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Jaunpur News: समुद्र में एक भूल से चार साल से कराची जेल में जौनपुर के मछुआरे, इंतजार में पथराईं आँखें

Sun, 12 Jul 2026 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2026 12:27 AM IST
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A fisherman from Jaunpur has been in a Karachi jail for four years due to a mistake at sea; eyes weary from waiting.
पाकिस्तान-- लालमणि बिंद की माँ पत्नी और बेटी। संवाद
मछलीशहर। पापा कब आएंगे? यह सवाल चौबेपुर, बसिरहा, नंदापुर और देवरिया गांवों के कई बच्चों की जुबान पर पिछले चार वर्षों से है। इन सवालों का जवाब न परिवारों के पास है और न ही कोई तय तारीख। समुद्र में एक भूल के चलते पाकिस्तान की कराची जेल में बंद मछलीशहर के 6 मछुआरों के परिवार उम्मीद और बेबसी के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। परिजन कहते हैं कि इंतजार में आंखें पथरा गईं हैं। चार साल से वे सिर्फ एक खबर का इंतजार कर रहे हैं कि कब अपनों की सकुशल वापसी होगी।
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परिवार के मुखिया के जेल में होने से घर की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर आ गई है। किसी तरह मजदूरी कर घर का खर्च चलाया जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की देखभाल और बेटियों की शादी की चिंता हर दिन बढ़ती जा रही है।
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गिरफ्तारी के बाद से परिवार लगातार उनकी रिहाई के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। दो वर्ष पहले आजाद समाज पार्टी के वाराणसी मंडल प्रभारी एस.पी. मानव ने पीड़ित परिवारों के साथ जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की थी। प्रधान मृत्युंजय बिंद का कहना है कि प्रशासन और केंद्र सरकार से लगातार रिहाई की मांग की जा रही है। हाल ही में विधायक रागिनी सोनकर ने भी परिवारों से मुलाकात कर इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाने का आश्वासन दिया है।
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रोटी की तलाश में गए थे गुजरात, भटककर पहुंचे पाकिस्तान : यह कहानी सिर्फ एक सीमा विवाद की नहीं, बल्कि पेट की आग बुझाने निकले मजदूरों की लाचारी की है। अगस्त 2021 में बेहतर जिंदगी के सपने लेकर जौनपुर और आसपास के जिलों के कई युवक गुजरात में मछली पकड़ने का काम करने गए थे। लेकिन किसे पता था कि किस्मत उन्हें ऐसी जगह ले जाएगी जहां से लौटना मुहाल हो जाएगा।
संगठनों ने उठाई आवाज, लेकिन इंतजार अब भी जारी : मछुआरों की रिहाई को लेकर कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन भी आगे आए हैं। 21 मई 2025 को समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित परिवारों से मिलकर संसद में मुद्दा उठाने का भरोसा दिया था। वहीं, 27 अप्रैल 2025 को केवट सामाजिक सेवा फाउंडेशन ने डीएम को ज्ञापन देकर मृतक घुरहू बिंद के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और पाकिस्तान में बंद अन्य मछुआरों की शीघ्र रिहाई के लिए केंद्र सरकार से प्रभावी पहल की मांग की थी।
जेल में बंद मछुआरे
चौबेपुर (मछलीशहर): राजनाथ बिंद
बसिरहा: विनोद कुमार बिंद
नंदापुर: लालमणि बिंद और सुरेश बिंद
देवरिया: राजनाथ (पुत्र बुद्धू)
भदोही: नीरज बिंद
सुल्तानपुर: अभयराज
ऐसे हुआ हादसा-परिजनों के मुताबिक, 8 फरवरी 2022 को समुद्र में मछली पकड़ते समय इनकी नाव अनजाने में रास्ता भटककर पाकिस्तान की समुद्री सीमा में दाखिल हो गई। पाकिस्तानी रेंजर्स ने तुरंत इन्हें गिरफ्तार कर लिया। हफ्तों तक परिवार अनभिज्ञ रहा, जब तक कि गुजरात के एक अखबार के जरिए उन्हें इस अनहोनी की खबर नहीं मिली।

मार्च 2025 में घुरहू बिंद की मौत : डर अब दहशत में बदला
इन परिवारों के दिल में छिपा डर पिछले साल यानी मार्च 2025 में उस वक्त खौफनाक हकीकत में बदल गया, जब बसिरहा गांव के एक और मछुआरे घुरहू बिंद की पाकिस्तान की जेल में मौत (परिजनों के अनुसार आत्महत्या) हो गई। इस घटना ने बाकी बचे परिवारों की रातों की नींद छीन ली है। अब वे सिर्फ अपने अपनों की रिहाई की मांग नहीं कर रहे, बल्कि उनकी जिंदगी की भीख मांग रहे हैं। हर आहट पर घर की औरतें सिहर उठती हैं कि कहीं सरहद पार से कोई और बुरी खबर न आ जाए।
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