जौनपुर। पहले छुट्टी और फिर हड़ताल के कारण पिछले चार दिनों से बैंकों पर लगे ताले ने ग्राहकों को मुसीबत में डाल दिया। बैंक बंद और एटीएम खाली होने से ग्राहक मंगलवार को पूरे दिन भटकते रहे। दूरदराज से खरीदारी करने आए लोग खाते में पैसा होने के बाद भी निकासी न होने से बेबस बने रहे। कई बैंक व एटीएम का चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें मायूसी मिली। उधर, बैंक कर्मचारी पूरी दमदारी से हड़ताल पर डटे रहे। मांगों के समर्थन में नारे लगाते हुए सरकार से बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
यूनियन बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पर एकत्रित विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के मंत्री आरपी सिंह ने कहा कि बैंकों के निजीकरण से ग्राहकों को कई नुकसान है। 146 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति निजी हाथों में जाने का खतरा है। न्यूनतम बैंक बैलेंस की सीमा बढ़ाई जाएगी, बैंकों के सर्विस चार्ज भी बढ़ेंगे। बैंकों में रोजगार के अवसर कम होंगे। जनविरोधी होने के बाद भी सरकार निजीकरण पर आमादा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अध्यक्ष एसएन जायसवाल ने कहा कि मौजूदा 6 लाख करोड़ एनपीए में से 73 प्रतिशत कार्पोरेट घरानों का है। इन्हीं कार्पोरेट घरानों को ही सरकार निजीकरण के रूप में बैंकों को सुपुर्द करना चाहती है। प्रदर्शन में सुभाष सिंह, देवांश सिंह, संतोष यादव, इंदर, दुष्यंत, संजय यादव, अनिल मौर्य आदि ने विचार व्यक्त किए। उधर, बड़ौदा यूपी बैंक ऑफिसर्स एवं इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले ग्रामीण बैंक की सभी शाखाओं पर ताले लगे रहे। क्षेत्रीय कार्यालय पर सभा में मशीरुल हसन ने निजीकरण से आने वाली दुश्वारियां बताई। प्रदर्शन में अधिकारी संघ के अध्यक्ष अश्वनी कुमार श्रीवास्तव, अशफाक अहमद, अरुण श्रीवास्तव, रत्नाकर दुबे, हरिमंगल मिश्र, अरुण मौर्य, शैलेंद्र प्रताप सिंह, सुभाष यादव, विपिन, विवेक, अरविंद सिंह, संदीप शुक्ल, मुनीर हैदर, नीतेश पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन शकील अहमद ने किया।

सुतहट्टी रोड पर यूनियन बैंक में लटकता ताला। संवाद- फोटो : JAUNPUR