खुटहन (जौनपुर)। थानाक्षेत्र के नगवां गांव में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां एक छुट्टा सांड के हमले में 65 वर्षीय बुजुर्ग जयंती प्रसाद तिवारी की जान चली गई। घटना उस समय हुई, जब वे खुटहन बाजार स्थित एक निजी चिकित्सक से दवा लेकर पैदल अपने घर लौट रहे थे।मृतक के पुत्र रामचंद्र तिवारी ने बताया कि उनके पिता शाम करीब सात बजे गांव की बाग के पास पहुंचे थे, तभी वहां बैठे एक सांड ने उन पर अचानक हमला कर दिया। सांड के हमले से वे जमीन पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने शोर सुनकर लाठी-डंडों के साथ सांड को खदेड़ा लेकिन तब तक जयंती प्रसाद बेहोश हो चुके थे। परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें शाहगंज सीएचसी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के बाद परिजनों ने पिलकिछा घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया। घर के मुखिया की अचानक मौत से पत्नी बेला देवी और पुत्रों समेत पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है। जिले में छुट्टा सांड अब राहगीरों के लिए ‘यमराज’ साबित हो रहे हैं। पिछले महज 56 दिनों के भीतर सांड के हमले से तीन बुजुर्ग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि घायल होने वालों की संख्या का तो कोई हिसाब ही नहीं है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। खेतों से लेकर घरों तक आफतछुट्टा पशु न केवल फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि अब घनी आबादी वाले इलाकों में भी खुलेआम घूम रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये सांड अब घरों के बाहर बंधी पालतू गायों को निशाना बना रहे हैं, जिससे पशुपालकों में भारी चिंता है। ग्रामीण इलाकों में सब्जी की खेती करना अब किसानों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। इन पशुओं की संख्या इतनी बढ़ गई है कि छोटी-बड़ी बाजारों में इनके कारण अक्सर जाम लग जाता है। कई बार सांडों की आपसी लड़ाई से बाजारों में भगदड़ मच जाती है, जिससे लोग गिरकर चुटहिल हो रहे हैं। बेखौफ होकर घूम रहे इन पशुओं के डर से अब लोगों ने रात में घरों के बाहर सोना छोड़ दिया है।

सांड के हमले से मृत जयंती प्रसाद तिवारी की फाइल फोटो। स्रोत-परिजन