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Jaunpur News: अटला देवी मंदिर प्रकरण में पत्रावली पेश, अगली सुनवाई 2 जुलाई को
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जौनपुर। शहर के जूनियर डिवीजन की सिविल जज सुधा शर्मा की अदालत में शनिवार को अटला देवी मंदिर के मामले में पत्रावली पेश हुई। वादी पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर अपील की कि विपक्षी जवाब दाखिल नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनका अवसर समाप्त कर दिया जाए। कोर्ट ने प्रार्थना पत्र पर विचार करते हुए विपक्ष को आपत्ति दाखिल करने के लिए 2 जुलाई की तिथि तय की है।
स्वराज वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा ने पीस कमेटी जामा मस्जिद (अटाला मस्जिद) मोहल्ला सिपाह के खिलाफ वाद दायर किया है। वाद में बताया है कि 13वीं शताब्दी में राजा विजय चंद्र जी ने अटला देवी की मूर्ति स्थापित कर यहां मंदिर बनवाया था। इसमें लोग पूजा कीर्तन करते थे। 13वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक ने जौनपुर पर आक्रमण के दौरान मंदिर की भव्यता देखकर उसमें तोड़फोड़ कराया। हिंदू धर्मावलंबी के प्रबल विरोध के कारण पूरी तरह तोड़ नहीं पाया और मंदिर के खंभों पर ही मस्जिद का आकार दिया जो वर्तमान में अटाला मस्जिद है। सनातन धर्म के व्यक्तियों का वहां प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। अटाला मस्जिद अटला देवी का मंदिर है, यह तथ्य इतिहासकार अबुल फजल की रचना आईने अकबरी एवं रचनाओं में पूर्णतया स्पष्ट है। मंदिर के खंभों इत्यादि पर आज भी हिंदू स्थापत्य एवं वास्तुकला तथा हिंदू रीति रिवाज के चिन्ह एवं अवशेष मौजूद हैं। सनातन धर्मावलंबियों को वहां पूजन कीर्तन करने का अधिकार है।
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स्वराज वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा ने पीस कमेटी जामा मस्जिद (अटाला मस्जिद) मोहल्ला सिपाह के खिलाफ वाद दायर किया है। वाद में बताया है कि 13वीं शताब्दी में राजा विजय चंद्र जी ने अटला देवी की मूर्ति स्थापित कर यहां मंदिर बनवाया था। इसमें लोग पूजा कीर्तन करते थे। 13वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक ने जौनपुर पर आक्रमण के दौरान मंदिर की भव्यता देखकर उसमें तोड़फोड़ कराया। हिंदू धर्मावलंबी के प्रबल विरोध के कारण पूरी तरह तोड़ नहीं पाया और मंदिर के खंभों पर ही मस्जिद का आकार दिया जो वर्तमान में अटाला मस्जिद है। सनातन धर्म के व्यक्तियों का वहां प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। अटाला मस्जिद अटला देवी का मंदिर है, यह तथ्य इतिहासकार अबुल फजल की रचना आईने अकबरी एवं रचनाओं में पूर्णतया स्पष्ट है। मंदिर के खंभों इत्यादि पर आज भी हिंदू स्थापत्य एवं वास्तुकला तथा हिंदू रीति रिवाज के चिन्ह एवं अवशेष मौजूद हैं। सनातन धर्मावलंबियों को वहां पूजन कीर्तन करने का अधिकार है।
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