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न्यायपालिका की स्वतंत्रता ही लोकतंत्र की आधारशिला: राकेश पांडेय
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जलालपुर। इलाहाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने और उसके विकास में न्यायालय का महत्वपूर्ण योगदान है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता ही लोकतंत्र की आधारशिला है।
वह रविवार को कुटीर संस्थान चक्के में विधिक शिक्षा लोकतंत्र एवं युवा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता और उसके व्यक्तित्व का विकसित करने वाली प्रक्रिया है। अधिवक्ता जेबी सिंह ने कहा कि जब आम आदमी को अपना जीवन बसर करने के लिए शिक्षा इतनी जरूरी है, तो क्या शासन चलाने वाले नेताओं का पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है। रचनाकार प्रेमचंद विश्वकर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की गाड़ी बेहतरीन तरीके से तभी संचालित हो सकता है, जब लोकतंत्र में शामिल होने वाले लोग शिक्षित होंगे। अध्यक्षता कर रहे पत्रकार चन्द्रेश मिश्र ने कहा स्कूल के अंदर सीखने की निरंतरता स्कूल के बाहर किए जाने वाले सीखने के साथ-साथ होनी चाहिए। कालेज के प्रबन्धक डा. अजयेंद्र दुबे ने कहा कि आज शिक्षा सिर्फ नौकरी व व्यवसाय के लिए ही शिक्षा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि बेहतर जीवन जीने और समाज के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए भी शिक्षा बेहद जरूरी है। बीरेंद्र नाथ उपाध्याय, अखिलेश मिश्र, सत्यप्रकाश राय, कृष्ण पहल ने विचार रखा। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि व प्रबंधक ने संस्थापक पंडित अभयजीत दुबे व सरस्वती जीचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस दौरान अधिवक्ताओं को रुद्राक्ष की माला व अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया। सरस्वती वंदना व गीत सुधांशु पांडेय, अर्चना बेदी, सुस्मिता विशवकर्मा, अनामिका शुक्ला, बन्दना आदि ने प्रस्तुत किया। डा. सीबी पाठक द्वारा लिखित ‘पर्यावरण शिक्षा के मूल तत्व’ का विमोचन किया गया। प्राचार्य डा. बीएन पांडेय, डा. राघवेन्द्र पांडेय, श्री भूषण मिश्रा, राघवेन्द्र दुबे, धर्मेंद्र दुबे, राकेश मिश्रा, हरीश शुक्ला, चन्द्रदेव मिश्रा, विद्यानिवास मिश्रा, बिशिष्ट नारायण शुक्ल आदि थे।
वह रविवार को कुटीर संस्थान चक्के में विधिक शिक्षा लोकतंत्र एवं युवा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता और उसके व्यक्तित्व का विकसित करने वाली प्रक्रिया है। अधिवक्ता जेबी सिंह ने कहा कि जब आम आदमी को अपना जीवन बसर करने के लिए शिक्षा इतनी जरूरी है, तो क्या शासन चलाने वाले नेताओं का पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है। रचनाकार प्रेमचंद विश्वकर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की गाड़ी बेहतरीन तरीके से तभी संचालित हो सकता है, जब लोकतंत्र में शामिल होने वाले लोग शिक्षित होंगे। अध्यक्षता कर रहे पत्रकार चन्द्रेश मिश्र ने कहा स्कूल के अंदर सीखने की निरंतरता स्कूल के बाहर किए जाने वाले सीखने के साथ-साथ होनी चाहिए। कालेज के प्रबन्धक डा. अजयेंद्र दुबे ने कहा कि आज शिक्षा सिर्फ नौकरी व व्यवसाय के लिए ही शिक्षा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि बेहतर जीवन जीने और समाज के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए भी शिक्षा बेहद जरूरी है। बीरेंद्र नाथ उपाध्याय, अखिलेश मिश्र, सत्यप्रकाश राय, कृष्ण पहल ने विचार रखा। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि व प्रबंधक ने संस्थापक पंडित अभयजीत दुबे व सरस्वती जीचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस दौरान अधिवक्ताओं को रुद्राक्ष की माला व अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया। सरस्वती वंदना व गीत सुधांशु पांडेय, अर्चना बेदी, सुस्मिता विशवकर्मा, अनामिका शुक्ला, बन्दना आदि ने प्रस्तुत किया। डा. सीबी पाठक द्वारा लिखित ‘पर्यावरण शिक्षा के मूल तत्व’ का विमोचन किया गया। प्राचार्य डा. बीएन पांडेय, डा. राघवेन्द्र पांडेय, श्री भूषण मिश्रा, राघवेन्द्र दुबे, धर्मेंद्र दुबे, राकेश मिश्रा, हरीश शुक्ला, चन्द्रदेव मिश्रा, विद्यानिवास मिश्रा, बिशिष्ट नारायण शुक्ल आदि थे।
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