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नहरें सूखीं, 68 फीसदी किसान नहीं कर सके धान की रोपाई
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नहरों में पानी नहीं आने के कारण केवल 32 फीसदी किसान ही अभी तक निजी व सरकारी ट्यूबवेल के माध्यम से धान की रोपाई कर पाए हैं, जबकि 68 फीसदी किसान रोपाई नहीं कर सके हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि धान की रोपाई का उचित समय चल रहा है। इसलिए धान की रोपाई न हो पाने से किसानों को चिंता सता रही है। समय से रोपाई न हो पाने का असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। धान की नर्सरी भी खेतों में पानी के अभाव में सूख रही है। नर्सरी खराब होने से कई किसान धान की रोपाई भी नहीं कर पाएंगे।
जिले में दो लाख 86 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। जिसकी सिंचाई नहरों के अलावा सरकारी व प्राइवेट नलकूपों के माध्यम से होती है। सबसे अधिक कृषि योग्य भूमि की सिंचाई नहरों से होती है। जिले में कुल 343 नहरों से एक लाख 66 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई होती है। निजी व सरकारी नलकूपों से खेती करने वाले किसान तो धान की रोपाई करने में जुट गए हैं, लेकिन नहरों के भरोसे खेती करने वाले किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं। इसका मुख्य कारण नहरों में पानी नहीं आना है। नहरों में पानी नहीं आने से धान की रोपाई बाधित है। इसके चलते धान की नर्सरी भी सूख रही है। अगर जल्द ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो काफी संख्या में किसान धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे। उधर, जिले में कृषि विभाग की ओर से एक लाख 47 हजार 84 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक 47 हजार 67 हेक्टेेेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है। अब भी एक लाख 17 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई नहीं हो सकी है। कृषि विज्ञान केंद्र अमिहित के वैज्ञानिक डा.नरेंद्र रघुवंशी का कहना है कि जुलाई माह में धान की रोपाई का उचित समय होता है। इस माह में 15 जुलाई तक अगैती धान की फसल की रोपाई हो जानी चाहिए। अगर किसी कारण से किसान धान की रोपाई नहीं कर पाते हैं तो वे सांडा विधि का प्रयोग कर धान की रोपाई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि 15 से 30 जुलाई तक मध्यम और पिछैती धान की फसल की रोपाई का समय है। उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आशीष कुमार कुशवाहा का कहना है कि बारिश कम होने से पानी की कमी हो गई है। इसके चलते नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। जल्द ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। इसके लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। ताकि धान की रोपाई हो सके।
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जुलाई में 22.8 एमएम हुई बारिश
जौनपुर। जिले में इस बार समय से पहले बारिश होने से किसानों के चेहरे खिला गए थे, लेकिन अब उन्हें चिंता सताने लगी है। कारण, जून माह में बारिश होने से किसानों ने धान की नर्सरी तो डाल दी, लेकिन जुलाई में बारिश नहीं होने से अब धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। जून में 292.83 एमएम बारिश हुई थी, जबकि जुलाई में अब तक 22.8 एमएम ही बारिश हुई है। पिछले वर्ष जून माह में 138.31 एमएम और जुलाई माह में 706.55 एमएम बारिश हुई थी।
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जिले में दो लाख 86 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। जिसकी सिंचाई नहरों के अलावा सरकारी व प्राइवेट नलकूपों के माध्यम से होती है। सबसे अधिक कृषि योग्य भूमि की सिंचाई नहरों से होती है। जिले में कुल 343 नहरों से एक लाख 66 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई होती है। निजी व सरकारी नलकूपों से खेती करने वाले किसान तो धान की रोपाई करने में जुट गए हैं, लेकिन नहरों के भरोसे खेती करने वाले किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं। इसका मुख्य कारण नहरों में पानी नहीं आना है। नहरों में पानी नहीं आने से धान की रोपाई बाधित है। इसके चलते धान की नर्सरी भी सूख रही है। अगर जल्द ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो काफी संख्या में किसान धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे। उधर, जिले में कृषि विभाग की ओर से एक लाख 47 हजार 84 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक 47 हजार 67 हेक्टेेेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है। अब भी एक लाख 17 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई नहीं हो सकी है। कृषि विज्ञान केंद्र अमिहित के वैज्ञानिक डा.नरेंद्र रघुवंशी का कहना है कि जुलाई माह में धान की रोपाई का उचित समय होता है। इस माह में 15 जुलाई तक अगैती धान की फसल की रोपाई हो जानी चाहिए। अगर किसी कारण से किसान धान की रोपाई नहीं कर पाते हैं तो वे सांडा विधि का प्रयोग कर धान की रोपाई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि 15 से 30 जुलाई तक मध्यम और पिछैती धान की फसल की रोपाई का समय है। उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आशीष कुमार कुशवाहा का कहना है कि बारिश कम होने से पानी की कमी हो गई है। इसके चलते नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। जल्द ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। इसके लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। ताकि धान की रोपाई हो सके।
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जुलाई में 22.8 एमएम हुई बारिश
जौनपुर। जिले में इस बार समय से पहले बारिश होने से किसानों के चेहरे खिला गए थे, लेकिन अब उन्हें चिंता सताने लगी है। कारण, जून माह में बारिश होने से किसानों ने धान की नर्सरी तो डाल दी, लेकिन जुलाई में बारिश नहीं होने से अब धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। जून में 292.83 एमएम बारिश हुई थी, जबकि जुलाई में अब तक 22.8 एमएम ही बारिश हुई है। पिछले वर्ष जून माह में 138.31 एमएम और जुलाई माह में 706.55 एमएम बारिश हुई थी।
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