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सात दिनों में चार गुना हो गए कोरोना मरीज
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जौनपुर। कोरोना के मरीजों की संख्या जिले में जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे अफसरों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। पिछले एक सप्ताह में संक्रमण की दर चार गुनी से भी अधिक हो गई है। 20 मई को जिले में सिर्फ 32 मरीज थे, जबकि मंगलवार को यह संख्या 138 हो गई थी। ढाई सौ से अधिक रिपोर्ट लंबित है। आगे भी मरीजों के आसार बने हुए हैं। तेजी से बढ़ता कोरोना आम जन के लिए तो चिंता का सबब है ही, जिम्मेदारों के लिए भी मरीजों की देखभाल व अन्य इंतजामों को लेकर तैयारियां फेल होती नजर आ रही हैं।
जिले में कोरोना का पहला मरीज 23 मार्च को सामने आया था। इसके बाद एक साथ दो केस दो अप्रैल को मिले। अप्रैल तक स्थितियां पूरी तरह नियंत्रण में रहीं। तब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग बेहतर इंतजाम का दावा करने लगा था। मई में जब प्रवासियों के आने का क्रम शुुरू हुआ तो कोरोना के इक्का-दुक्का मरीज आने लगे। तब तक जिला प्रशासन राहत में ही थी लेकिन मई के दूसरे पखवारे से जो मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी और स्थिति संभाल से बाहर हो गई है। 15 मई को जिले में कोरोना मरीजों की संख्या 18 थी, जिसमें आठ स्वस्थ हो चुके थे। 20 मई को यह संख्या 32 तक पहुंच गई। अगले एक सप्ताह में यह आंकड़ा 138 तक पहुंच गया है, जिसमें तीन लोगों की मौत भी हुई है।
एक साथ बड़ी संख्या में मरीज मिलने के बाद उपचार के इंतजाम की कलई खुलने लगी है। वाराणसी के पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में बना कोविड-19 एल-1 अस्पताल में बेड भरने के बाद जिले के मीरपुर में डेढ़ सौ बेड का अस्पताल बनाया गया था। वहां भी अब 90 फीसदी तक बेड भर गए हैं। ऐसे में प्रशासन को अब दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। यही नहीं, कोरोना मरीजों को गांव से निकालकर अस्पताल तक पहुंचाने में भी देरी हो रही है। इसके लिए प्रत्येक तहसील में एक-एक एंबुलेंस दी गई है, जिनसे एक बार में एक ही मरीज को लाया जाना है। बड़ी संख्या में मरीज होने से उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में भी 24 से 36 घंटे तक का समय लग रहा है। इस बाबत डीएम दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि संक्रमण रोकने के लिए हर संभव इंतजाम किए गए हैं। लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। बाहर से आने वाले 21 दिन का क्वारंटीन जरूर पूरा करें।
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जिले में कोरोना का पहला मरीज 23 मार्च को सामने आया था। इसके बाद एक साथ दो केस दो अप्रैल को मिले। अप्रैल तक स्थितियां पूरी तरह नियंत्रण में रहीं। तब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग बेहतर इंतजाम का दावा करने लगा था। मई में जब प्रवासियों के आने का क्रम शुुरू हुआ तो कोरोना के इक्का-दुक्का मरीज आने लगे। तब तक जिला प्रशासन राहत में ही थी लेकिन मई के दूसरे पखवारे से जो मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी और स्थिति संभाल से बाहर हो गई है। 15 मई को जिले में कोरोना मरीजों की संख्या 18 थी, जिसमें आठ स्वस्थ हो चुके थे। 20 मई को यह संख्या 32 तक पहुंच गई। अगले एक सप्ताह में यह आंकड़ा 138 तक पहुंच गया है, जिसमें तीन लोगों की मौत भी हुई है।
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एक साथ बड़ी संख्या में मरीज मिलने के बाद उपचार के इंतजाम की कलई खुलने लगी है। वाराणसी के पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में बना कोविड-19 एल-1 अस्पताल में बेड भरने के बाद जिले के मीरपुर में डेढ़ सौ बेड का अस्पताल बनाया गया था। वहां भी अब 90 फीसदी तक बेड भर गए हैं। ऐसे में प्रशासन को अब दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। यही नहीं, कोरोना मरीजों को गांव से निकालकर अस्पताल तक पहुंचाने में भी देरी हो रही है। इसके लिए प्रत्येक तहसील में एक-एक एंबुलेंस दी गई है, जिनसे एक बार में एक ही मरीज को लाया जाना है। बड़ी संख्या में मरीज होने से उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में भी 24 से 36 घंटे तक का समय लग रहा है। इस बाबत डीएम दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि संक्रमण रोकने के लिए हर संभव इंतजाम किए गए हैं। लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। बाहर से आने वाले 21 दिन का क्वारंटीन जरूर पूरा करें।
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