{"_id":"579d07a74f1c1b407e21e058","slug":"coolness-of-the-victims","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीड़ितों के कलेजे को मिली ठंडक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीड़ितों के कलेजे को मिली ठंडक
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 31 Jul 2016 01:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रमजीवी बम विस्फोट मामले में आरोपी मो. आलमगीर उर्फ रोनी को अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने पर घटना के पीड़ितों ने संतोष जाहिर किया है। उनका कहना है कि इस मामले के अन्य दोषियों को भी फांसी की सजा होनी चाहिए।
विस्फोट में घायल हुए ओलंदगंज निवासी मदनलाल सेठ कहते हैं कि जिस तरह जघन्य घटना को अंजाम दिया था, उसके लिए फांसी से कम कोई सजा होनी भी नहीं चाहिए थी। 11 साल बाद ही सही पर अदालत के फैसले से कलेजे को ठंडक मिली है।
घटना को याद कर मदनलाल कहते हैं कि वह अपने पांच साल के बेटे शिवम को लेकर इलाज के लिए दिल्ली जा रहे थे। धमाका हुआ तो वह बच्चे को गोद में लेकर ऐसे गिरे कि उनके कई दांत टूट गए। शिवम अब 16 साल का हो गया है, लेकिन तेज आवाज से उसे घबराहट होती है।
विज्ञापन
मोहल्ले में डीजे भी बजता है तो वह भागकर कमरे में छिप जाता है। दीपावली के समय जब पटाखे छूटते हैं तो वह घर से बाहर निकलता ही नहीं। इसी घटना के भुक्तभोगी शेखपुर निवासी गोरखनाथ निषाद भी अदालत के फैसले से खुश हैं।
अबीरगढ़ टोला निवासी विष्णु सेठ कहते हैं कि विस्फोट के दोषी को फांसी की सजा तो मिलनी ही चाहिए थी। आखिर उसकी करतूत के चलते 12 लोगों की जान चली गई और वह खुद भी अपना पैर गंवा बैठे। इलाज में मकान बिक गया। ऐसी घटना के दोषी को फांसी की सजा मिलनी ही चाहिए।
घटना में मारे गए मियांपुर निवासी अमरनाथ चौबे के परिवार के लोगों ने भी अदालत के फैसले पर संतोष जताया है। अमरनाथ चौबे के भाई सूर्यनाथ चौबे कहते हैं कि भाई तो वापस नहीं आएगा, लेकिन उसकी मौत के जिम्मेदार को फांसी की सजा होने से दिल को सुकून जरूर मिला है।
विज्ञापन
विस्फोट में घायल हुए ओलंदगंज निवासी मदनलाल सेठ कहते हैं कि जिस तरह जघन्य घटना को अंजाम दिया था, उसके लिए फांसी से कम कोई सजा होनी भी नहीं चाहिए थी। 11 साल बाद ही सही पर अदालत के फैसले से कलेजे को ठंडक मिली है।
विज्ञापन
घटना को याद कर मदनलाल कहते हैं कि वह अपने पांच साल के बेटे शिवम को लेकर इलाज के लिए दिल्ली जा रहे थे। धमाका हुआ तो वह बच्चे को गोद में लेकर ऐसे गिरे कि उनके कई दांत टूट गए। शिवम अब 16 साल का हो गया है, लेकिन तेज आवाज से उसे घबराहट होती है।
विज्ञापन
मोहल्ले में डीजे भी बजता है तो वह भागकर कमरे में छिप जाता है। दीपावली के समय जब पटाखे छूटते हैं तो वह घर से बाहर निकलता ही नहीं। इसी घटना के भुक्तभोगी शेखपुर निवासी गोरखनाथ निषाद भी अदालत के फैसले से खुश हैं।
अबीरगढ़ टोला निवासी विष्णु सेठ कहते हैं कि विस्फोट के दोषी को फांसी की सजा तो मिलनी ही चाहिए थी। आखिर उसकी करतूत के चलते 12 लोगों की जान चली गई और वह खुद भी अपना पैर गंवा बैठे। इलाज में मकान बिक गया। ऐसी घटना के दोषी को फांसी की सजा मिलनी ही चाहिए।
घटना में मारे गए मियांपुर निवासी अमरनाथ चौबे के परिवार के लोगों ने भी अदालत के फैसले पर संतोष जताया है। अमरनाथ चौबे के भाई सूर्यनाथ चौबे कहते हैं कि भाई तो वापस नहीं आएगा, लेकिन उसकी मौत के जिम्मेदार को फांसी की सजा होने से दिल को सुकून जरूर मिला है।