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पटाखा विस्फोट में गई थी आठ लोगों की जान
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जौनपुर। जिले में पटाखों का असुरक्षित और अवैध तरीके से भंडार किया जा रहा है। घनी आबादी वाले इलाकों में पटाखे बनाए जा रहे हैं। कई बार विस्फोट के बाद भी जिला प्रशासन ने सुरक्षा के उपायों पर अमल नहीं कराया और न ही चौकसी बरती जा रही है। नगर कोतवाली क्षेत्र के ही ओलंदगंज और जेसीज चौराहे के बीच स्थित एक मकान में वर्ष 2008 में पटाखा बनाते समय विस्फोट होने से आठ लोगों की मौत हुई थी। जिस घर में पटाखा बनाया जा रहा था उस परिवार के सभी सदस्यों की मौत हो चुकी है।
15 दिसंबर 2017 को बक्शा थाना क्षेत्र के बेलापुर गांव में पटाखों के गोदाम में विस्फोट हो गया। इससे आरिफ (12) और उसके बड़े भाई आशिक (22) की मौत हो गई थी। नतीजन 16 नवंबर 2009 को मडिय़ाहूं कोतवाली क्षेत्र के मिरदहा मोहल्ले में पटाखा बनाते समय विस्फोट हो गया था। इस घटना में लाल मोहम्मद उर्फ लल्ला, हारुन, एहसान की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन की तंद्रा भंग हुई, ङ्क्षकतु सख्ती की पोल 2015 में खुल गई। मछलीशहर कोतवाली के सादीगंज दक्षिणी मोहल्ले में कूड़े के ढेर में 19 अप्रैल 2015 को विस्फोट हो गया। इसमें तीन बच्चों की मौत हो गई थी। एक ने मौके पर दम तोड़ा था, तो दो की दूसरे दिन उपचार के दौरान मौत हो गईं थी। इस बार भी प्रशासन हरकत में आया, लेकिन 14 मई 2017 में फिर हादसा हुआ। जहां शहर कोतवाली के कटघरा मोहल्ले में पटाखा रखे घर में अचानक विस्फोट हो गया। हादसे में नन्हकी (23) की मौत हो गई, जबकि नौसाबा (48) ने एक माह बाद उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद भी जिम्मेदार हरकत में आए थे। कटघरा मोहल्ले में 13 लोगों को पास पटाखा बाने का लाइसेंस है लेकिन यह कारोबार 40 से अधिक घरों में होता है।
जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में हैं 12 बेड
जौनपुर। जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में 12 बेड हैं। अगर कभी भदोही जैसी घटना हुई तो जिला अस्पताल की व्यवस्था चरमरा सकती है। हालांकि मुख्य चिकित्साल अधीक्षक डा. एसके पांडेय का कहना है कि अस्पताल में सारी व्यवस्थाएं मुकम्मल हैं। डाक्टर, स्टाफ के अलावा दवाओं की उपलब्धता 24 घंटे है। बर्न वार्ड में एसी की व्यवस्था है।
15 दिसंबर 2017 को बक्शा थाना क्षेत्र के बेलापुर गांव में पटाखों के गोदाम में विस्फोट हो गया। इससे आरिफ (12) और उसके बड़े भाई आशिक (22) की मौत हो गई थी। नतीजन 16 नवंबर 2009 को मडिय़ाहूं कोतवाली क्षेत्र के मिरदहा मोहल्ले में पटाखा बनाते समय विस्फोट हो गया था। इस घटना में लाल मोहम्मद उर्फ लल्ला, हारुन, एहसान की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन की तंद्रा भंग हुई, ङ्क्षकतु सख्ती की पोल 2015 में खुल गई। मछलीशहर कोतवाली के सादीगंज दक्षिणी मोहल्ले में कूड़े के ढेर में 19 अप्रैल 2015 को विस्फोट हो गया। इसमें तीन बच्चों की मौत हो गई थी। एक ने मौके पर दम तोड़ा था, तो दो की दूसरे दिन उपचार के दौरान मौत हो गईं थी। इस बार भी प्रशासन हरकत में आया, लेकिन 14 मई 2017 में फिर हादसा हुआ। जहां शहर कोतवाली के कटघरा मोहल्ले में पटाखा रखे घर में अचानक विस्फोट हो गया। हादसे में नन्हकी (23) की मौत हो गई, जबकि नौसाबा (48) ने एक माह बाद उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद भी जिम्मेदार हरकत में आए थे। कटघरा मोहल्ले में 13 लोगों को पास पटाखा बाने का लाइसेंस है लेकिन यह कारोबार 40 से अधिक घरों में होता है।
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जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में हैं 12 बेड
जौनपुर। जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में 12 बेड हैं। अगर कभी भदोही जैसी घटना हुई तो जिला अस्पताल की व्यवस्था चरमरा सकती है। हालांकि मुख्य चिकित्साल अधीक्षक डा. एसके पांडेय का कहना है कि अस्पताल में सारी व्यवस्थाएं मुकम्मल हैं। डाक्टर, स्टाफ के अलावा दवाओं की उपलब्धता 24 घंटे है। बर्न वार्ड में एसी की व्यवस्था है।
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