{"_id":"60-80918","slug":"Jaunpur-80918-60","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईप्रोफाइल मर्डर की हाईप्रोफाइल जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईप्रोफाइल मर्डर की हाईप्रोफाइल जांच
Jaunpur
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। हाईप्रोफाइल मर्डर की हाईप्रोफाइल जांच भी चल रही है। जिला पुलिस तो सिर्फ संशाधन और रास्ते बता रही है। जांच तो प्रदेश की बड़ी एजेंसियां कर रही हैं। एसपी एसटीएफ अमित पाठक बृहस्पतिवार से डेरा डाले हुए हैं। शुक्रवार की शाम पाठक ने गुरुजी के परिजनों से घटना के संबंध में काफी देर अकेले में बात की। पुलिस सूत्रों की माने तो घटना में बड़े अपराधिक गिरोह के शामिल होने की आशंका है। पेशेवर शूटरों के जरिए गुरुजी का कत्ल कराया गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं स्थानीय स्तर पर किसी ने भाड़े के शूटरों का इंतजाम किया हो। फिलहाल घोषित तौर पर न तो किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही बदमाशों के संबंध में कोई सुराग लगे। दूसरे दिन भी पुलिस घटना के कारण नहीं बता सकी। फिलहाल पुलिस ने गुरुजी के बड़े भाई शिक्षक उमेश तिवारी की तहरीर पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या और प्राणघातक हमले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
हत्या की वजहें अब तक साफ नहीं हो पाई। पुलिस की तहकीकात में पता चला कि रमेश तिवारी के भाई राजेश तिवारी के ठेकेदारी को लेकर विवाद था। इसके अलावा राजेश लखनऊ में प्लाटिंग का भी काम करते थे। पिछले दिनों गांव में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के टेंडर को लेकर भी झंझट हुआ था। प्रतापगढ़ में पीडब्ल्यूडी के टेंडर को लेकर तनातनी हुई थी। इन टेंडरों में कई बड़े चेहरे शामिल थे। कुछ परदे के पीछे से तो कुछ खुलकर मैदान में थे। दोनों ठेकों में राजेश तिवारी भी सीधे तौर पर शामिल रहे। लखनऊ के प्रापर्टी डीलिंग में विवाद की बात तो नहीं आई लेकिन दूसरे प्रतिद्वंदी विल्डरों की कुंडली भी पुलिस खोज रही है। वाराणसी, गोरखपुर की एसटीएफ के अलावा प्रदेश की सर्विलांस टीम लगातार वाच कर रही है। एसटीएफ ने रमेश तिवारी के तीनों मोबाइल नंबर की तीन महीने की काल डिटेल का भी अध्ययन कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गुरुजी से किसने और कितनी देर बात हुई। जरूरी हुआ तो बातचीत के रिकार्ड भी पुलिस हासिल करेगी। इसके अलावा गुरुजी नजदीकी लोगों से भी पुलिस ने कई दौर की पूछताछ की। शुक्रवार को एसपी मंजिल सैनी ने रमेश तिवारी के भाई उमेश तिवारी से अकेले में करीब तीन घंटे तक बातचीत की। इसके अलावा गुरुजी के करीबी ऊंचगांव निवासी विजय सिंह से भी एसपी ने घटना के बारे में तहकीकात की। पिछले विवादों के बारे में भी पूछा। विजय सिंह ही रमेश तिवारी के काफी नजदीक थे और घर के कामकाज देखते हैं। अलग-अलग बातचीत के जरिए घटना की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। देर शाम एसटीएफ एसपी अमित पाठक ने भी परिजनों से मुलाकात की और घटना के दूसरे तथ्यों पर बात की। पुलिस के एक टीम ने प्रतापगढ़ के पीडब्ल्यूडी दफ्तर तथा जौनपुर में कस्तूबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के टेंडर से जुड़े तथ्य जुटाए हैं। यह पता लगाया गया है कि टेंडर डालने वाले कौन-कौन लोग थे। इनका सामाजिक स्तर क्या है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के ठेके को लेकर पुलिस ज्यादा गंभीर दिखती है। एसटीएफ ने संकेत दिए हैं कि पुलिस हमलावरों के करीब तक पहुंच गई है। जल्दी ही रिजल्ट सामने आएंगे।
