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सीएम ने पोंछे थे जिनके आंसू, उन्हें दस माह से क्षतिपूर्ति मिलने का इंतजार
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जौनपुर। फसल बीमा के नाम पर किसानों से प्रीमियम तो वसूल किया गया लेकिन अब क्षतिपूर्ति देने में कंपनी आनाकानी कर रही है। जिले के 805 किसान मुआवजा पाने के लिए कृषि विभाग का चक्कर काट रहे हैं। आंधी में हुई गेहूं की फसल के नुकसान का मुआवजा उन्हें अब तक नहीं मिल पाया है। इनका करीब 8.23 लाख रुपया बीमा कंपनी के पास अटका है। कृषि विभाग बीमा कंपनी को जिम्मेदार ठहरा रहा है और लखनऊ में बैठे बीमा कंपनी के अधिकारी किसानों को सही जवाब तक नहीं दे रहे हैं।
बीते मार्च माह में होली के दो दिनों बाद आए आंधी और ओलावृष्टि ने जिले में तबाही बरपाई थी। इससे खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। खेती की बरबादी की व्यथा सुनकर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जिले में आए थे। करंजाकला ब्लाक परिसर में 14 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में कुछ किसानों को उनकी फसलों की क्षतिपूर्ति की राशि दी थी। उन्होंने अफसरों से सर्वे की प्रक्रिया पूरी करके एक सप्ताह में सभी किसानों के खाते में क्षतिपूर्ति की राशि भेजने कतो कहा था। सर्वे हुआ और क्षतिपूर्ति की रिपोर्ट तैयार कर बीमा कंपनी को भेज दिया गया। तब से ही किसान क्षतिपूर्ति की राशि मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक आंधी और ओलावृष्टि से 1516 किसानों की करीब 800 हेक्टेयर गेहूं की फसल बर्बाद हुई थी। यह संख्या उन किसानों की है, जिन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम जमा किया था। इसमें 711 किसानों को तो क्षतिपूर्ति की रकम मिली लेकिन अभी तक 805 किसान क्षतिपूर्ति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
बदलापुर ब्लाक के बलुआ निवासी पंचम यादव की आंधी व ओलावृष्टि से एक एकड़ गेहूं की फसल नष्ट हो गई थी। क्षतिपूर्ति के लिए दो बार आवेदन किया लेकिन एक रुपया नहीं मिला। कृषि विभाग के अधिकारी बीमा कंपनी के अधिकारियों का नंबर थमा देते हैं और उस नंबर पर फोन करने पर कोई सटीक जानकारी नहीं दी जाती है। करंजाकला ब्लाक के काफरपुर निवासी हीरालाल विश्वकर्मा ने बताया कि आंधी व ओला से दो एकड़ गेहूं की फसल नष्ट हुई थी। मुख्यमंत्री के कहने के बाद भी क्षतिपूर्ति नहीं मिली।
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क्षतिपूर्ति का काम बीमा कंपनी का है। 805 किसानों की करीब 8.23 लाख रुपये क्षतिपूर्ति का भुगतान बीमा कंपनी ने नहीं किया है। उसके लिए बराबर पत्राचार किया जा रहा है लेकिन कंपनी के अधिकारी समुचित जवाब नहीं दे रहे हैं। इस बात से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। -जयप्रकाश, उप कृषि निदेशक।
किसानों के आवेदन में त्रुटियां है। उन्हें संशोधन कराने के लिए कहा लेकिन किसी ने रुचि नहीं दिखाई। इस कारण क्षतिपूर्ति नहीं मिली है। इससे ज्यादा इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकता। -आकाश, राज्य समन्वयक, एचडीएफसी अर्गो
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बीते मार्च माह में होली के दो दिनों बाद आए आंधी और ओलावृष्टि ने जिले में तबाही बरपाई थी। इससे खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। खेती की बरबादी की व्यथा सुनकर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जिले में आए थे। करंजाकला ब्लाक परिसर में 14 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में कुछ किसानों को उनकी फसलों की क्षतिपूर्ति की राशि दी थी। उन्होंने अफसरों से सर्वे की प्रक्रिया पूरी करके एक सप्ताह में सभी किसानों के खाते में क्षतिपूर्ति की राशि भेजने कतो कहा था। सर्वे हुआ और क्षतिपूर्ति की रिपोर्ट तैयार कर बीमा कंपनी को भेज दिया गया। तब से ही किसान क्षतिपूर्ति की राशि मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक आंधी और ओलावृष्टि से 1516 किसानों की करीब 800 हेक्टेयर गेहूं की फसल बर्बाद हुई थी। यह संख्या उन किसानों की है, जिन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम जमा किया था। इसमें 711 किसानों को तो क्षतिपूर्ति की रकम मिली लेकिन अभी तक 805 किसान क्षतिपूर्ति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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बदलापुर ब्लाक के बलुआ निवासी पंचम यादव की आंधी व ओलावृष्टि से एक एकड़ गेहूं की फसल नष्ट हो गई थी। क्षतिपूर्ति के लिए दो बार आवेदन किया लेकिन एक रुपया नहीं मिला। कृषि विभाग के अधिकारी बीमा कंपनी के अधिकारियों का नंबर थमा देते हैं और उस नंबर पर फोन करने पर कोई सटीक जानकारी नहीं दी जाती है। करंजाकला ब्लाक के काफरपुर निवासी हीरालाल विश्वकर्मा ने बताया कि आंधी व ओला से दो एकड़ गेहूं की फसल नष्ट हुई थी। मुख्यमंत्री के कहने के बाद भी क्षतिपूर्ति नहीं मिली।
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क्षतिपूर्ति का काम बीमा कंपनी का है। 805 किसानों की करीब 8.23 लाख रुपये क्षतिपूर्ति का भुगतान बीमा कंपनी ने नहीं किया है। उसके लिए बराबर पत्राचार किया जा रहा है लेकिन कंपनी के अधिकारी समुचित जवाब नहीं दे रहे हैं। इस बात से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। -जयप्रकाश, उप कृषि निदेशक।
किसानों के आवेदन में त्रुटियां है। उन्हें संशोधन कराने के लिए कहा लेकिन किसी ने रुचि नहीं दिखाई। इस कारण क्षतिपूर्ति नहीं मिली है। इससे ज्यादा इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकता। -आकाश, राज्य समन्वयक, एचडीएफसी अर्गो