विद्यालय की कई बसों को डीएम के निर्देश पर हाल ही में सीज किया गया था।
बच्चों से भरे वाहन जौनपुर में भी कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। गाजीपुर में हुई घटना के बाद प्रशासन ने सख्ती बरता था, लेकिन बाद में संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों के ढिलाई से स्कूल संचालक फिर मनमानी पर उतर आए हैं।
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अधिकतर स्कूलों में डग्गामार वाहन से बच्चों को ढोया जाता है। सिद्दीकपुर स्थित विद्यालय के संचालक सड़क पर ही 30 से 35 बड़ी छोटी गाड़ियों को खड़ा कराते हैं। जिससे आने जाने वाले लोगों को भी परेशानी होती है। खटारा बसो में बच्चों को ढोने पर कोई अंकुश नही लग पा रहा है।
जो वाहन स्कूलों में चल रहे हैं वह मानक पूरा नही कर रहे हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजकर ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दे चुका है।
डीएम भानुचंद्र गोस्वामी का कहना है कि एआरटीओ प्रवर्तन को ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। हाल ही में एक स्कूल के कुछ वाहन सीज भी किए गए हैं।
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इसी तरह की लापरवाही चालक बरत रहे हैं। जिससे बच्चों की जान जोखिम में है। उधर, स्कूल संचालक 1000 से 2500 तक प्रति माह बच्चों के अभिभावक से वसूल कर रहे हैं। सिद्दीकपुर स्थित एक विद्यालय की कई बसों को डीएम के निर्देश पर हाल ही में सीज किया गया था।
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बच्चों से भरे वाहन जौनपुर में भी कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। गाजीपुर में हुई घटना के बाद प्रशासन ने सख्ती बरता था, लेकिन बाद में संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों के ढिलाई से स्कूल संचालक फिर मनमानी पर उतर आए हैं।
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अधिकतर स्कूलों में डग्गामार वाहन से बच्चों को ढोया जाता है। सिद्दीकपुर स्थित विद्यालय के संचालक सड़क पर ही 30 से 35 बड़ी छोटी गाड़ियों को खड़ा कराते हैं। जिससे आने जाने वाले लोगों को भी परेशानी होती है। खटारा बसो में बच्चों को ढोने पर कोई अंकुश नही लग पा रहा है।
जो वाहन स्कूलों में चल रहे हैं वह मानक पूरा नही कर रहे हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजकर ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दे चुका है।
डीएम भानुचंद्र गोस्वामी का कहना है कि एआरटीओ प्रवर्तन को ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। हाल ही में एक स्कूल के कुछ वाहन सीज भी किए गए हैं।