जेल में बंद माफियाओं की निगाहबानी
जौनपुर। पुलिस ने विभिन्न जेलों में बंद पूर्वाचल के बड़े अपराधियों तथा माफियाओं की निगाहबानी कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शूटर किसने भेजे। पूर्वांचल के सभी बड़े अपराधियों के अलावा माफिया किस्म के लोगों की कुंडली फिर खुल गई है। यह तला लगाने की कोशिश हो रही है कि इस घटना मे किसका हाथ हो सकता है। हत्या की साजिश किसने रची। हत्या कराने का ठेका किसे दिया गया और शूटर का इंतजाम कहां से हुआ। पुलिस ने प्रदेश के सभी पेशेवर शूटरों की जन्मपत्री खंगालनी शुरू कर दी है।
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हत्या की वजहें अब तक साफ नहीं हो पाई। पुलिस की तहकीकात में पता चला कि रमेश तिवारी के भाई राजेश तिवारी के ठेकेदारी को लेकर विवाद था। इसके अलावा राजेश लखनऊ में प्लाटिंग का भी काम करते थे। पिछले दिनों गांव में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के टेंडर को लेकर भी झंझट हुआ था। प्रतापगढ़ में पीडब्ल्यूडी के टेंडर को लेकर तनातनी हुई थी। इन टेंडरों में कई बड़े चेहरे शामिल थे। कुछ परदे के पीछे से तो कुछ खुलकर मैदान में थे। दोनों ठेकों में राजेश तिवारी भी सीधे तौर पर शामिल रहे। लखनऊ के प्रापर्टी डीलिंग में विवाद की बात तो नहीं आई लेकिन दूसरे प्रतिद्वंदी विल्डरों की कुंडली भी पुलिस खोज रही है। वाराणसी, गोरखपुर की एसटीएफ के अलावा प्रदेश की सर्विलांस टीम लगातार वाच कर रही है। एसटीएफ ने रमेश तिवारी के तीनों मोबाइल नंबर की तीन महीने की काल डिटेल का भी अध्ययन कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गुरुजी से किसने और कितनी देर बात हुई। जरूरी हुआ तो बातचीत के रिकार्ड भी पुलिस हासिल करेगी। इसके अलावा गुरुजी नजदीकी लोगों से भी पुलिस ने कई दौर की पूछताछ की। शुक्रवार को एसपी मंजिल सैनी ने रमेश तिवारी के भाई उमेश तिवारी से अकेले में करीब तीन घंटे तक बातचीत की। इसके अलावा गुरुजी के करीबी ऊंचगांव निवासी विजय सिंह से भी एसपी ने घटना के बारे में तहकीकात की। पिछले विवादों के बारे में भी पूछा। विजय सिंह ही रमेश तिवारी के काफी नजदीक थे और घर के कामकाज देखते हैं। अलग-अलग बातचीत के जरिए घटना की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। देर शाम एसटीएफ एसपी अमित पाठक ने भी परिजनों से मुलाकात की और घटना के दूसरे तथ्यों पर बात की। पुलिस के एक टीम ने प्रतापगढ़ के पीडब्ल्यूडी दफ्तर तथा जौनपुर में कस्तूबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के टेंडर से जुड़े तथ्य जुटाए हैं। यह पता लगाया गया है कि टेंडर डालने वाले कौन-कौन लोग थे। इनका सामाजिक स्तर क्या है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के ठेके को लेकर पुलिस ज्यादा गंभीर दिखती है। एसटीएफ ने संकेत दिए हैं कि पुलिस हमलावरों के करीब तक पहुंच गई है। जल्दी ही रिजल्ट सामने आएंगे।
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जेल में बंद माफियाओं की निगाहबानी
जौनपुर। पुलिस ने विभिन्न जेलों में बंद पूर्वाचल के बड़े अपराधियों तथा माफियाओं की निगाहबानी कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शूटर किसने भेजे। पूर्वांचल के सभी बड़े अपराधियों के अलावा माफिया किस्म के लोगों की कुंडली फिर खुल गई है। यह तला लगाने की कोशिश हो रही है कि इस घटना मे किसका हाथ हो सकता है। हत्या की साजिश किसने रची। हत्या कराने का ठेका किसे दिया गया और शूटर का इंतजाम कहां से हुआ। पुलिस ने प्रदेश के सभी पेशेवर शूटरों की जन्मपत्री खंगालनी शुरू कर दी है।
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