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Jaunpur News: चार महीनों से ग्राम पंचायतों में नहीं लग रहा चौपाल
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जौनपुर। शासन का आदेश था कि ग्राम पंचायतों में हर शुक्रवार को चौपाल लगाकर गांव की समस्याओं पर चर्चा होगी। बावजूद लोकसभा चुनाव के पहले से बाधित यह यह प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो सकी। चौपाल लगाने का उद्देश्य यह है कि गांव की समस्या का गांव में समाधान किया जा सके। फिलहाल गांवों में चौपाल न लगने से अब फरियादी अपनी समस्याओं को लेकर संपूर्ण समाधान दिवस, समाधान दिवस में लेकर पहुंच रहे हैं।
जनवरी 2023 से ग्राम चौपाल की शुरुआत की गई। उद्देश्य था कि गांव की समस्या का गांव में समाधान हो। आदेश के तहत हर ब्लॉक में दो ग्राम पंचायतों में ग्राम चौपाल लगानी थी। यहां 21 ब्लॉक में 42 ग्राम पंचायतों में चौपाल का आयोजन होता रहा। इसमें बीडीओ की अध्यक्षता में सुनवाई किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद पूर्व डीएम अनुज कुमार झा ने इसे गंभीरता से लिया। स्वयं ग्राम चौपाल में जाते थे। उनके जाने की वजह से कार्यक्रम में सीडीओ से लेकर सभी जिला स्तरीय अधिकारी भी पहुंचते थे। जनता की मौके पर ठीक ढंग से सुनवाई होती थी काफी मामलों का गंभीरता से निस्तारण भी होता था। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना 16 मार्च को लगने के बाद से सारे सरकारी कार्यक्रम गांवों में लगने वाले चौपाल, तहसीलों में लगने वाले संपूर्ण समाधान दिवस, थाना में लगने वाले समाधान दिवस पर भी रोक लगा दी गई। चुनाव खत्म होने के बाद हर शनिवार को लगने वाला संपूर्ण समाधान दिवस व समाधान दिवस तो चालू हो गया लेकिन ग्राम चौपाल नहीं शुरू हो सका। इससे गांव की समस्या गांव में समाधान नहीं हो पा रहा है।
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वर्जन ...
जनसमस्याओं का निस्तारण करना प्रशासन की प्राथमिकता है। चौपाल का आयोजन किया जा रहा है, जहां नहीं हो रही वहां दिखवाते हैं।
- रविंद्र कुमार मांदड़, जिलाधिकारी।
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जनवरी 2023 से ग्राम चौपाल की शुरुआत की गई। उद्देश्य था कि गांव की समस्या का गांव में समाधान हो। आदेश के तहत हर ब्लॉक में दो ग्राम पंचायतों में ग्राम चौपाल लगानी थी। यहां 21 ब्लॉक में 42 ग्राम पंचायतों में चौपाल का आयोजन होता रहा। इसमें बीडीओ की अध्यक्षता में सुनवाई किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद पूर्व डीएम अनुज कुमार झा ने इसे गंभीरता से लिया। स्वयं ग्राम चौपाल में जाते थे। उनके जाने की वजह से कार्यक्रम में सीडीओ से लेकर सभी जिला स्तरीय अधिकारी भी पहुंचते थे। जनता की मौके पर ठीक ढंग से सुनवाई होती थी काफी मामलों का गंभीरता से निस्तारण भी होता था। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना 16 मार्च को लगने के बाद से सारे सरकारी कार्यक्रम गांवों में लगने वाले चौपाल, तहसीलों में लगने वाले संपूर्ण समाधान दिवस, थाना में लगने वाले समाधान दिवस पर भी रोक लगा दी गई। चुनाव खत्म होने के बाद हर शनिवार को लगने वाला संपूर्ण समाधान दिवस व समाधान दिवस तो चालू हो गया लेकिन ग्राम चौपाल नहीं शुरू हो सका। इससे गांव की समस्या गांव में समाधान नहीं हो पा रहा है।
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जनसमस्याओं का निस्तारण करना प्रशासन की प्राथमिकता है। चौपाल का आयोजन किया जा रहा है, जहां नहीं हो रही वहां दिखवाते हैं।
- रविंद्र कुमार मांदड़, जिलाधिकारी।