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पौने तीन करोड़ कीमत की परती जमीन हड़पी

Thu, 13 Apr 2017 12:15 AM IST
jaunpur
jaunpur Updated Thu, 13 Apr 2017 12:15 AM IST
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3 million worth of leakage land
road
लखनऊ-वाराणसी हाइवे पर स्थित सदर तहसील के इजरी गांव में सई नदी कि किनारे करोड़ों की नवीन परती जमीन फर्जीवाड़ा कर अपने नाम कराने और सरकार से उसका मुआवजा हड़पने के प्रयास का मामला सामने आया है। प्रकरण का खुलासा होते ही संबंधित एसडीएम ने नाम चढ़ाने संबंधी अपना ही आदेश रद्द कर दिया है। 2.73 करोड़ रुपये कीमत की जमीन हड़पे जाने की जानकारी पर डीएम ने पूरे मामले की जांच सीआरओ (मुख्य राजस्व अधिकारी) को सौंप दी है।
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सिरकोनी ब्लाक के इजरी गांव निवासी राजनाथ सिंह के पुत्र श्री राय साहब, लालबिहारी, राम सिंह और मलखान की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार को प्रतिपक्ष बनाते हुए सदर एसडीएम न्यायालय में वाद दाखिल किया गया। जिसमें कहा कि खतौनी में गलत तरीके से उनकी जमीन को नवीन परती खाते में दर्ज कर दिया गया है। इसे दुरुस्त किया जाए। मामले में तत्कालीन एसडीएम राकेश पटेल ने 05 सितंबर 2016 को फैसला दिया। फैसले में कहा गया कि चकबंदी अधिकारी जफराबाद के आदेश दिनांक 31.10.1968 और 11.05.1970 में पुराना नंबर 1369 और 1370 धर्मनाथ आदि के खाते में अंकित करने के लिए निर्देशित किया गया है। इससे साबित होता है कि 1369 और 1370 नंबर वादीगण को एलाट था। जिसमें बाद में नया नंबर 1303 और 1304 कायम हुआ।
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जो वादीगण के नाम होना चाहिए था। ऐसी दशा में दावा वादी एक पक्षीय रूप से डिग्री किए जाने योग्य है। इसके बाद भूमि 1303 का रकबा 0.401 हेक्टेयर और 1304 का रकबा 0.198 हेक्टेयर श्रीराय साहब आदि के नाम दर्ज हो गया। बता दें कि वर्ष 2014 में फोर लेन के लिए हुए जेएमएस (भूमि ज्वाइंट मैनेजमेंट सर्वे) में यह जमीन नवीन परती के रूप में दर्ज हो चुकी थी। उक्त जमीन पर नाम दर्ज हो जाने के बाद श्रीराय साहब आदि ने जमीन का मुआवजा पाने के लिए सीआरओ कार्यालय में आवेदन किया। एसडीएम डा. केएस पांडेय ने अभिलेखों की जांच की तो पता चला कि जिस जमीन के मुआवजे का दावा किया जा रहा है वह जेएमएस रिकार्ड में नवीन परती के नाम से दर्ज है। उन्होंने इसकी जानकारी मुख्य राजस्व अधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री को दी।
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इस पर मुख्य राजस्व अधिकारी ने 15 फरवरी 2017 को स्पष्टीकरण मांग लिया। इसकी जानकारी होते ही दूसरे ही दिन 16 फरवरी 2017 को एसडीएम सदर ने अपना 05 सितंबर 2016 का आदेश निरस्त कर दिया। मामले की जानकारी जिलाधिकारी को हुई तो उन्होंने इसकी जांच मुख्य राजस्व अधिकारी को सौंप दी है।
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