रबी सीजन में जिले में गेहूं की बुवाई का रकबा घट गया है, जबकि दलहन और तिलहन का बढ़ा है। माना जा रहा है कि पानी की कमी से किसानों का रुख बदल गया है। गेहूं की अपेक्षा दलहन और तिलहन में पानी की कम खपत होती है। इस साल कुल दो लाख 48 हजार 699 हेक्टेयर में रबी की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिले में आठ लाख से अधिक किसान हैं। रबी की खेती के लिए कृषि विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। अनुदानित बीज भी मुहैया करा दिया गया है। इसके लिए शासन ने खेती के लिए फसलवार रकबा तय कर दिया है। खरीफ की फसल जैसे-जैसे कटती जाएगी, उसी हिसाब से खेतों में रबी की फसलों की बुवाई किसान करते जाएंगे। कृषि विभाग के अनुसार बीते वर्ष 2023-24 में रबी सीजन की फसलों की बुवाई का लक्ष्य दो लाख 57 हजार 136 हेक्टेयर था, जबकि इस वर्ष 2024-25 में इसे घटाकर दो लाख 48 हजार 699 हेक्टेयर कर दिया गया है। हालांकि दलहनी, तिलहनी फसलों का रकबा इस साल बढ़ा है। गेहूं की खेती बीते साल 215215 हेक्टेयर में की गई थी, जिसके सापेक्ष इस साल 10269 हेक्टेयर घटाकर 204946 हेक्टेयर कर दिया गया है। इसी तरह जौ की खेती का रकबा पिछले साल 716 हेक्टेयर से बढ़ाकर इस साल 739 हेक्टेयर, चना का 5502 से बढ़ाकर 5871, मटर का 6707 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7193, मसूर 171 से बढ़ाकर 177, रबी मक्का 181 से बढ़ाकर 291 हेक्टयर, तोरिया 2876 से बढ़ाकर 3014 हेक्टयर, सरसों 25768 हेक्टेयर से बढ़कर 26468 हेक्टेयर निर्धारित कर दिया गया है। किसान रबी सीजन की फसलों की बुवाई की तैयारी में जुट गए है।