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Jaunpur News: तीन करोड़ से बनी सीएचसी, इलाज करने के लिए एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं
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विकास क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का सरकारी सपना तीन करोड़ खर्च के बाद भी साकार नही हो सका। नौ साल पहले 3 करोड़ खर्च करके ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्र चांदपुर में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र(सीएचसी ) का हाल बदहाल है। स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के साथ साथ उनका लापरवाही पूर्ण रवैया जरूरत मंद लोगों को दूर दराज के अस्पतालों में अधिक धन खर्च करने को मजबूर कर रहा है।
उत्तर प्रदेश विधायन एवं निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड वाराणसी द्वारा निर्मित इसके भवन का वर्चुवल लोकार्पण 25 सितंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। जिम्मेदार अधिकारी लोकार्पण के बाद इसकी सुधि लेना ही भूल गए और अब स्थिति यह हो गई है कि बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इस ब्लॉक में कोई सीएचसी भी है।
यहां उपलब्ध सुविधाओं के नाम पर खानापूर्ति ही दिखाई देती है। इतने बड़े अस्पताल में न तो बाल रोग विशेषज्ञ हैं और न ही स्त्री रोग। एक मात्र स्टाफ नर्स हिना तबस्सुम डिलवरी प्रसव कार्य कराती हैं।
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प्रसूता को कुछ न हो यह ईश्वर की ही कृपा है। साफ-सफाई की व्यवस्था बाद से बदतर है। जहां आज की चिकित्सा व्यवस्था हाईटेक हो चुकी है वहां इस केंद्र पर जांच के नाम पर सामान्य पैथॉलाजी ही उपलब्ध है। न तो एक्स-रे मशीन है न ही अल्ट्रा साउंड व ईसीजी इंस्ट्रूमेंट। यहां तैनात फार्मासिस्ट संजय सोनकर यहां के एक मात्र डा.अवनीश कुमार सोनकर से अधिक ओपीडी करते हैं।
इसके पीछे जो कारण बताया गया वह उस समय सही साबित हुआ जब मंगलवार को 10.30 बजे तक केंद्र पर डा. नहीं पहुंचे उनका कार्य फार्मासिस्ट निबटाते रहते हैं। जब उनसे पूछा गया कि कहा हैं तो फोन पर बताए कि आज थोड़ी देर हो गई। रास्ते में हूं आ रहा हूं। अस्पताल पर पहुंचे मरीजों ने बताया कि यह उनका रोज का कार्य है। निर्धारित समय पर नहीं आते। लोग घंटो इंतजार करते हैं और वापस भी चले जाते हैं।
बातचीत में चिकित्सक ने बताया कि कुछ सुविधाएं न होने के कारण रोगियों को बाहर भी भेजना पड़ता है। यह पूछने पर कि आपके इस केंद्र पर कितने कर्मचारी नियुक्त हैं उनका उत्तर था देखना पड़ेगा कभी रजिस्टर चेक नहीं किया हूं। कुछ अत्यावश्यक दवाएं भी स्टॉक में नहीं हैं।
नेबुलाईजेशन की व्यवस्था न होने से स्वांस रोगी इलाज नहीं करा पाते हैं।
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उत्तर प्रदेश विधायन एवं निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड वाराणसी द्वारा निर्मित इसके भवन का वर्चुवल लोकार्पण 25 सितंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। जिम्मेदार अधिकारी लोकार्पण के बाद इसकी सुधि लेना ही भूल गए और अब स्थिति यह हो गई है कि बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इस ब्लॉक में कोई सीएचसी भी है।
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यहां उपलब्ध सुविधाओं के नाम पर खानापूर्ति ही दिखाई देती है। इतने बड़े अस्पताल में न तो बाल रोग विशेषज्ञ हैं और न ही स्त्री रोग। एक मात्र स्टाफ नर्स हिना तबस्सुम डिलवरी प्रसव कार्य कराती हैं।
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प्रसूता को कुछ न हो यह ईश्वर की ही कृपा है। साफ-सफाई की व्यवस्था बाद से बदतर है। जहां आज की चिकित्सा व्यवस्था हाईटेक हो चुकी है वहां इस केंद्र पर जांच के नाम पर सामान्य पैथॉलाजी ही उपलब्ध है। न तो एक्स-रे मशीन है न ही अल्ट्रा साउंड व ईसीजी इंस्ट्रूमेंट। यहां तैनात फार्मासिस्ट संजय सोनकर यहां के एक मात्र डा.अवनीश कुमार सोनकर से अधिक ओपीडी करते हैं।
इसके पीछे जो कारण बताया गया वह उस समय सही साबित हुआ जब मंगलवार को 10.30 बजे तक केंद्र पर डा. नहीं पहुंचे उनका कार्य फार्मासिस्ट निबटाते रहते हैं। जब उनसे पूछा गया कि कहा हैं तो फोन पर बताए कि आज थोड़ी देर हो गई। रास्ते में हूं आ रहा हूं। अस्पताल पर पहुंचे मरीजों ने बताया कि यह उनका रोज का कार्य है। निर्धारित समय पर नहीं आते। लोग घंटो इंतजार करते हैं और वापस भी चले जाते हैं।
बातचीत में चिकित्सक ने बताया कि कुछ सुविधाएं न होने के कारण रोगियों को बाहर भी भेजना पड़ता है। यह पूछने पर कि आपके इस केंद्र पर कितने कर्मचारी नियुक्त हैं उनका उत्तर था देखना पड़ेगा कभी रजिस्टर चेक नहीं किया हूं। कुछ अत्यावश्यक दवाएं भी स्टॉक में नहीं हैं।
नेबुलाईजेशन की व्यवस्था न होने से स्वांस रोगी इलाज नहीं करा पाते हैं।