{"_id":"601994598ebc3e37c9476bb7","slug":"45-thousand-old-vehicles-will-be-removed-from-the-road-in-jaunpur-jaunpur-news-vns5724876187","type":"story","status":"publish","title_hn":"जौनपुर में सड़क से हटेंगे 45 हजार पुराने वाहन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जौनपुर में सड़क से हटेंगे 45 हजार पुराने वाहन
विज्ञापन
जौनपुर। आम बजट में सरकार ने पुराने वाहनों को सड़क से हटाने का प्रावधान किया है। प्रदूषण रोकने के मकसद से लिए गए इस फैसले के तहत 15 वर्ष से अधिक पुराने व्यावसायिक और 20 वर्ष से अधिक पुराने निजी वाहन शामिल हैं। जिले में करीब 45 हजार वाहन इस श्रेणी में आएंगे।
बजट में इस बार सरकार ने हवा की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया है। इसके लिए पुराने वाहनों को सड़क से हटाया जाएगा। इसे ऑटो मोबाइल्स सेक्टर के लिए भी काफी अनुकूल माना जा रहा है। पुराने वाहन हटने से नए वाहनों की खरीद भी बढ़ेगी। बहरहाल, जिले की स्थिति पर गौर करें तो यहां करीब 66 हजार निजी और 27 हजार व्यावसायिक वाहन हैं। इसमें व्यावसायिक श्रेणी के 1563 वाहन 15 साल से भी अधिक पुराने हैं। इसी तरह 43435 निजी वाहन 20 वर्ष की आयु को पूरा कर चुके हैं। अब यह वाहन सड़कों पर नहीं दौड़ेंगे। इसके स्वामियों को इस बारे में नोटिस भी दी जाएगी। इसके बावजूद यह वाहन सड़क पर दिखे तो कार्रवाई होगी। एआरटीओ एसपी सिंह के मुताबिक करीब 45 हजार वाहन तय सीमा से पुराने हैं। इन्हें चिह्नित किया जा रहा है। शासन के निर्देशों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
टैक्स ऑडिट बढ़ने से मिलेगी राहत
बजट में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन 75 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों को छूट दी गई है। सरकार ने बजट में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए ऐसे टैक्सपेयर जिसकी कैश रेपिप्स 5 प्रतिशत हो, टोटल टर्नओवर की उसकी टैक्स ऑडिट की लिमिट 5 करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ की है। इससे इस वर्ग के व्यापारियों को लाभ होगा। -अंकुर सिंघानिया, युवा।
विज्ञापन
लीक से हटकर है बजट
इस बजट में घाटा स्वीकार करने के बाद भी भरपाई से अधिक विकास पर जोर दिया गया है। कोविड के चलते जहां अर्थव्यवस्था दम तोड़ रही थी वहीं उसे भी आमदनी से अधिक भरपूर आर्थिक सहयोग कर वैक्सीनेशन का प्रयास सराहनीय है। यह बजट आत्मनिर्भरता के ताने बाने पर बुना हुआ स्वदेशी प्रेम से लबालब है, लेकिन यह बजट उच्च शिक्षा में आ रहे वित्तीय समस्याओं को पूरी तरह से नजरअंदाज करता दिखा है। -विशाल चौबे, एमटेक द्वितीय वर्ष।
निजीकरण को बढ़ावा देनें का बजट
सरकार ने खेतिहर मजदूरों, गरीबों, नौजवानों, किसानों, महिलाओं और देश के मंझौले तबके के लिए राहत के नाम पर इनकी भावनाओं एवं उम्मीदों को आहत किया है। देश के आंतरिक और वाह्य खतरे को देखते हुए रक्षा व सुरक्षा बजट में किया गया प्रावधान ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। पूर्वांचल के गन्ना किसानों, चीनी मिलों के परिचालन, बंद सूती मिलों आदि पर कोई बात नहीं हुई है। -डॉ. परमेंद्र सिंह, प्रबंधक, सर्वेश्वरी महाविद्यालय कमरुद्दीनपुर, रामपुर।
विज्ञापन
बजट में इस बार सरकार ने हवा की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया है। इसके लिए पुराने वाहनों को सड़क से हटाया जाएगा। इसे ऑटो मोबाइल्स सेक्टर के लिए भी काफी अनुकूल माना जा रहा है। पुराने वाहन हटने से नए वाहनों की खरीद भी बढ़ेगी। बहरहाल, जिले की स्थिति पर गौर करें तो यहां करीब 66 हजार निजी और 27 हजार व्यावसायिक वाहन हैं। इसमें व्यावसायिक श्रेणी के 1563 वाहन 15 साल से भी अधिक पुराने हैं। इसी तरह 43435 निजी वाहन 20 वर्ष की आयु को पूरा कर चुके हैं। अब यह वाहन सड़कों पर नहीं दौड़ेंगे। इसके स्वामियों को इस बारे में नोटिस भी दी जाएगी। इसके बावजूद यह वाहन सड़क पर दिखे तो कार्रवाई होगी। एआरटीओ एसपी सिंह के मुताबिक करीब 45 हजार वाहन तय सीमा से पुराने हैं। इन्हें चिह्नित किया जा रहा है। शासन के निर्देशों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
टैक्स ऑडिट बढ़ने से मिलेगी राहत
बजट में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन 75 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों को छूट दी गई है। सरकार ने बजट में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए ऐसे टैक्सपेयर जिसकी कैश रेपिप्स 5 प्रतिशत हो, टोटल टर्नओवर की उसकी टैक्स ऑडिट की लिमिट 5 करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ की है। इससे इस वर्ग के व्यापारियों को लाभ होगा। -अंकुर सिंघानिया, युवा।
विज्ञापन
लीक से हटकर है बजट
इस बजट में घाटा स्वीकार करने के बाद भी भरपाई से अधिक विकास पर जोर दिया गया है। कोविड के चलते जहां अर्थव्यवस्था दम तोड़ रही थी वहीं उसे भी आमदनी से अधिक भरपूर आर्थिक सहयोग कर वैक्सीनेशन का प्रयास सराहनीय है। यह बजट आत्मनिर्भरता के ताने बाने पर बुना हुआ स्वदेशी प्रेम से लबालब है, लेकिन यह बजट उच्च शिक्षा में आ रहे वित्तीय समस्याओं को पूरी तरह से नजरअंदाज करता दिखा है। -विशाल चौबे, एमटेक द्वितीय वर्ष।
निजीकरण को बढ़ावा देनें का बजट
सरकार ने खेतिहर मजदूरों, गरीबों, नौजवानों, किसानों, महिलाओं और देश के मंझौले तबके के लिए राहत के नाम पर इनकी भावनाओं एवं उम्मीदों को आहत किया है। देश के आंतरिक और वाह्य खतरे को देखते हुए रक्षा व सुरक्षा बजट में किया गया प्रावधान ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। पूर्वांचल के गन्ना किसानों, चीनी मिलों के परिचालन, बंद सूती मिलों आदि पर कोई बात नहीं हुई है। -डॉ. परमेंद्र सिंह, प्रबंधक, सर्वेश्वरी महाविद्यालय कमरुद्दीनपुर, रामपुर।