मड़ियाहूं। ग्रामीणों को उनके घर के पास ही सरकारी सुविधाएं देने के मकसद से बनाए गए करोड़ों के मिनी सचिवालय विभागीय उदासीनता की भेंट चढ़ रहे हैं। मड़ियाहूं विकास खंड में लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए पंचायत भवन अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। मंगलवार को की गई पड़ताल में कई ग्राम पंचायतों की पोल खुल गई, जहां ताले लटके मिले। प्रत्येक पंचायत भवन के निर्माण पर 15 से 25 लाख रुपये और संसाधनों (कंप्यूटर, इन्वर्टर, सीसीटीवी) पर करीब 1.75 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। उद्देश्य था कि ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र और खतौनी जैसी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े लेकिन हकीकत इसके उलट है। ददरा और मेंजा में भवन बंद मिले, वहीं राजापुर नंबर-1 में भवन के साथ-साथ कंप्यूटर उपकरण भी गायब मिले। बदौआ ग्राम पंचायत की स्थिति और भी बदतर है। यहां भवन तो खड़ा कर दिया गया है लेकिन न खिड़कियां पूरी हैं और न ही बैठने के लिए कुर्सी-मेज की व्यवस्था है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सहायकों की नियुक्ति के बावजूद ताले तभी खुलते हैं जब कभी सचिव का दौरा होता है। सरकारी धन की इस बर्बादी और विभागीय लापरवाही के कारण ग्रामीण आज भी छोटी-मोटी सुविधाओं के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

विकासखंड मड़ियाहूं के ग्राम पंचायत ददरा का बंद पड़ा ग्राम पंचायत सचिवालय। स्रोत-संवाद