फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   Brave the British Empire was celebrated mettle

सल्तनत बहादुर ने अंग्रेजी हुकूमत को मनवाया था वीरता का लोहा

Sat, 13 Aug 2016 12:55 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर Updated Sat, 13 Aug 2016 12:55 AM IST
विज्ञापन
Brave the British Empire was celebrated mettle
बदलापुर के सल्तनत बहादुर सिंह पीजी कालेज में  स्थित अमर शहीद सल्तनत बहादुर सिंह की प्रतिमा।
बदलापुर रियासत के तालुकेदार रहे सल्तनत बहादुर सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत को अपनी वीरता का लोहा मनवाया था। 1857 के संग्राम में दर्जनों बार अंग्रेजी  फ ौज को सल्तनत बहादुर से मात खानी पड़ी। 
विज्ञापन


ईस्ट इंडिया कंपनी ने जब सत्ता प्रसार अभियान में जौनपुर की सीमा में प्रवेश किया तभी से उसे सल्तनत बहादुर सिंह व उनके साथियों के सशस्त्र प्रतिरोध से जूझना पड़ा । इस संघर्ष में उन्हें जीवन भर जंगल- जंगल भटकना पड़ा ।
विज्ञापन


कई बार अंग्रेजी फौज का मुकाबला कर उसे मैदान छोड़ कर भागने को विवश किया था । उनके त्याग से प्रेरित हजारों युवकों ने 1857 की क्रांति में  संघर्ष किया। वह जिला मुख्यालय से तीस किलोमीटर दूर बदलापुर सरोखनपुर के तालुकेदार और पांच कोस की परिधि में आने वाले गांवों के मंडलेश्वर शासक थे ।
विज्ञापन
विज्ञापन


1908 में प्रकाशित जौनपुर गजेटियर में सल्तनत बहादुर सिंह को विषेन ठाकुरों का सरदार और 65 ग्रामों का तालुकेदार बताया गया है ।  यह सभी गांव जिले की बदलापुर तहसील और  परगना रारी क्षेत्र में पड़ते हैं । गजेटियर के अनुसार अंग्रेज शासकों ने इस तालुके के लिए 25001 रुपए मालगुजारी निर्धारित की थी।

 जिसे सल्तनतबहादुर सिंह ने अदा नहीं किया। अंग्रेजी हुकूमत के प्रति जौनपुर में प्रथम सशस्त्र विद्रोह डंकन के इस्तमरारी बंदोबस्त के साथ हुआ था । सल्तनत बहादुर सिंह इसके नायक थे । उनको दबाने के लिए जनरल फ्रांसीसी के नेतृत्व में फौज की एक टुकड़ी सरोखनपुर भेजी गयी।

सल्तनतबहादुर सिंह व उनके साथियों के जबरदस्त प्रहार के आगे अंग्रेज फौज के पांव उखड़ गये और उसे भाग कर जौनपुर के किले में शरण लेनी पड़ी । इसके बाद आक्रमण और प्रत्याक्रमण की होती रहीं । फौज की गोला बारी से सल्तनतबहादुर सिंह का छोटा सा दुर्ग ढह गया ।

दुश्मन के भारी दबाव को देख कर उन्होंने अपने स्त्री बच्चों को गुप्त स्थान पर सुरक्षित कर अपने बचे साथी सैनिकों के साथ गोमती पार कर जंगलों में शरण लेकर अंग्रेजों के विरुद्ध छापा मार युद्ध का नया मोर्चा खोल दिया ।  इसी बीच सल्तनतबहादुर के बड़े पुत्र ईशनारायण सिंह को दुश्मनों ने गिरफ्तार कर लिया ।

पुत्र की गिरप्तारी से वह दुखी जरूर हुए किंतु पथ से विचलित नही हुए । जंगल - जंगल भटकते हुए उन्होंने  परस्पर आजादी का संदेश दिया ।  देश भक्तों का संगठन तैयार किया । इस मुक्ति वाहिनी के सिपह सालारों में झूरी त्रिगुनायत, जालिमशाह, शेरू दर्जी, तथा नेमा जी शाह का नाम शामिल है।


अंग्रेजों ने देवी मां की पूजा करते समय गोली मार कर उन्हें शहीद कर दिया था। सल्तनतबहादुर सिंह के दूसरे पुत्र संग्राम सिंह ने 1857 में शासकों की छावनी को नष्ट करते हुए कलिजरा की गोदाम को लूट लिया था । अंग्रेजी फौज ने उन्हें पकड़ने के बाद फांसी दे दीथी।  बदलापुर में स्थापित इंटर और डिग्री कालेज में सल्तनत बहादुर की  प्रतिमा स्थापित की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed