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11 जिले थे तो 450 कर्मचारी, अब दो जिलों के लिए भी 385
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पूर्वांचल विवि का बंटवारा होने के बाद कर्मचारियों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। पूविवि. का कार्यक्षेत्र जब 11 जिलों तक था, तब 450 कर्मचारी कार्यरत थे। अब दायरा सिर्फ दो जिलों तक रह गया है, मगर कर्मचारियों की संख्या 385 बनी हुई है। इसमें भी 175 कर्मचारी संविदा और तदर्थ सेवा पर हैं। लगातार घटते दायरे से विवि की आमदनी पर भी असर पड़ा है। ऐसे में कर्मचारी भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
पूविवि. की स्थापना के समय इससे 11 जिलों के कॉलेज जुड़े थे। सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, गाजीपुर, वाराणसी, आजमगढ़, मऊ, बलिया, जौनपुर, प्रयागराज जिलों के 527 कॉलेज थे। वर्ष 2009-10 में सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, वाराणसी, बलिया जिले के कॉलेज पूविवि से अलग होकर काशी विद्यापीठ का हिस्सा बन गए। कॉलेज की संख्या कम होने पर विवि की आमदनी भी प्रभावित हुई थी, लेकिन कर्मचारियों की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ा था। अब करीब 11 वर्ष बाद विवि से आजमगढ़ और मऊ के कॉलेज भी पूविवि से अलग होने जा रहे हैं। इन दोनों जिलों में वर्तमान में 409 कॉलेज हैं। इनके अलग होने से विवि के पास सिर्फ 529 कॉलेज रह जाएंगे। विवि के विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की संख्या अभी भी 385 है। इसमें 175 कर्मचारी ऐसे हैं जो नियमित नहीं हो सके हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारी अतिरिक्त होने से उनकी चिंता बनी हुई है। विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के महामंत्री डॉ. स्वतंत्र कुमार का कहना है कि सरकार कर्मचारियों का समायोजन करे या फिर उनके वेतन का भुगतान करे। विवि के बंटवारे के बाद कुल आय 99 करोड़ है। इसमें आजमगढ़ और मऊ जिलों से आय 45 करोड़ है। परीक्षा मद में 17.94 करोड़ व्यय होता है। कर्मचारियों के वेतन पर खर्च 37.20 करोड़ खर्च किया जाता है। सीमित संसाधनों के कारण विवि के समक्ष वित्तीय संकट खड़ा हो जाएगा। इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ सकता है। विवि के कुलसचिव महेंद्र कुमार का कहना है कि शासन के निर्देश पर 15 जून से दो जिलों के कॉलेज आजमगढ़ विवि से संबद्ध हो जाएंगे। कर्मचारियों के संबंध में अभी कोई निर्देश नहीं है। शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
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पूविवि. की स्थापना के समय इससे 11 जिलों के कॉलेज जुड़े थे। सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, गाजीपुर, वाराणसी, आजमगढ़, मऊ, बलिया, जौनपुर, प्रयागराज जिलों के 527 कॉलेज थे। वर्ष 2009-10 में सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, वाराणसी, बलिया जिले के कॉलेज पूविवि से अलग होकर काशी विद्यापीठ का हिस्सा बन गए। कॉलेज की संख्या कम होने पर विवि की आमदनी भी प्रभावित हुई थी, लेकिन कर्मचारियों की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ा था। अब करीब 11 वर्ष बाद विवि से आजमगढ़ और मऊ के कॉलेज भी पूविवि से अलग होने जा रहे हैं। इन दोनों जिलों में वर्तमान में 409 कॉलेज हैं। इनके अलग होने से विवि के पास सिर्फ 529 कॉलेज रह जाएंगे। विवि के विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की संख्या अभी भी 385 है। इसमें 175 कर्मचारी ऐसे हैं जो नियमित नहीं हो सके हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारी अतिरिक्त होने से उनकी चिंता बनी हुई है। विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के महामंत्री डॉ. स्वतंत्र कुमार का कहना है कि सरकार कर्मचारियों का समायोजन करे या फिर उनके वेतन का भुगतान करे। विवि के बंटवारे के बाद कुल आय 99 करोड़ है। इसमें आजमगढ़ और मऊ जिलों से आय 45 करोड़ है। परीक्षा मद में 17.94 करोड़ व्यय होता है। कर्मचारियों के वेतन पर खर्च 37.20 करोड़ खर्च किया जाता है। सीमित संसाधनों के कारण विवि के समक्ष वित्तीय संकट खड़ा हो जाएगा। इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ सकता है। विवि के कुलसचिव महेंद्र कुमार का कहना है कि शासन के निर्देश पर 15 जून से दो जिलों के कॉलेज आजमगढ़ विवि से संबद्ध हो जाएंगे। कर्मचारियों के संबंध में अभी कोई निर्देश नहीं है। शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
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