जनपद की जनसंख्या 50 लाख के पार पहुंच गई है, लोगों के रहन-सहन का स्तर भी ऊंचा हुआ है और पानी की मांग बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं, पानी का अनियंत्रित दोहन और दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ा है। इससे उसी तेजी से जिले में जल संकट भी गहराता जा रहा है। मौजूदा समय में 21 ब्लॉकों में तमाम प्रयासों के बाद भी आठ ब्लॉक सेमी क्रिटिकल और दो ब्लॉक इस समय भी डार्क जोन में हैं।
जनपद की जनसंख्या बढ़ रही है, लेकिन जल भंडारण की क्षमता में वृद्धि नहीं हुई। जानकार बताते हैं कि 1991 में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 2209 घन मीटर थी, लेकिन वर्ष 2011 में यह घटकर 1545 घन मीटर हो गई है। ऐसा इसलिए हुआ कि हम सब अपनी आवश्यकता से अधिक पानी खर्च कर दे रहे हैं, जो भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार हर तीन साल पर सर्वे करा रही है। इस साल 21 जनवरी को जनपद में भेजे गए जल संसाधन आकलन रिपोर्ट में जनपद के आठ ब्लॉक सेमी क्रिटिकल जोन में रखे गए हैं। इसमें बक्शा, बरसठी, धर्मापुर, करंजाकला, केराकत, मुफ्तीगंज, सिकरारा और सिरकोनी हैं। जबकि बदलापुर और महराजगंज ब्लॉक को क्रिटिकल जोन में शामिल किया गया है। ऐसे में यह आने वाले खतरे की ओर इशारा है। पानी का संरक्षण और उसके उपयोग को लेकर जिस तरह से लापरवाही बरती जा रही है, उसको लेकर अब जल संरक्षण की ओर सभी को सोचना होगा, वरना! प्यास बुझाने को तक शुद्ध पानी नहीं मिल पाएगा।