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खर्च 40 करोड़ महीना पढ़ाई कुछ भी नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sat, 17 Sep 2016 01:08 AM IST
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education
- फोटो : amar ujala
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जिले में बुनियादी शिक्षा व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। बच्चों की पढ़ाई के लिए हर महीने में 40.50 करोड़ रुपये सिर्फ अध्यापकों के वेतन पर खर्च होता है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का स्तर यह है कि चौथी और पांचवीं के छात्र अपना नाम भी लिखना नहीं जानते। गिनती, पहाड़ा, जोड़, घटाना और गुणा भाग का भी उन्हें ज्ञान नहीं है।
ऐसी खामी खुद बीएसए गजराज प्रसाद और उनके मातहतों की जांच में भी उजागर हो चुकी है। बुनियादी शिक्षा के लिए जिले में 2416 प्राथमिक विद्यालय और 878 जूनियर विद्यालय हैं। प्राइमरी विद्यालय में चार लाख 14 हजार 575 और जूनियर विद्यालयों में एक लाख 26 हजार 740 छात्र पढ़ते हैं।
बच्चों की शिक्षा के लिए प्राइमरी में 8135 और जूनियर विद्यालयों में 2492 शिक्षक तैनात हैं। किसी भी शिक्षक का वेतन 38 हजार से कम नहीं है। इस हिसाब से जिले में कुल 10627 शिक्षकों के वेतन पर हर महीने 40.50 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर साल शिक्षकों के वेतन पर 4.86 अरब खर्च होते हैं।
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लेकिन नतीजा सिफर है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गजराज प्रसाद यादव अगस्त महीने में शाहगंज और खुटहन ब्लाक के आठ विद्यालयों का निरीक्षण किया। उस दौरान उन्हेंाने कक्षा चार से लेकर पांचवीं तक के बच्चों से कई आसान सवाल किए लेकिन किसी ने भी सही जवाब नहीं दिया।
इसके लिए उन्होंने शिक्षकों डाट तो पिलाई ही साथ ही एबीआरसी और एनपी आरसी को भी निर्देश दिया था कि वे नियमित रूप से विद्यालय में शिक्षण कार्य करेंगे। साथ ही बच्चों के शैक्षिणिक स्तर को संतोषजनक बनाने का काम करेंगे। इस संबंध में बीएसए ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है।
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ऐसी खामी खुद बीएसए गजराज प्रसाद और उनके मातहतों की जांच में भी उजागर हो चुकी है। बुनियादी शिक्षा के लिए जिले में 2416 प्राथमिक विद्यालय और 878 जूनियर विद्यालय हैं। प्राइमरी विद्यालय में चार लाख 14 हजार 575 और जूनियर विद्यालयों में एक लाख 26 हजार 740 छात्र पढ़ते हैं।
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बच्चों की शिक्षा के लिए प्राइमरी में 8135 और जूनियर विद्यालयों में 2492 शिक्षक तैनात हैं। किसी भी शिक्षक का वेतन 38 हजार से कम नहीं है। इस हिसाब से जिले में कुल 10627 शिक्षकों के वेतन पर हर महीने 40.50 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर साल शिक्षकों के वेतन पर 4.86 अरब खर्च होते हैं।
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लेकिन नतीजा सिफर है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गजराज प्रसाद यादव अगस्त महीने में शाहगंज और खुटहन ब्लाक के आठ विद्यालयों का निरीक्षण किया। उस दौरान उन्हेंाने कक्षा चार से लेकर पांचवीं तक के बच्चों से कई आसान सवाल किए लेकिन किसी ने भी सही जवाब नहीं दिया।
इसके लिए उन्होंने शिक्षकों डाट तो पिलाई ही साथ ही एबीआरसी और एनपी आरसी को भी निर्देश दिया था कि वे नियमित रूप से विद्यालय में शिक्षण कार्य करेंगे। साथ ही बच्चों के शैक्षिणिक स्तर को संतोषजनक बनाने का काम करेंगे। इस संबंध में बीएसए ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है।