{"_id":"60-80827","slug":"Jaunpur-80827-60","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्या की गुत्थी उलझी, कारण साफ नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हत्या की गुत्थी उलझी, कारण साफ नहीं
Jaunpur
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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सुइथाकला। गुरुजी की हत्या की वजह पुलिस देर रात तक नहीं बता सकी। आईजी ने केवल इतना कहा कि हम सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक वर्ष 2010 में रमेश तिवारी के पिता राजेंद्र तिवारी पंचायत चुनाव जीत गए थे। पंचायत चुनाव की रंजिश भी गांव में चल रही थी। पंचायत चुनाव के दौरान गुरुजी सक्रिय रूप से शामिल थे। इसके अलावा ठेकेदारी का भी विवाद सामने आया है। कहा जा रहा है कि गुरुजी के ठेकेदार भाई राजेश तिवारी ने प्रतापगढ़ में पीडब्ल्यूडी का टेंडर डाला था। प्रतापगढ़ में पिछले दिनों टेंडर डालने को लेकर भी विवाद हुआ था। बाद में कुछ बड़े लोगों के बीच पंचायत कराकर मामला शांत करा दिया गया था। इसके अलावा कोई तीसरा विवाद सामने नहीं आ रहा है। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि पंचायत चुनाव इतना बड़ा गंभीर प्रकरण नहीं था कि किसी की हत्या कर दी जाए। यह भी हो सकता है कि इन दोनों विवादों की आड़ में किसी तीसरे ने रोटी सेंक ली हो।
ऊंचगांव की घटना ने वर्ष 1996 में जमालापुर बाजार के तिहरे हत्याकांड की याद ताजा कर दी। यहां रामपुर ब्लाक के पूर्व प्रमुख कैलाश दुबे समेत तीन की हत्या कर दी गई थी। हत्या उस वक्त हुई जब तीनों एक चाय की दुकान पर बैठे थे। कैलाश दुबे की हत्या एके 47 जैसे हथियारों से की गई। इस घटना में मुन्ना बजरंगी समेत कई लोग नामजद थे। इस घटना के आरोपी काजीहद निवासी आलम सिंह और उनके पिता स्व. गजराज सिंह को फांसी हो चुकी है। मुन्ना बजरंगी का मुकदमा अभी न्यायालय में लंबित है। ऊंचगांव की घटना ने जमालापुर कांड की याद ताजा कर दी। हत्या के तरीके से लगता है कि हत्यारे पेशेवर थे।
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ऊंचगांव की घटना ने वर्ष 1996 में जमालापुर बाजार के तिहरे हत्याकांड की याद ताजा कर दी। यहां रामपुर ब्लाक के पूर्व प्रमुख कैलाश दुबे समेत तीन की हत्या कर दी गई थी। हत्या उस वक्त हुई जब तीनों एक चाय की दुकान पर बैठे थे। कैलाश दुबे की हत्या एके 47 जैसे हथियारों से की गई। इस घटना में मुन्ना बजरंगी समेत कई लोग नामजद थे। इस घटना के आरोपी काजीहद निवासी आलम सिंह और उनके पिता स्व. गजराज सिंह को फांसी हो चुकी है। मुन्ना बजरंगी का मुकदमा अभी न्यायालय में लंबित है। ऊंचगांव की घटना ने जमालापुर कांड की याद ताजा कर दी। हत्या के तरीके से लगता है कि हत्यारे पेशेवर थे।
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