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पत्नी हंता को आजीवन कारावास
jaunpur
Updated Fri, 16 Dec 2016 12:46 AM IST
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court shimla
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सुरेरी थाना क्षेत्र में एक वर्ष पूर्व पत्नी को प्रताड़ित कर मुंह दबाकर हत्या करने के मामले में गुरुवार को एडीजे चतुर्थ एमपी सिंह सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपी पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की धनराशि अदा नहीं करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।
मामले में सभी गवाह पक्ष द्रोही हो गए थे। न्यायाधीश ने मेडिकल के आधार पर यह सजा सुनाई है। साथ ही वादी मुकदमा के विरुद्ध प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुये नोटिस जारी किया है। अभियोजन कथानक के अनुसार- सुरेरी थाना क्षेत्र के अड़ियार निवासी परदेशी पुत्र स्व. सियाराम राजभर ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री
शकुंतला की शादी आठ जुलाई 2008 को कठवतिया निवासी धर्मेंद्र पुत्र हीरालाल राजभर के साथ किया था। हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। साथ ही बारातियों का आवभगत किया था। पुत्री विदा होकर ससुराल गई तो पति धर्मेंद्र, ससुर हीरालाल, सास गिरिजा देवी व ननद किरन दहेज में सोने की अंगूठी व मोटर साइकिल की मांग को लेकर
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उसे प्रताड़ित करने लगे। मांग पूरी नहीं होने पर 11 जून 2015 की रात 8:30 बजे पुत्री शकुंतला की हत्या कर दिये। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रकाश मिश्र ने कुल छह गवाह पेश किया। जिसमें पुलिस व चिकित्सक को छोड़ शेष गवाह पक्ष द्रोही हो गये।
न्यायाधीश ने मेडिकल के आधार पर यह पाया कि मृतका के मुंह पर कपड़ा या तकिया रख कर तब तक दबाया गया, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। इसी आधार पर आरोपी पति धर्मेंद्र को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि आरोपी सास, ससुर व ननद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। वादी मुकदमा परदेशी द्वारा कोर्ट में अपने बयान से मुकर जाने पर न्यायाधीश ने प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुए नोटिस जारी किया है।
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मामले में सभी गवाह पक्ष द्रोही हो गए थे। न्यायाधीश ने मेडिकल के आधार पर यह सजा सुनाई है। साथ ही वादी मुकदमा के विरुद्ध प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुये नोटिस जारी किया है। अभियोजन कथानक के अनुसार- सुरेरी थाना क्षेत्र के अड़ियार निवासी परदेशी पुत्र स्व. सियाराम राजभर ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री
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शकुंतला की शादी आठ जुलाई 2008 को कठवतिया निवासी धर्मेंद्र पुत्र हीरालाल राजभर के साथ किया था। हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। साथ ही बारातियों का आवभगत किया था। पुत्री विदा होकर ससुराल गई तो पति धर्मेंद्र, ससुर हीरालाल, सास गिरिजा देवी व ननद किरन दहेज में सोने की अंगूठी व मोटर साइकिल की मांग को लेकर
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उसे प्रताड़ित करने लगे। मांग पूरी नहीं होने पर 11 जून 2015 की रात 8:30 बजे पुत्री शकुंतला की हत्या कर दिये। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रकाश मिश्र ने कुल छह गवाह पेश किया। जिसमें पुलिस व चिकित्सक को छोड़ शेष गवाह पक्ष द्रोही हो गये।
न्यायाधीश ने मेडिकल के आधार पर यह पाया कि मृतका के मुंह पर कपड़ा या तकिया रख कर तब तक दबाया गया, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। इसी आधार पर आरोपी पति धर्मेंद्र को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि आरोपी सास, ससुर व ननद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। वादी मुकदमा परदेशी द्वारा कोर्ट में अपने बयान से मुकर जाने पर न्यायाधीश ने प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुए नोटिस जारी किया है।