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अब्बास जैसा भाई दुनिया में कोई दूसरा नहीं
जौनपुर ब्यूराे
Updated Tue, 01 Dec 2015 01:05 AM IST
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17 सफर का कदीम अलम का जुलूस सोमवार की रात मीरमस्त स्थित मो. मेहंदी के इमामबाड़े से निकाला गया। जुलूस अपने कदीम रास्ते नवाब युसूफ रोड उर्दू बाजार होते हुए कंचन बीबी के इमामबाड़े में समाप्त हुआ।
मजलिस का आगाज मो. मुस्लिम के हमनवा ने सोजखानी से किया। पेशखानी नजमी मेंहदी शिराजी ने किया। ग्वालियर से आए मौलाना डा. कल्बे रजा ने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन के छोटे भाई हजरत अब्बास अलमदार ने हमेशा अपने
मौला हुसैन के आगे सर झुकाए रखा। जो भी मौला का हुक्म होता था उसे वे पूरा करते थे। हजरत अब्बास ने अपनी चार साल की भतीजी जनाबे सकीना की प्यास बुझाने के लिए नहरे फरात पर कब्जा करने के बाद भी अपनी प्यास नहीं
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बुझाई। अपनी भतीजी को पानी पिलाने के लिए जैसे ही रवाना हुए थे यजीदी फौजो ने उन्हें घेर कर शहीद कर दिया। आज पूरी दुनिया में हजरत अब्बास जैसा भाई कोई पैदा नहीं हुआ। यही वजह है कि आज हम उनका अलम निकाल कर उन्हें
नजराने अकीदत पेश कर रहे हैं। इसके बाद शबीहे अलम का जुलूस निकाला गया। जिसमें अंजुमन हुसैनियां, कौसरिया,
सज्जादिया, जाफरिया, जाफरी, हैदरी, शम्मे हुसैनी सहित अन्य अंजुमनों ने नौहा-मातम करते हुए जुलूस के साथ
मीरमस्त, नवाब यूसुफ रोड होते हुए कंचन बीबी के इमामबाड़े पहुंचा।
यहां मौलाना ने तकरीर किया जिसके बाद शबीहे तुरबत को निकाला गया और अलम मुबारक से मिलाया गया। जुलूस मो. मेहदी, मौलाना सै. नेसार मेंहदी, जरगाम हैदर, ताबिश, मीसम, अजमी, मालिक, शाहिद मेहदी, डा. इंजेजार मेहदी, मीसम अली आदि मौजूद थे।
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मजलिस का आगाज मो. मुस्लिम के हमनवा ने सोजखानी से किया। पेशखानी नजमी मेंहदी शिराजी ने किया। ग्वालियर से आए मौलाना डा. कल्बे रजा ने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन के छोटे भाई हजरत अब्बास अलमदार ने हमेशा अपने
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मौला हुसैन के आगे सर झुकाए रखा। जो भी मौला का हुक्म होता था उसे वे पूरा करते थे। हजरत अब्बास ने अपनी चार साल की भतीजी जनाबे सकीना की प्यास बुझाने के लिए नहरे फरात पर कब्जा करने के बाद भी अपनी प्यास नहीं
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बुझाई। अपनी भतीजी को पानी पिलाने के लिए जैसे ही रवाना हुए थे यजीदी फौजो ने उन्हें घेर कर शहीद कर दिया। आज पूरी दुनिया में हजरत अब्बास जैसा भाई कोई पैदा नहीं हुआ। यही वजह है कि आज हम उनका अलम निकाल कर उन्हें
नजराने अकीदत पेश कर रहे हैं। इसके बाद शबीहे अलम का जुलूस निकाला गया। जिसमें अंजुमन हुसैनियां, कौसरिया,
सज्जादिया, जाफरिया, जाफरी, हैदरी, शम्मे हुसैनी सहित अन्य अंजुमनों ने नौहा-मातम करते हुए जुलूस के साथ
मीरमस्त, नवाब यूसुफ रोड होते हुए कंचन बीबी के इमामबाड़े पहुंचा।
यहां मौलाना ने तकरीर किया जिसके बाद शबीहे तुरबत को निकाला गया और अलम मुबारक से मिलाया गया। जुलूस मो. मेहदी, मौलाना सै. नेसार मेंहदी, जरगाम हैदर, ताबिश, मीसम, अजमी, मालिक, शाहिद मेहदी, डा. इंजेजार मेहदी, मीसम अली आदि मौजूद थे।