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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   A village of scholars of astrology and Vastu Shastra is the village of Sakra.

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के विद्वानों का गांव है सकरा .

Sat, 27 Jul 2019 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2019 12:51 AM IST
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A village of scholars of astrology and Vastu Shastra is the village of Sakra.
01- गांव हमारी ताकत बरईपार क्षेत्र के सकरा गांव में पेड़ के नीचे बनेव्चबूतरे पर एक साथ बैठे ग्रामीण - फोटो : JAUNPUR
बरईपार। जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर सई नदी के किनारे स्थित सुजानगंज विकास खंड का सकरा गांव की पहचान संस्कृत से है। गांव में प्राच्य विद्या के जानकारों की कमी नहीं है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के भी तमाम विद्वान इस गांव में हैं।
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लगभग 624 हेक्टेयर में फैले इस गांव की आबादी 2500 है। गांव में ब्राह्मण, यादव, गोस्वामी, निषाद और गुप्ता बिरादरी के लोग निवास करते हैं। परंतु बहुलता ब्राह्मणों की है। बद्रीनारायण पांडेय गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं, जिनकी अवस्था 95 साल है। गांव के लोगों में संस्कृत शिक्षा के प्रति गजब की ललक है। यहां के संस्कृत, ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के विद्वानों की देशभर में पहचान है। अध्यापक चंद्रकांत पांडेय, दिनेश तिवारी व चंद्रप्रकाश पांडेय ने बताया कि राकेश पांडेय, माता शंकर पांडे, देवी प्रसाद पांडेय, वंशीधर पांडेय, श्याम मनोहर पांडेय, शशिकांत पांडेय समेत 24 से अधिक लोग कोलकाता में ज्योतिषी और वास्तुशास्त्री के रूप में अपनी पहचान कायम किए हुए हैं। इन लोगों ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से इन विषयों का अध्ययन किया था।
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गांव के विद्वानों ने तमाम ग्रंथों की रचना की है और उनमें से कुछ तो बेहद लोकप्रिय हैं। व्याकरणाचार्य पंडित कामता प्रसाद पांडेय रचित रागिणी (शंकर-पार्वती संवाद) बेहद लोकप्रिय छंदबद्ध रचना है। प्रो. जनार्दन प्रसाद पांडेय मणि प्रयागराज के गंगानाथ झा राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में तैनात हैं। उन्होंने सौरभेयी, जानकीगीतम, नीराजना, नृप विलास, जीजीविषा समेत 13 ग्रंथों की रचना की है। उनकी लिखी हुई किताब इलाहाबाद विश्वविद्यालय में संस्कृति के छात्रों को पढ़ाई जाती है। उन्हें वर्ष 2002 में राष्ट्रपति के हाथों महर्षि वदरायण सम्मान मिल चुका है। इसके अलावा महाकवि कालीदास सम्मान 1993, संस्कृति महामहोपाध्याय सम्मान 2016, संस्कृत भूषण समेत राष्ट्रीय स्तर के 23 सम्मान मिल चुका है। उन्हें वर्ष 2009 में भारत सरकार की ओर से विश्व संस्कृत सम्मेलन में काव्य पाठ के लिए क्योटो विश्वविद्यालय जापान भेजा गया था।
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शिव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय बटेश्वर नाथ बरईपार के प्रधानाचार्य आचार्य मार्कंडेय प्रसाद पांडेय ने पंचसंध्यं प्रकाश बालमनोरमा, टीका (व्याकरण शास्त्र) लिखी है। आचार्य पंडित सुशील पांडेय ने ऋग्गवेद के पुरुष सूक्त पर टीका लिखी है। आचार्य सत्येंद्र पांडेय अध्यापक सस्कृत महाविद्यालय मयंनदीपुर ने तुलसीदास भक्ति मार्ग पर टीका लिखा है। वाचस्पति पांडेय, आचार्य राकेश पांडेय द्वारा संकलित पुस्तक व्रत एवं त्यौहार और आचार्य माता शंकर पांडेय की निर्णय मंजरी आदि धार्मिक पुस्तकों में स्थान बनाए हुए हैं। गांव के ही समीर गोस्वामी की अंग्रेजी भाषा में मैनेजमेंट पर लिखी हुई पुस्तक यूआर लीडर बेरोजगार नौजवानों के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रधानाचार्य रमेशचंद्र पांडे ने बताया कि गांव में संस्कृत के साथ-साथ अन्य विषयों पर भी लोग महारत हासिल कर रहे हैं और उसकी पढ़ाई कर रहे हैं। खास बात यह कि इतना सब होने के बावजूद गांव में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए कोई भी विद्यालय नहीं है। कमलेश कुमार पांडेय का कहना है कि सरकार को गांव में कम से कम एक स्कूल की स्थापना करनी चाहिए। गांव के अधिकतर परिवार खेती पर निर्भर हैं। गांव में गेहूं, धान, बाजरा, उड़द, मक्का, आलू, अरहर, चना, मटर, गन्ना आदि फसलों की खेती होती है। पेयजल के लिए गांव में 101 इंडिया मार्का हैंडपंप लगा है। 10 कुएं हैं लेकिन कुओं का प्रयोग अब बंद हो चुका है। खेती के लिए 10 ट्रैक्टर गांव में हैं।
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