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मौसम के बदले मिजाज से बागवानी मालिकों की बढ़ी चिंता
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मुंगराबादशाहपुर। मौसम में अचानक बदलाव के कारण आम के फसल को नुकसान की आशंका से बाग के मालिक डरे हुए हैं। आम के बौर में लासा लगने की खतरा बढ़ गया है। आम कुछ पेड़ों पर तो बौर लग गए हैं जबकि कुछ में बौर आ रहे हैं। ऐसे में आसमान में बादलों का आवाजाही से किसान चिंतित है।
आम की फसल को बचाने के लिए अभी से ही दो तीन बार दवाओं का छिड़काव किया जा चुका है। क्षेत्र के रामनगर, सराय डिंगुर, भैरोपुर, गौरैया डीह, बिखवानिया का पूरा सहित अनेक गांवों में लंगड़ा, दशहरी, चौसा, फाजली, सफेदा, तैमूरी दशहरी समेत अनेक किस्मों के बड़े पैमाने पर बागवानी है। मौसम के मिजाज को लेकर बाग मालिकों की परेशानी बढ़ गई है। बाग मालिक चन्द्र बहादुर, विमल सिंह, अनिल कुमार, अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि दवा का छिड़काव तो आम के पेड़ों पर किए जा चुके हैं। फिर भी आसमान में बादल छाए रहने के साथ ही बारिश के कारण आ रहे बौर को नुकसान होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। बूंदा बांदी आम के बौर के लिए दुश्मन साबित होता है। दवाओं का छिड़काव करने के बाद भी लासा लगने की संभावना बनी हुई है। जिन पेड़ों में लेट से बौर आयेगे उन्हें अभी कोई नुकसान नहीं है। जिनमें जल्दी बौर आ गए हैं उन्हीं को नुकसान होने की आशंका है। मौसम की मार आम के पैदावार पर पड़ सकती है।
आम की फसल को बचाने के लिए अभी से ही दो तीन बार दवाओं का छिड़काव किया जा चुका है। क्षेत्र के रामनगर, सराय डिंगुर, भैरोपुर, गौरैया डीह, बिखवानिया का पूरा सहित अनेक गांवों में लंगड़ा, दशहरी, चौसा, फाजली, सफेदा, तैमूरी दशहरी समेत अनेक किस्मों के बड़े पैमाने पर बागवानी है। मौसम के मिजाज को लेकर बाग मालिकों की परेशानी बढ़ गई है। बाग मालिक चन्द्र बहादुर, विमल सिंह, अनिल कुमार, अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि दवा का छिड़काव तो आम के पेड़ों पर किए जा चुके हैं। फिर भी आसमान में बादल छाए रहने के साथ ही बारिश के कारण आ रहे बौर को नुकसान होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। बूंदा बांदी आम के बौर के लिए दुश्मन साबित होता है। दवाओं का छिड़काव करने के बाद भी लासा लगने की संभावना बनी हुई है। जिन पेड़ों में लेट से बौर आयेगे उन्हें अभी कोई नुकसान नहीं है। जिनमें जल्दी बौर आ गए हैं उन्हीं को नुकसान होने की आशंका है। मौसम की मार आम के पैदावार पर पड़ सकती है।
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