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भागवत कथा सुनने से होता है मानव का कल्याण- आचार्य वाचस्पति
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बरईपार। भागवत पुराण 18 पुराण में से एक है। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है। इस पुराण में भगवान श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में वर्णित किया गया है। इसके अतिरिक्त भागवत पुराण में भक्ति का निरूपण भी किया गया है। उक्त बातें कथा व्यास आचार्य वाचस्पति मिश्रा ने बुधवार को साड़ी खुर्द गाव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर भागवत पुराण के महत्व को बताते हुए कही।
उन्होंने कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत महापुराण मोक्ष प्रदान करने वाली है। इसके श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलयुग में आज भी हम सबको इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणी की मुक्ति हो जाती है और वह इस जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। इस पुराण में भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की महानता को दर्शाया गया है। इस ग्रंथ में महाभारत युद्ध के पश्चात भगवान श्री कृष्ण का देह त्याग, द्वारिका नगरी का जलमग्न होना और यदुवंशियों का नाश होना इन सभी विषयों का विस्तारित विवरण किया गया है। इसके पूर्व आयोजक जनार्दन मिश्र ने कथा वाचक का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर जवाहर दुबे, शारदा पांडेय, लक्ष्मीकांत, अनिल तिवारी, सूर्य प्रकाश मिश्र व हरिनाथ आदि उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत महापुराण मोक्ष प्रदान करने वाली है। इसके श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलयुग में आज भी हम सबको इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणी की मुक्ति हो जाती है और वह इस जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। इस पुराण में भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की महानता को दर्शाया गया है। इस ग्रंथ में महाभारत युद्ध के पश्चात भगवान श्री कृष्ण का देह त्याग, द्वारिका नगरी का जलमग्न होना और यदुवंशियों का नाश होना इन सभी विषयों का विस्तारित विवरण किया गया है। इसके पूर्व आयोजक जनार्दन मिश्र ने कथा वाचक का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर जवाहर दुबे, शारदा पांडेय, लक्ष्मीकांत, अनिल तिवारी, सूर्य प्रकाश मिश्र व हरिनाथ आदि उपस्थित रहे।
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