18 मानव रहित क्रासिंग से रोज गुजरते हैं वाहन
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दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रहे सतई राम यादव 19 मई 2014 को अपने घर से शहर आने के लिए निकले थे। वह घर से दो सौ मीटर दूर जौनपुर-केराकत रेल रूट पर स्थित खलसहां रेलवे क्रासिंग पर जैसे ही पहुंचे थे तभी उनकी कार पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आ गई। हादसे में मंत्री समेत उनके गनर और चालक की भी मौत हो गई थी।
जंघई-नीभापुर स्टेशन के बीच असवा-गरियांव संपर्क मार्ग पर स्थित मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर 7 जून 2015 को इंटर सिटी एक्सप्रेस की चपेट में आने से बोलेरो सवार मुंगराबादशाहपुर के नडार गांव निवासी अखिलेश सिंह (45) और उसमें सवार गुजरात के प्रेमी जोड़े की मौत हो गई थी।
पिछले साल 27 जून को हरपाल गंज रेलवे स्टेशन के पूरब साढ़ापुर स्थित मानव रहित रेलवे क्त्रससिंग पर गिट्टी लदा ट्रैक्टर दिल्ली जा रही सद्भावना एक्सप्रेस की चपेट में आ गया था। चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था।
स्टेशन अधीक्षक भंडारी वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि जंघई से जफराबाद रेल मार्ग पर सात, जंघई-मुंगराबादशाहपुर रेल मार्ग पर दो, जफराबाद से सिंगरामऊ तक सात, जौनपुर से केराकत रेल मार्ग पर दो मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं। जबकि 57 रेलवे क्रासिंगों पर गेट लगा हुआ है।