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व्यवसाय की भाषा है लेखांकन
Accounting is the language of business
Updated Thu, 14 Jan 2016 12:44 AM IST
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वद्यालय के वित्तीय अध्ययन विभाग द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रबंध अध्ययन संकाय के अध्यक्ष एवं अर्थशास्त्री डा. एचसी पुरोहित ने कहा कि लेखांकन एवं वित्तीय विश्लेषण आज के व्यावसायिक युग में हर प्रतिष्ठानों के लिय आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि लेखांकन व्यवसाय की भाषा है और वित्त व्यवसाय की रक्त धमनियां है। दोनों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। लेखांकन एवं वित्त विशेषज्ञों के समक्ष चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है।
दैनिक व्यवसायिक गतिविधियों का सही रिकार्डिंग करें और आवश्यकतानुसार साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक, वार्षिक विश्लेषण करना जरूरी है।
व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को परखें जिससे समय रहते उचित कदम उठाए जा सके। व्यवसाय प्रतिस्पर्धा में चुनौती का सामना करने में आसानी होगी।
विशिष्ट अतिथि एचआरडी विभाग के सहयुक्त आचार्य डा. अविनाश पथार्डिरकर ने कहा कि इस तरह के आयोजन कारपोरेट जगत में अच्छे अवसर दिलाने में सहायक होते है।
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इस बात पर बल दिया कि किसी कार्यशाला की मुख्य प्रकृति छात्रों एवं शिक्षकों के बीच प्रभावी सम्प्रेषण होती है और छात्रों का फायदा सबसे अधिक प्रश्न करने से ही हो सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वित्तीय अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डा. अजय द्विवेदी ने कहा कि बिना वित्तीय ज्ञान के प्रबंधकीय ज्ञान का परिमार्जन नहीं किया जा सकता है।
वित्तीय शिक्षा वर्तमान दौर की प्रमुख आव्यशाकताओं में एक है। इससे पहले कार्यक्रम में उपस्थित समस्त अतिथियों का स्वागत कार्यशाला के कार्यक्त्रस्म समन्वयक व सहायक आचार्य आलोक गुप्ता ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला के संयोजक सचिव व सहायक आचार्य सुशील कुमार ने किया। इस मौके पर रोहित पाण्डेय, सैय्यद अली, मेहदी अब्दी, मो. साकिब, दिलीप कुमार यादव,
राहुल सोनी, श्रुति श्रीवास्तव, शिखा दुबे, यशस्वी कपूर आदि उपस्थित रहे। संचालन विभाग के सहायक आचार्य मंजीत कुमार वर्मा ने किया।
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उन्होंने कहा कि लेखांकन व्यवसाय की भाषा है और वित्त व्यवसाय की रक्त धमनियां है। दोनों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। लेखांकन एवं वित्त विशेषज्ञों के समक्ष चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है।
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दैनिक व्यवसायिक गतिविधियों का सही रिकार्डिंग करें और आवश्यकतानुसार साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक, वार्षिक विश्लेषण करना जरूरी है।
व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को परखें जिससे समय रहते उचित कदम उठाए जा सके। व्यवसाय प्रतिस्पर्धा में चुनौती का सामना करने में आसानी होगी।
विशिष्ट अतिथि एचआरडी विभाग के सहयुक्त आचार्य डा. अविनाश पथार्डिरकर ने कहा कि इस तरह के आयोजन कारपोरेट जगत में अच्छे अवसर दिलाने में सहायक होते है।
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इस बात पर बल दिया कि किसी कार्यशाला की मुख्य प्रकृति छात्रों एवं शिक्षकों के बीच प्रभावी सम्प्रेषण होती है और छात्रों का फायदा सबसे अधिक प्रश्न करने से ही हो सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वित्तीय अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डा. अजय द्विवेदी ने कहा कि बिना वित्तीय ज्ञान के प्रबंधकीय ज्ञान का परिमार्जन नहीं किया जा सकता है।
वित्तीय शिक्षा वर्तमान दौर की प्रमुख आव्यशाकताओं में एक है। इससे पहले कार्यक्रम में उपस्थित समस्त अतिथियों का स्वागत कार्यशाला के कार्यक्त्रस्म समन्वयक व सहायक आचार्य आलोक गुप्ता ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला के संयोजक सचिव व सहायक आचार्य सुशील कुमार ने किया। इस मौके पर रोहित पाण्डेय, सैय्यद अली, मेहदी अब्दी, मो. साकिब, दिलीप कुमार यादव,
राहुल सोनी, श्रुति श्रीवास्तव, शिखा दुबे, यशस्वी कपूर आदि उपस्थित रहे। संचालन विभाग के सहायक आचार्य मंजीत कुमार वर्मा ने किया।