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एक सप्ताह के अंदर दादा और पिता की मौत, दो मासूम भाइयों की परवरिश पर संकट
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क्षेत्र के गल्ला मंडी निवासी परिवार के साथ नियति ने ऐसा खेल खेला कि सात दिनों में यह हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। कोरोना से पहले दादा और फिर पिता की मौत ने दो मासूम भाइयों की परवरिश पर संकट खड़ा कर दिया है। घर में अब बच्चों की दादी और मां ही हैं, जिनके कंधों पर पूरे परिवार को संभालने की जिम्मेदारी आ गई है। परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्हें मददगार की दरकार है।
गल्ला मंडी निवासी परिवार के पिता-पुत्र मंडी में ही किराने की दुकान चलाते थे। पिता - पुत्र दोनों मिलकर दुकान के जरिए परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। हंसते खेलते परिवार में घर के मुखिया करीब डेढ़ माह पहले कोरोना की चपेट में आ गए। उपचार के लिए परिजन आंबेडकर नगर स्थित चिकित्सालय में भर्ती कराए। दस दिन उपचार के बाद मौत हो गई। इसी दौरान तीमारदारी में लगे पुत्र भी संक्रमित हो गए। उन्हें भी भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी जिंदगी बचाने के लिए अस्पताल के महंगे बिल को चुकाने में दुकान की पूंजी और मां व पत्नी के जेवरात बिक गए। इसके बावजूद पुत्र को नहीं बचाया जा सका। पिता-पुत्र की मौत के बाद मां, पत्नी, दो बेटे बेसहारा हो गए। इलाज में दुकानदारी भी तबाह हो गई। परिवार के चार सदस्यों को मददगार की जरूरत है।
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शाहगंज के इस परिवार के बारे में जानकारी मिली है। दादा और पिता की मौत के बाद दो मासूम बच्चों की परवरिश का संकट है। इन्हें सूचीबद्ध कर लिया गया है। इसका सत्यापन कराया जा रहा है। जल्द ही शासन की विभिन्न योजनाओं से परिवार को लाभान्वित कराया जाएगा। -संतोष कुमार सोनी, जिला प्रोबेशन अधिकारी।
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बच्चों के संबंध में किसी ने फोन पर सूचना दी थी। एक-दो दिनों में टीम शाहगंज पहुंचकर पूरी जानकारी लेगी। परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी। ताकि बच्चों के पालन-पोषण पर कोई असर न पड़े। -राजकुमार पांडेय, प्रभारी चाइल्ड लाइन।
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गल्ला मंडी निवासी परिवार के पिता-पुत्र मंडी में ही किराने की दुकान चलाते थे। पिता - पुत्र दोनों मिलकर दुकान के जरिए परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। हंसते खेलते परिवार में घर के मुखिया करीब डेढ़ माह पहले कोरोना की चपेट में आ गए। उपचार के लिए परिजन आंबेडकर नगर स्थित चिकित्सालय में भर्ती कराए। दस दिन उपचार के बाद मौत हो गई। इसी दौरान तीमारदारी में लगे पुत्र भी संक्रमित हो गए। उन्हें भी भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी जिंदगी बचाने के लिए अस्पताल के महंगे बिल को चुकाने में दुकान की पूंजी और मां व पत्नी के जेवरात बिक गए। इसके बावजूद पुत्र को नहीं बचाया जा सका। पिता-पुत्र की मौत के बाद मां, पत्नी, दो बेटे बेसहारा हो गए। इलाज में दुकानदारी भी तबाह हो गई। परिवार के चार सदस्यों को मददगार की जरूरत है।
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शाहगंज के इस परिवार के बारे में जानकारी मिली है। दादा और पिता की मौत के बाद दो मासूम बच्चों की परवरिश का संकट है। इन्हें सूचीबद्ध कर लिया गया है। इसका सत्यापन कराया जा रहा है। जल्द ही शासन की विभिन्न योजनाओं से परिवार को लाभान्वित कराया जाएगा। -संतोष कुमार सोनी, जिला प्रोबेशन अधिकारी।
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बच्चों के संबंध में किसी ने फोन पर सूचना दी थी। एक-दो दिनों में टीम शाहगंज पहुंचकर पूरी जानकारी लेगी। परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी। ताकि बच्चों के पालन-पोषण पर कोई असर न पड़े। -राजकुमार पांडेय, प्रभारी चाइल्ड लाइन।