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कलेक्ट्रेट गेट पर घंटों जाम, लोग रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:28 AM IST
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शहर की ट्रैफिक व्यवस्था तीन सिपाहियों के भरोसे चल रही है। यही कारण है कि सोमवार को कलेक्ट्रेट गेट पर जाम लगने से लोग घंटों फंसे रहे। बस में सवार स्कूली बच्चे भी उमस भरी गर्मी में जाम में फंसकर परेशान रहे।
घंटे भर बाद टीएसआई ने पहुंचकर जाम समाप्त कराया। कलेक्ट्रेट गेट पर आटो चालक सड़क पर ही वाहन खड़ा कर सवारी भरते हैं।
स्कूल से छुट्टी होते ही दोपहर में स्कूली बसें बच्चों को घर छोड़ने के लिए निकलीं तो उसी दौरान कलेक्ट्रेट के पास बेतरतीब खड़े आटो के चलते जाम लग गया।
देखते ही देखते दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। वादकारी, अधिवक्ता, छात्र सभी जाम में फंसे रहे। उमस भरी गर्मी के बीच जाम को साफ कराने में पुलिस के भी पसीने छूट गए। सूत्रों की माने तो शहर में ट्रैफिक के कुल दस
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सिपाही और तीन हेड कांस्टेबिल हैं। इसमें चार सिपाही और एक हेड कांस्टेबिल मुख्यमंत्री के मऊ आगमन पर वीआईपी ड्यूटी में गए थे।
वहीं इलाहाबाद में दो सितंबर को सीएम के आगमन के मद्देनजर एक हेड कांस्टेबिल और दो सिपाहियों की ड्यूटी लगा दी गई है। एक सिपाही टीएसआई के साथ भ्रमण में रहता है।
ऐसे में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए तीन सिपाही और होमगार्ड ही बचे हैं। होमगार्डों की कोई सुनता नहीं और बेतरतीब वाहन खड़ा कर लोग इधर उधर चले जाते हैं। जिसकी वजह से जाम लगता है।
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घंटे भर बाद टीएसआई ने पहुंचकर जाम समाप्त कराया। कलेक्ट्रेट गेट पर आटो चालक सड़क पर ही वाहन खड़ा कर सवारी भरते हैं।
स्कूल से छुट्टी होते ही दोपहर में स्कूली बसें बच्चों को घर छोड़ने के लिए निकलीं तो उसी दौरान कलेक्ट्रेट के पास बेतरतीब खड़े आटो के चलते जाम लग गया।
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देखते ही देखते दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। वादकारी, अधिवक्ता, छात्र सभी जाम में फंसे रहे। उमस भरी गर्मी के बीच जाम को साफ कराने में पुलिस के भी पसीने छूट गए। सूत्रों की माने तो शहर में ट्रैफिक के कुल दस
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सिपाही और तीन हेड कांस्टेबिल हैं। इसमें चार सिपाही और एक हेड कांस्टेबिल मुख्यमंत्री के मऊ आगमन पर वीआईपी ड्यूटी में गए थे।
वहीं इलाहाबाद में दो सितंबर को सीएम के आगमन के मद्देनजर एक हेड कांस्टेबिल और दो सिपाहियों की ड्यूटी लगा दी गई है। एक सिपाही टीएसआई के साथ भ्रमण में रहता है।
ऐसे में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए तीन सिपाही और होमगार्ड ही बचे हैं। होमगार्डों की कोई सुनता नहीं और बेतरतीब वाहन खड़ा कर लोग इधर उधर चले जाते हैं। जिसकी वजह से जाम लगता है।