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कैसे प्रमाणित होगा कि कौन सा बच्चा हुआ है पास!
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जौनपुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को अंक पत्र जारी करने के लिए शासन स्तर से निर्धारित फार्मेट को नजरअंदाज करने का ही नतीजा है कि विद्यार्थियों को बिना नाम के अंक पत्र जारी कर दिए गए। खामियां उजागर हुई तो विभागीय अधिकारी एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं। कई शिक्षकों का दावा है कि उन्होंने इसकी शिकायत ब्लाक के अधिकारियों से की थी लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक वाराणसी मंडल मुख्यालय से अंक पत्र को मार्च महीने के पहले सप्ताह में ही बीएसए कार्यालय में प्राप्त करा दिया गया था। यहां से जिले भर के 21 ब्लाक संसाधन केन्द्रों पर अंक पत्र भेज दिए गए। जहां से सभी विद्यालयों में आपूर्ति की गई।
पता चला है कि वाराणसी की जिस फर्म को अंक पत्र छपाई के लिए दिया गया था, उसने सैंपल भी भेजा था लेकिन बिना ठीक से चेक किए ही सैंपल को ओके कर दिया गया। विद्यालयों में अंकपत्र पहुंचे तो कुछ शिक्षकों ने खामियों के बारे में खंड शिक्षा अधिकारियों से चर्चा भी की। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षकों को चुप करा दिया।
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इस बारे में मछलीशहर विकास खंड के अगहुआ गांव निवासी लालजी कहते हैं कि उनका बेटा स्कूल से अंक पत्र लेकर घर पहुंचा तो उन्होंने भी खामियों को देखा। अंक पत्र पर बच्चे के नाम का कॉलम नहीं है। इसी विकास खंड के किशुनदासपुर निवासी प्रकाश सरोज कहते हैं कि प्राइमरी विद्यालयों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए ऐसी गलतियों को कौन गंभीरता से लेगा?
परेशानी का सबब बनेगा अंकपत्र
बिना नाम के अंक पत्र उनके लिए मुसीबत बन सकता है। इस बीच छात्रों से खामियों भरा अंक पत्र वापस लेकर उन्हें दूसरा अंक पत्र देने की योजना नहीं है। अधिकारी कह रहे हैं कि अंक पत्र का कोई मतलब नहीं है। टीसी पर नमांकन होता है। सबसे अधिक मुसीबत उन अभिभावकों की है, जिनके एक से अधिक बच्चे परिषदीय विद्यालयों में छात्र हैं। अंक पत्र पर माता-पिता का नाम लिखा गया है। 3.85 लाख छात्रों के लिए ये अंक पत्र बेकार हैं।
हर स्तर पर की गई मनमानी
शासन से जारी फार्मेट में एक से आठवीं कक्षा के लिए अलग-अलग रंग के अंक पत्र निर्धारित किए गए थे। जिसमें कक्षा एक के लिए लाल रंग, दो के लिए पीला, तीन के लिए केसरिया, चार के लिए हरा, पांचवीं के लिए नीला, छठवीं के लिए आसमानी, सातवीं के लिए सफेद और आठवीं कक्षा के छात्रों को ग्रे रंग का अंक पत्र उपलब्ध कराना था लेकिन अंक पत्र पर कक्षा का भी उल्लेख न होने के कारण किसी स्कूल में चौथी कक्षा के हरा रंग दिया गया तो किसी स्कूल में इसी कक्षा के छात्रों को नीले रंग का अंक पत्र दे दिया गया।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक वाराणसी मंडल मुख्यालय से अंक पत्र को मार्च महीने के पहले सप्ताह में ही बीएसए कार्यालय में प्राप्त करा दिया गया था। यहां से जिले भर के 21 ब्लाक संसाधन केन्द्रों पर अंक पत्र भेज दिए गए। जहां से सभी विद्यालयों में आपूर्ति की गई।
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पता चला है कि वाराणसी की जिस फर्म को अंक पत्र छपाई के लिए दिया गया था, उसने सैंपल भी भेजा था लेकिन बिना ठीक से चेक किए ही सैंपल को ओके कर दिया गया। विद्यालयों में अंकपत्र पहुंचे तो कुछ शिक्षकों ने खामियों के बारे में खंड शिक्षा अधिकारियों से चर्चा भी की। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षकों को चुप करा दिया।
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इस बारे में मछलीशहर विकास खंड के अगहुआ गांव निवासी लालजी कहते हैं कि उनका बेटा स्कूल से अंक पत्र लेकर घर पहुंचा तो उन्होंने भी खामियों को देखा। अंक पत्र पर बच्चे के नाम का कॉलम नहीं है। इसी विकास खंड के किशुनदासपुर निवासी प्रकाश सरोज कहते हैं कि प्राइमरी विद्यालयों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए ऐसी गलतियों को कौन गंभीरता से लेगा?
परेशानी का सबब बनेगा अंकपत्र
बिना नाम के अंक पत्र उनके लिए मुसीबत बन सकता है। इस बीच छात्रों से खामियों भरा अंक पत्र वापस लेकर उन्हें दूसरा अंक पत्र देने की योजना नहीं है। अधिकारी कह रहे हैं कि अंक पत्र का कोई मतलब नहीं है। टीसी पर नमांकन होता है। सबसे अधिक मुसीबत उन अभिभावकों की है, जिनके एक से अधिक बच्चे परिषदीय विद्यालयों में छात्र हैं। अंक पत्र पर माता-पिता का नाम लिखा गया है। 3.85 लाख छात्रों के लिए ये अंक पत्र बेकार हैं।
हर स्तर पर की गई मनमानी
शासन से जारी फार्मेट में एक से आठवीं कक्षा के लिए अलग-अलग रंग के अंक पत्र निर्धारित किए गए थे। जिसमें कक्षा एक के लिए लाल रंग, दो के लिए पीला, तीन के लिए केसरिया, चार के लिए हरा, पांचवीं के लिए नीला, छठवीं के लिए आसमानी, सातवीं के लिए सफेद और आठवीं कक्षा के छात्रों को ग्रे रंग का अंक पत्र उपलब्ध कराना था लेकिन अंक पत्र पर कक्षा का भी उल्लेख न होने के कारण किसी स्कूल में चौथी कक्षा के हरा रंग दिया गया तो किसी स्कूल में इसी कक्षा के छात्रों को नीले रंग का अंक पत्र दे दिया गया।