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आस्था की राह में अव्यवस्था, छठ घाटों पर अधूरी तैयारी
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हनुमान घाट पर फैली गंदगी।
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। लोक आस्था का महापर्व छठ 18 नवंबर से शुरू हो रहा है। महिलाएं व्रत की तैयारी में जुट गई हैं। घरों में साफ-सफाई कर पूजन सामग्री जुटाने का कार्य शुरू है, मगर छठ घाटों की सफाई को लेकर जिम्मेदार अभी भी सो रहे हैं। शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं भी अब तक न तो छठ घाटों की सफाई हुई है और न ही रंग-रोगन सहित कार्य शुरू हो पाए हैं। यही हाल रहा तो इस बार महिलाओं को गंदगी के बीच ही छठ पूजा के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
पुत्र की प्राप्ति और मंगल कामना के लिए महिलाएं छठ व्रत करती हैं। 18 नवंबर को नहाय खाय से शुरू होने वाला यह व्रत 21 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूरा होगा। शहर में गोमती नदी के विभिन्न घाटों समेत 24 स्थानों पर छठ पूजा होती है। इसमें राजा साहब का पोखरा, चौकियां धाम का पोखरा भी प्रमुख हैं। पूजा के लिए घाटों पर वेदी बनाने का क्रम शुरू हो गया है। पहले से ही लोग वेदी बनाकर अपना जगह आरक्षित करने में जुटे हैं। उधर, पालिका प्रशासन ने अब तक सफाई कार्य शुरू भी नहीं किया है। न तो घाटों की सफाई कराई जा रही है और न ही तालाब का पानी साफ करने का इंतजाम हुआ है। छठ घाट को जाने वाले मार्गों की हालत भी खराब है। चारों तरफ गंदगी का अंबार और अव्यवस्था आस्थावानों पर भारी पड़ रहा है।
इन स्थानों पर होती है छठ पूजा
जौनपुर। शहर क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे स्थित विसर्जन घाट, गोपी घाट, हनुमान घाट, केरारबीर घाट, शिव घाट, बलुआ घाट, अंचलादेवी घाट, बड़े हुनमान घाट, कंकड़हे घाट, चाचकपुर घाट, सूरज घाट, मियांपुर घाट, शेखपुरा घाट, गुलर घाट, बजरंगा घाट, तुतीपुर घाट, रंगीले घाट, पानदरीबा घाट, हरदीपुर घाट, इमामबाड़ा घाटव गोकुल घाट सहित राजासाहब तालाब व चौकियां धाम स्थित तालाब आदि स्थानों पर छठ पूजा होती है।
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ऐसे होगी छठ पूजा
पहला दिन (18 नवंबर): छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय का होगा। महिलाएं स्नान के बाद पूजा का संकल्प लेंगी। पूरे दिन व्रत रहने के दौरान वह सिर्फ लौकी की सब्जी व चावल भी ग्रहण करेंगी।
दूसरा दिन (19 नवंबर): पूजन का दूसरा दिन खरना के रुप में जाना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं घाटों पर जाकर पूजन के लिए वेदी तैयार करती हैं। शाम को गुड़ की खीर व पूड़ी का प्रसाद ग्रहण करती हैं।
तीसरा दिन (20 नवंबर): छठ पूजा के तीसरे दिन व्रती महिलाएं नदी-तालाब के तटों पर पहुंचकर पूजन करेंगी। अस्ताचलगामी सूर्य को छठ का पहला अर्घ्य अर्पित करेंगी।
चौथा दिन (21 नवंबर): सप्तमी तिथि पर सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ पूजा का समापन होगा।
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पुत्र की प्राप्ति और मंगल कामना के लिए महिलाएं छठ व्रत करती हैं। 18 नवंबर को नहाय खाय से शुरू होने वाला यह व्रत 21 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूरा होगा। शहर में गोमती नदी के विभिन्न घाटों समेत 24 स्थानों पर छठ पूजा होती है। इसमें राजा साहब का पोखरा, चौकियां धाम का पोखरा भी प्रमुख हैं। पूजा के लिए घाटों पर वेदी बनाने का क्रम शुरू हो गया है। पहले से ही लोग वेदी बनाकर अपना जगह आरक्षित करने में जुटे हैं। उधर, पालिका प्रशासन ने अब तक सफाई कार्य शुरू भी नहीं किया है। न तो घाटों की सफाई कराई जा रही है और न ही तालाब का पानी साफ करने का इंतजाम हुआ है। छठ घाट को जाने वाले मार्गों की हालत भी खराब है। चारों तरफ गंदगी का अंबार और अव्यवस्था आस्थावानों पर भारी पड़ रहा है।
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इन स्थानों पर होती है छठ पूजा
जौनपुर। शहर क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे स्थित विसर्जन घाट, गोपी घाट, हनुमान घाट, केरारबीर घाट, शिव घाट, बलुआ घाट, अंचलादेवी घाट, बड़े हुनमान घाट, कंकड़हे घाट, चाचकपुर घाट, सूरज घाट, मियांपुर घाट, शेखपुरा घाट, गुलर घाट, बजरंगा घाट, तुतीपुर घाट, रंगीले घाट, पानदरीबा घाट, हरदीपुर घाट, इमामबाड़ा घाटव गोकुल घाट सहित राजासाहब तालाब व चौकियां धाम स्थित तालाब आदि स्थानों पर छठ पूजा होती है।
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ऐसे होगी छठ पूजा
पहला दिन (18 नवंबर): छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय का होगा। महिलाएं स्नान के बाद पूजा का संकल्प लेंगी। पूरे दिन व्रत रहने के दौरान वह सिर्फ लौकी की सब्जी व चावल भी ग्रहण करेंगी।
दूसरा दिन (19 नवंबर): पूजन का दूसरा दिन खरना के रुप में जाना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं घाटों पर जाकर पूजन के लिए वेदी तैयार करती हैं। शाम को गुड़ की खीर व पूड़ी का प्रसाद ग्रहण करती हैं।
तीसरा दिन (20 नवंबर): छठ पूजा के तीसरे दिन व्रती महिलाएं नदी-तालाब के तटों पर पहुंचकर पूजन करेंगी। अस्ताचलगामी सूर्य को छठ का पहला अर्घ्य अर्पित करेंगी।
चौथा दिन (21 नवंबर): सप्तमी तिथि पर सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ पूजा का समापन होगा।