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घर से बिस्तर और खाना, तब क्वारंटीन सेंटर जाना
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19- मछलीशहर क्षेत्र के सरायदेवा स्थित स्कूल पर दूसरे प्रदेशों से आये लोग किए गये क्वारंटीन।
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सरकार सतर्कता बरतने पर पूरा जोर दे रही है। बाहर से आने वालों को गांव के प्राथमिक विद्यालय या पंचायत भवन में क्वारंटीन कराया जा रहा है। हिदायत है कि क्वारंटीन अवधि में वह किसी से मिलेंगे-जुलेंगे नहीं और न ही किसी को छूएंगे। इसके बावजूद व्यवस्था तार-तार नजर आ रही है।
क्वारंटीन सेंटर में ही जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में क्वारंटीन सेंटरों की हकीकत इस दावे से बिलकुल जुदा है। सेंटर में रहने वालों को भोजन-पानी, बिस्तर का इंतजाम खुद करना पड़ रहा है। वह घर से ही जरुरी चीजें मंगा रहे हैं। नतीजा न चाहते हुए भी वह घरवालों के संपर्क में आ रहे हैं। जिनके घर में भोजन पहुंचाने वाला कोई नहीं। लोक क्वारंटीन सेंटर से निकलकर खाने-नहाने घर जा रहे हैं और फिर लौटकर क्वारंटीन हो जा रहे हैं। सोमवार को जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में ग्रामीण इलाके के क्वारंटीन सेंटर की पड़ताल की तो कुछ ही ऐसी स्थितियां सामने आई। क्वारंटीन सेंटर में सुविधाएं उपलब्ध कराने के सारे दावे हवा होते नजर आए। कई सेंटर में चारपाई-बेड के अभाव में लोग चटाई पर बिछौना लगाए रहे तो कई जगह बिजली विहीन स्कूलों में गर्मी से बचने के लिए लोगों ने खुद को टेंट लगाकर पेड़ के नीचे कर लिया था।
पेड़ के नीचे टेंट लगाकर रह रहे प्रवासी
रामनगर। क्षेत्र के अधिकांश गांवों में स्कूल पर बिजली पंखा की व्यवस्था न होने से बाहर से आए लोग पेड़ के नीचे रहने को विवश हैं। उन पर तो कोई ध्यान दिया जा रहा और न ही कोई सुध ली जा रही। प्रवासी किसी तरह से समय काट रहे हैं। इन अव्यवस्थाओं के कारण तमाम लोग समय से पहले ही घर भाग जा रहे हैं। विकासखंड के बुद्धिपुर गांव के प्रवासी पेड़ के नीचे ताल पतरी डालकर रहने को विवश हैं। प्रवासियों ने बताया कि घर से बिस्तर चारपाई मंगवाकर किसी तरह समय काट रहे हैं। स्वास्थ्य महकमा भी सुध लेने नहीं आया। भय लग रहा है कि कोरोना से बचने की कोशिश में कोई दूसरी बीमारी की चपेट में न आ जाएं।
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बस हैंडपंप का पानी और शौचालय, बाकी सब घर से
मीरगंज। क्षेत्र के सरायदेवा प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटीन सेंटर में मुंबई और गुजरात से आए गांव के लोग रखे गए हैं। सूरत से आए शिवनाथ बिंद, सुशीला, अंकिता, शयामधर गौड़, रुपा देवी, रोशनी, श्रेया, आदित्य, दिल्ली से आए सुरेश, सुनीता देवी अपने परिवार सहित अलग-अलग कमरों में थे। उन्होंने बताया कि उन्हें कोई सुविधा नहीं दी गई है। स्कूल में नहाने के लिए हैंडपंप और सिर्फ शौचालय की ही व्यवस्था है। फर्श पर सो रहे हैं। खाना अपने घर से मंगा कर खा रहे हैं। बाहर से आने वाले को राशन मिलता है, पर यहां के लोगों ने राशन न मिलने की शिकायत भी की।
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क्वारंटीन सेंटर में ही जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में क्वारंटीन सेंटरों की हकीकत इस दावे से बिलकुल जुदा है। सेंटर में रहने वालों को भोजन-पानी, बिस्तर का इंतजाम खुद करना पड़ रहा है। वह घर से ही जरुरी चीजें मंगा रहे हैं। नतीजा न चाहते हुए भी वह घरवालों के संपर्क में आ रहे हैं। जिनके घर में भोजन पहुंचाने वाला कोई नहीं। लोक क्वारंटीन सेंटर से निकलकर खाने-नहाने घर जा रहे हैं और फिर लौटकर क्वारंटीन हो जा रहे हैं। सोमवार को जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में ग्रामीण इलाके के क्वारंटीन सेंटर की पड़ताल की तो कुछ ही ऐसी स्थितियां सामने आई। क्वारंटीन सेंटर में सुविधाएं उपलब्ध कराने के सारे दावे हवा होते नजर आए। कई सेंटर में चारपाई-बेड के अभाव में लोग चटाई पर बिछौना लगाए रहे तो कई जगह बिजली विहीन स्कूलों में गर्मी से बचने के लिए लोगों ने खुद को टेंट लगाकर पेड़ के नीचे कर लिया था।
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पेड़ के नीचे टेंट लगाकर रह रहे प्रवासी
रामनगर। क्षेत्र के अधिकांश गांवों में स्कूल पर बिजली पंखा की व्यवस्था न होने से बाहर से आए लोग पेड़ के नीचे रहने को विवश हैं। उन पर तो कोई ध्यान दिया जा रहा और न ही कोई सुध ली जा रही। प्रवासी किसी तरह से समय काट रहे हैं। इन अव्यवस्थाओं के कारण तमाम लोग समय से पहले ही घर भाग जा रहे हैं। विकासखंड के बुद्धिपुर गांव के प्रवासी पेड़ के नीचे ताल पतरी डालकर रहने को विवश हैं। प्रवासियों ने बताया कि घर से बिस्तर चारपाई मंगवाकर किसी तरह समय काट रहे हैं। स्वास्थ्य महकमा भी सुध लेने नहीं आया। भय लग रहा है कि कोरोना से बचने की कोशिश में कोई दूसरी बीमारी की चपेट में न आ जाएं।
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बस हैंडपंप का पानी और शौचालय, बाकी सब घर से
मीरगंज। क्षेत्र के सरायदेवा प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटीन सेंटर में मुंबई और गुजरात से आए गांव के लोग रखे गए हैं। सूरत से आए शिवनाथ बिंद, सुशीला, अंकिता, शयामधर गौड़, रुपा देवी, रोशनी, श्रेया, आदित्य, दिल्ली से आए सुरेश, सुनीता देवी अपने परिवार सहित अलग-अलग कमरों में थे। उन्होंने बताया कि उन्हें कोई सुविधा नहीं दी गई है। स्कूल में नहाने के लिए हैंडपंप और सिर्फ शौचालय की ही व्यवस्था है। फर्श पर सो रहे हैं। खाना अपने घर से मंगा कर खा रहे हैं। बाहर से आने वाले को राशन मिलता है, पर यहां के लोगों ने राशन न मिलने की शिकायत भी की।