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Jaunpur News: स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों को 'लो वोल्टेज' का झटका, अस्पताल की लिफ्ट एक महीने से बंद
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जिला अस्पताल की बंद लिफ्ट। संवाद
जौनपुर। सरकार भले ही जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय में लाखों रुपये की लागत से लगाई गई लिफ्ट एक महीने से खराब है। नतीजा यह है कि हर दिन सैकड़ों गंभीर मरीज और उनके तीमारदार लिफ्ट बंद होने से सीढ़ियों पर बैठ-बैठकर और हांफते हुए ऊपरी तल पर पहुंचते हैं।
इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से बात की गई तो उनका कहना है लो वोल्टेज के कारण मशीन बंद है, इसलिए लिफ्ट चालू नहीं हो पा रही है।
अहम सवाल ये है कि अस्पताल की इस बुनियादी और बेहद जरूरी सुविधा को बहाल करने की जहमत क्यों नहीं उठाई जा रही है। जबकि हर दिन हजारों मरीजों को पहली व दूसरी मंजिल पर स्थित ओपीडी और वार्डों तक आना-जाना होता है।
उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय का भवन वर्ष 1998 में बनकर तैयार हुआ था। इसके बाद से अस्पताल को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया। गंभीर मरीजों को ऊपरी मंजिलों पर स्थित ऑपरेशन थिएटर और वार्डों तक ले जाने के लिए दो दशक पहले इस लिफ्ट की व्यवस्था की गई थी। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह लिफ्ट आज सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गई है। इसका खामियाजा बुजुर्गों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक भुगतना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में 900 से 1200 की होती ओपीडी -जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज 900 से 1200 मरीज इलाज के लिए आते हैं। कई बार तीमारदार अपने गंभीर रूप से बीमार परिजनों को गोद में या कंधों के सहारे सीढ़ियों से ऊपर वार्डों तक ले जाते दिखाई देते हैं। जिम्मेदारों की इस घोर लापरवाही के कारण न सिर्फ मरीजों के इलाज में देरी हो रही है, बल्कि पल-पल उनकी जान पर भी जोखिम बना हुआ है।
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उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय में लाखों रुपये की लागत से लगाई गई लिफ्ट एक महीने से खराब है। नतीजा यह है कि हर दिन सैकड़ों गंभीर मरीज और उनके तीमारदार लिफ्ट बंद होने से सीढ़ियों पर बैठ-बैठकर और हांफते हुए ऊपरी तल पर पहुंचते हैं।
इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से बात की गई तो उनका कहना है लो वोल्टेज के कारण मशीन बंद है, इसलिए लिफ्ट चालू नहीं हो पा रही है।
अहम सवाल ये है कि अस्पताल की इस बुनियादी और बेहद जरूरी सुविधा को बहाल करने की जहमत क्यों नहीं उठाई जा रही है। जबकि हर दिन हजारों मरीजों को पहली व दूसरी मंजिल पर स्थित ओपीडी और वार्डों तक आना-जाना होता है।
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उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय का भवन वर्ष 1998 में बनकर तैयार हुआ था। इसके बाद से अस्पताल को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया। गंभीर मरीजों को ऊपरी मंजिलों पर स्थित ऑपरेशन थिएटर और वार्डों तक ले जाने के लिए दो दशक पहले इस लिफ्ट की व्यवस्था की गई थी। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह लिफ्ट आज सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गई है। इसका खामियाजा बुजुर्गों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक भुगतना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में 900 से 1200 की होती ओपीडी -जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज 900 से 1200 मरीज इलाज के लिए आते हैं। कई बार तीमारदार अपने गंभीर रूप से बीमार परिजनों को गोद में या कंधों के सहारे सीढ़ियों से ऊपर वार्डों तक ले जाते दिखाई देते हैं। जिम्मेदारों की इस घोर लापरवाही के कारण न सिर्फ मरीजों के इलाज में देरी हो रही है, बल्कि पल-पल उनकी जान पर भी जोखिम बना हुआ है।

जिला अस्पताल की बंद लिफ्ट। संवाद