भाजपा का खेल बिगाड़ेंगे धनंजय, सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेंगे
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धनंजय खुद मल्हनी से चुनाव लड़ेंगे। जिले में क्षत्रिय सहित सवर्ण मतदाताओं पर धनंजय का अच्छा प्रभाव माना जाता है। जिले में तकरीबन तीन लाख क्षत्रिय मतदाता हैं। सपा कार्यकाल में सत्ता का विरोध कर पांच ब्लॉक प्रमुख और स्थानीय निकाय के एमएलसी का चुनाव जितवाकर धनंजय ताकत का एहसास करा चुके
हैं। दो बार निर्दल विधायक, एक बार बसपा से सांसद रहे धनंजय सिंह जब भी चुनाव लड़े उन्हें अच्छा-खासा वोट मिला। उनकी पत्नी डा. जागृति सिंह ने 2012 विधानसभा का चुनाव मल्हनी से लड़ा और उन्हें 51 हजार मत मिले।
जबकि उस वक्त धनंजय सिंह जेल में थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने करीब 65 हजार मत प्राप्त किए थे। जिले में सभी विधानसभा क्षेत्रों में धनंजय के समर्थकों की अच्छी संख्या है। माना जा रहा है कि प्रत्येक विधानसभा से 20 से 25 हजार मत धनंजय सिंह प्रभावित कर सकते हैं।
विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए धनंजय ने पहले बसपा को आजमाया, लेकिन उन्हें इलाहाबाद की रैली में पार्टी ज्वाइन कराने के बाद भी बात नहीं बनी। इसके बाद भाजपा के सहयोगी दलों से उनकी बात चल रही थी, लेकिन भाजपा ने सोशल मीडिया पर विवादित पोस्टर जारी कर उनकी छवि को प्रभावित किया।
इसके बाद धनंजय ने भी भाजपा को जिले में सबक सिखाने की ठान ली है। स्थिति यही रही तो भाजपा के लिए मुश्किल हो सकती है। वैसे सूत्रों का कहना है कि धनंजय सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल, पीस पार्टी, निषाद राज, महान दल और अन्य छोटे दलों का समर्थन लेकर मैदान में कूदने की तैयारी कर ली है।