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बोर्ड परीक्षा में नकल पर नहीं लग पाई रोक
jaunpur
Updated Sun, 19 Mar 2017 12:50 AM IST
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माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में नकल माफिया हावी हो गए हैं। डीएम के छुट्टी पर जाने की वजह से अधिकारियों की भी मौज हो गई है। सभी कोरम पूरा करने में जुटे हैं। यही वजह है कि नकल माफिया चांदी काट रहे हैं और इमला बोल कापियां लिखवाई जा रही हैं।
जिले के 285 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। परीक्षा में नकल न हो इसके लिए डीएम डा. बलकार सिंह ने छह जोनल, छह सुपर जोनल और 38 सेक्टर मजिस्ट्रेट के अलावा छह सचल दस्ते लगाकर एडीएम को इसका प्रभारी बनाया गया है। लेकिन परीक्षा शुरू होते ही डीएम छुट्टी पर चले गए। उधर, नकल माफिया नकल कराने में जुट गए हैं। दूसरे के स्थान पर बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा दे रहे हैं। इसका खुलासा दो छात्रों के पकड़े जाने के बाद हुआ है। बावजूद इसके कोई कड़ाई नही दिखाई जा रही है। तीन दिन परीक्षा बीत गया लेकिन पूरे जिले में सिर्फ सात नकलची पकड़े गए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सेक्टर मजिस्ट्रेट से लेकर जोनल मजिस्ट्रेटाें की नजर वित्त विहिन विद्यालयों की तरफ अधिक है।
पूर्व डीएम भानुचंद्र गोस्वामी ने परीक्षा केंद्र निर्धारण में कई नकल माफियाओं के स्कूलों को सेंटर नही बनाया। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी ही नकल माफियों के संरक्षण में घुम टहल रहे हैं। परीक्षा की सूचिता तार तार हो गई है। यह अलग बात है कि हजारों छात्रों ने परीक्षा सेंटर मनमाफिक नही होने की वजह से छोड़ दिए हैं।
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जिले के 285 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। परीक्षा में नकल न हो इसके लिए डीएम डा. बलकार सिंह ने छह जोनल, छह सुपर जोनल और 38 सेक्टर मजिस्ट्रेट के अलावा छह सचल दस्ते लगाकर एडीएम को इसका प्रभारी बनाया गया है। लेकिन परीक्षा शुरू होते ही डीएम छुट्टी पर चले गए। उधर, नकल माफिया नकल कराने में जुट गए हैं। दूसरे के स्थान पर बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा दे रहे हैं। इसका खुलासा दो छात्रों के पकड़े जाने के बाद हुआ है। बावजूद इसके कोई कड़ाई नही दिखाई जा रही है। तीन दिन परीक्षा बीत गया लेकिन पूरे जिले में सिर्फ सात नकलची पकड़े गए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सेक्टर मजिस्ट्रेट से लेकर जोनल मजिस्ट्रेटाें की नजर वित्त विहिन विद्यालयों की तरफ अधिक है।
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पूर्व डीएम भानुचंद्र गोस्वामी ने परीक्षा केंद्र निर्धारण में कई नकल माफियाओं के स्कूलों को सेंटर नही बनाया। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी ही नकल माफियों के संरक्षण में घुम टहल रहे हैं। परीक्षा की सूचिता तार तार हो गई है। यह अलग बात है कि हजारों छात्रों ने परीक्षा सेंटर मनमाफिक नही होने की वजह से छोड़ दिए हैं।
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