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पात्र गृहस्थी से गायब हो गए बीपीएल कार्डधारक
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Thu, 14 Jul 2016 01:08 AM IST
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जिले में शायद ही कोई गांव ऐसा हो जहां के लोग कोटेदारों की मनमानी से परेशान न हों। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार के काकस का ही नतीजा है कि कलेक्ट्रेट से लेकर तहसील और ब्लाक मुख्यालयों पर आए दिन ग्रामीण धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
कहीं बीपीएल कार्डधारकों को पात्र गृहस्थी सूची से गायब कर दिया गया है तो कहीं यूनिट के बजाय रार्शन कार्ड के हिसाब से अनाज दिया जा रहा है।राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद बीपीएल और अंत्योदय कार्ड को खत्म कर पात्र गृहस्थी सूची बनाई गई है।
पहले राशन कार्ड के हिसाब से लाभार्थियों को अनाज दिया जाता था, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत यूनिट के हिसाब से दिए जाने की व्यवस्था है। परिवार के प्रत्येक सदस्य के हिस्से दो किलो चावल तीन रुपये किलो की दर से और तीन किलो गेहूं दो रुपये किलो की दर से देने का प्राविधान है।
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लेकिन अधिकतर ग्रामीणों की शिकायत है कि उन्हें आज भी राशनकार्ड की दर से ही अनाज दिया जाता है। परिवार में पांच सदस्य हैं तो नियमत: उसे 25 किलो राशन मिलना चाहिए लेकिन उन्हें 15 किलो ही दिया जाता है। शिकायतों के बाद भी कोई खास कार्रवाई नहीं हो रही है।
पात्र गृहस्थी सूची से उन लोगों का भी नाम गायब कर दिया गया है जिनके पास पहले से बीपीएल राशन कार्ड था। बक्शा के गोपालापुर की गीता पत्नी मैनबहादुर विकलांग हैं। पहले से उनके पास अंत्योदय कार्ड था लेकिन नई सूची में उनका नाम गायब कर दिया गया।
नेवादा काजी गांव के राजाराम पुत्र रामकिशोर, मलिकानपुर के मनीषा पत्नी प्रकाश, चकपटैला की अनीता पत्नी राजेंद्र, भिवरहां के संजय पुत्र महेंद्र समेत तमाम लोगों की शिकायत है कि पहले से उनके पास बीपीएल या अंत्योदय राशन कार्ड था लेकिन पात्र गृहस्थी सूची में बिना किसी जांच के ही उनका नाम हटा दिया गया। बता दें कि जिले में कुल 2007 कोटे की दूकानें हैं जिसमें से 52 निलंबित चल रही हैं। इसी महीने 11 दूकानों का लाइसेंस निरस्त हुआ ।
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कहीं बीपीएल कार्डधारकों को पात्र गृहस्थी सूची से गायब कर दिया गया है तो कहीं यूनिट के बजाय रार्शन कार्ड के हिसाब से अनाज दिया जा रहा है।राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद बीपीएल और अंत्योदय कार्ड को खत्म कर पात्र गृहस्थी सूची बनाई गई है।
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पहले राशन कार्ड के हिसाब से लाभार्थियों को अनाज दिया जाता था, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत यूनिट के हिसाब से दिए जाने की व्यवस्था है। परिवार के प्रत्येक सदस्य के हिस्से दो किलो चावल तीन रुपये किलो की दर से और तीन किलो गेहूं दो रुपये किलो की दर से देने का प्राविधान है।
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लेकिन अधिकतर ग्रामीणों की शिकायत है कि उन्हें आज भी राशनकार्ड की दर से ही अनाज दिया जाता है। परिवार में पांच सदस्य हैं तो नियमत: उसे 25 किलो राशन मिलना चाहिए लेकिन उन्हें 15 किलो ही दिया जाता है। शिकायतों के बाद भी कोई खास कार्रवाई नहीं हो रही है।
पात्र गृहस्थी सूची से उन लोगों का भी नाम गायब कर दिया गया है जिनके पास पहले से बीपीएल राशन कार्ड था। बक्शा के गोपालापुर की गीता पत्नी मैनबहादुर विकलांग हैं। पहले से उनके पास अंत्योदय कार्ड था लेकिन नई सूची में उनका नाम गायब कर दिया गया।
नेवादा काजी गांव के राजाराम पुत्र रामकिशोर, मलिकानपुर के मनीषा पत्नी प्रकाश, चकपटैला की अनीता पत्नी राजेंद्र, भिवरहां के संजय पुत्र महेंद्र समेत तमाम लोगों की शिकायत है कि पहले से उनके पास बीपीएल या अंत्योदय राशन कार्ड था लेकिन पात्र गृहस्थी सूची में बिना किसी जांच के ही उनका नाम हटा दिया गया। बता दें कि जिले में कुल 2007 कोटे की दूकानें हैं जिसमें से 52 निलंबित चल रही हैं। इसी महीने 11 दूकानों का लाइसेंस निरस्त हुआ ।