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हत्यारोपी तीन सगे भाइयों को उम्र कैद
Jaunpur
Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। स्पेशल जज वीके पांडेय ने बदलापुर थाना क्षेत्र के पूरा लाल गांव में चकरोड के विवाद में एक की हत्या के मामले में तीन सगे भाइयों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही दस-दस हजार रुपये अर्थदंड देने का आदेश दिया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर छह-छह माह की अतिरिक्त सजा होगी। घटना 16 वर्ष हुई थी।
बदलापुर थाना क्षेत्र के पूरालाल निवासी सुरेश सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 12 नवंबर 1996 को मेरे भाई जय प्रकाश दुकान से घर जा रहे थे। चकरोड के विवाद को लेकर गांव के ही भानु प्रताप सिंह, रूद्र प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह, राजेंद्र सिंह और धनंजय सिंह ने लाठी डंडे से जय प्रकाश को पीटना शुरू कर दिया। शोर सुनकर पिता लालता प्रसाद और भाई रमाशंकर, दिनेश पहुंचे तो उन्हें भी इन लोगों ने मारापीटा। मारपीट में घायल रमाशंकर सिंह की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से एडीजीसी हरिश्चंद्र व विजय नारायण सिंह ने 11 गवाह पेश किए। मजिस्ट्रेेट ने दोनों पक्षों की बहस और पत्रावलियों की जांच कर आरोपी भानुप्रताप सिंह, रूद्र प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी राजेंद्र प्रताप सिंह की विवेचना के दौरान मौत हो जाने से मुकदमा अवेट कर दिया गया। कोर्ट ने आरोपी धनंजय सिंह को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त करार दिया। अर्थदंड से तीस हजार रुपये मृतक की पत्नी व बच्चों को बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। दूसरे पक्ष के भानु प्रताप सिंह ने आरोपी लालता प्रसाद सिंह, जय प्रकाश सिंह, दिनेश सिंह और सुरेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। कोर्ट ने इस मुकदमे में चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देकर दोष मुक्त करार दिया।
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बदलापुर थाना क्षेत्र के पूरालाल निवासी सुरेश सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 12 नवंबर 1996 को मेरे भाई जय प्रकाश दुकान से घर जा रहे थे। चकरोड के विवाद को लेकर गांव के ही भानु प्रताप सिंह, रूद्र प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह, राजेंद्र सिंह और धनंजय सिंह ने लाठी डंडे से जय प्रकाश को पीटना शुरू कर दिया। शोर सुनकर पिता लालता प्रसाद और भाई रमाशंकर, दिनेश पहुंचे तो उन्हें भी इन लोगों ने मारापीटा। मारपीट में घायल रमाशंकर सिंह की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से एडीजीसी हरिश्चंद्र व विजय नारायण सिंह ने 11 गवाह पेश किए। मजिस्ट्रेेट ने दोनों पक्षों की बहस और पत्रावलियों की जांच कर आरोपी भानुप्रताप सिंह, रूद्र प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी राजेंद्र प्रताप सिंह की विवेचना के दौरान मौत हो जाने से मुकदमा अवेट कर दिया गया। कोर्ट ने आरोपी धनंजय सिंह को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त करार दिया। अर्थदंड से तीस हजार रुपये मृतक की पत्नी व बच्चों को बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। दूसरे पक्ष के भानु प्रताप सिंह ने आरोपी लालता प्रसाद सिंह, जय प्रकाश सिंह, दिनेश सिंह और सुरेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। कोर्ट ने इस मुकदमे में चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देकर दोष मुक्त करार दिया।
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