{"_id":"5ca3b368bdec2213ef2d2c14","slug":"171554232168-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं हो रही फागिंग, मच्छरों के प्रकोप से बढ़ी मरीजों की संख्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं हो रही फागिंग, मच्छरों के प्रकोप से बढ़ी मरीजों की संख्या
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जौनपुर। गर्मी बढ़ने के साथ ही मच्छरों की संख्या भी बढ़ गई है। मच्छरों ने लोगों नींद छीन ली है लेकिन जिला मलेरिया विभाग चैन से सो रहा है।
अस्पतालों के ओपीडी में आने वाला हर पांचवा मरीज बुखार पीड़ित है और उसमें एक को मलेरिया होती है। इसके बावजूद मलेरिया विभाग के मुताबिक कोई भी मलेरिया की मरीज जिले में नहीं है।
स्वास्थ्य महकमे के मुताबिक जिले में दो साल में मच्छर जनित अब तक कालाजार, मलेरिया और जापानी इंसेफ्लाइटिस के दो-दो मरीज ही मिले हैं। इस साल अभी कोई मरीज नहीं आया है। हकीकत यह है कि दवा विक्रेता मिथिलेश प्रसाद सिंह का कहना है कि उनकी दुकान से रोजाना दो-तीन लोग मलेरिया की दवा ले जा रहे हैं। शहर में सौ से ज्यादा दुकानें है। ऐसे में सहज कल्पना की जा सकती है कि कितने मलेरिया के मरीज होंगे।
जिला अस्पताल के ओपीडी में जनवरी से फरवरी की 25315 मरीज पहुंचे थे। 21 फरवरी से 20 मार्च के बीच मरीजों की संख्या बढ़कर 26988 हो गई। मंगलवार को 1180 मरीज ओपीडी में इलाज कराने के लिए पहुंचे, जिसमें 100 से अधिक मरीजों में मलेरिया के लक्षण पाए गए। इसके बावजूद मच्छरों की रोकथाम के प्रति न तो नगर पालिका गंभीर है और न ही जिला मलेरिया विभाग। संचारी रोग नियंत्रण की बैठक ही नहीं हुई है। इस बैठक के बाद मलेरिया विभाग से मैलाथियान लेकर नगर पालिका उसका छिड़काव कराता है। मीटिंग नहीं होने से मलेरिया विभाग फागिंग ने नगरपालिका को मैलाथियान मुहैया नहीं कराया जिससे छिड़काव शुरू नहीं हो सका है।
विज्ञापन
मलेरिया विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में डोभी के विहद्रर में और 2018 में खुटहन के रामनगर में कालाजार के मरीज पाए गए थे। नियम है कि इन गांवों में पांच वर्ष तक छिड़काव कराया जाए। जापानी बुखार से वर्ष 2017 में सिकरारा में विमला देवी और सोंधी क्षेत्र के डोमइला में एक किशोरी वर्ष 2018 पीड़ित स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में सिर्फ दर्ज है। नियमानुसार इन गांवों में पांच साल तक लगातार छिड़काव होना चाहिए लेकिन इन गांवों में छिड़काव नहीं कराए गए हैं।
मलेरिया विभाग के पास फागिंग के लिए कोई बजट नहीं आता है। छिड़काव भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार उन गांवों में कराया जाता है जहां मलेरिया, काला जार, और जापानी बुखार के मरीज पाएं जाते है।
नगरपालिका परिषद मेलरिया विभाग से मलैथियान लेकर डीजल का अपने संसाधन से इंतजाम कराकर फागिंग कराया जाता है। इसके लिए रोस्टर तैयार कर लिया गया है। संचारी रोक की बैठक के बाद फागिंग कार्य में तेजी आएगी।
कृष्णचंद
अधिशासी अधिकारी
अस्पतालों के ओपीडी में आने वाला हर पांचवा मरीज बुखार पीड़ित है और उसमें एक को मलेरिया होती है। इसके बावजूद मलेरिया विभाग के मुताबिक कोई भी मलेरिया की मरीज जिले में नहीं है।
स्वास्थ्य महकमे के मुताबिक जिले में दो साल में मच्छर जनित अब तक कालाजार, मलेरिया और जापानी इंसेफ्लाइटिस के दो-दो मरीज ही मिले हैं। इस साल अभी कोई मरीज नहीं आया है। हकीकत यह है कि दवा विक्रेता मिथिलेश प्रसाद सिंह का कहना है कि उनकी दुकान से रोजाना दो-तीन लोग मलेरिया की दवा ले जा रहे हैं। शहर में सौ से ज्यादा दुकानें है। ऐसे में सहज कल्पना की जा सकती है कि कितने मलेरिया के मरीज होंगे।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के ओपीडी में जनवरी से फरवरी की 25315 मरीज पहुंचे थे। 21 फरवरी से 20 मार्च के बीच मरीजों की संख्या बढ़कर 26988 हो गई। मंगलवार को 1180 मरीज ओपीडी में इलाज कराने के लिए पहुंचे, जिसमें 100 से अधिक मरीजों में मलेरिया के लक्षण पाए गए। इसके बावजूद मच्छरों की रोकथाम के प्रति न तो नगर पालिका गंभीर है और न ही जिला मलेरिया विभाग। संचारी रोग नियंत्रण की बैठक ही नहीं हुई है। इस बैठक के बाद मलेरिया विभाग से मैलाथियान लेकर नगर पालिका उसका छिड़काव कराता है। मीटिंग नहीं होने से मलेरिया विभाग फागिंग ने नगरपालिका को मैलाथियान मुहैया नहीं कराया जिससे छिड़काव शुरू नहीं हो सका है।
विज्ञापन
मलेरिया विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में डोभी के विहद्रर में और 2018 में खुटहन के रामनगर में कालाजार के मरीज पाए गए थे। नियम है कि इन गांवों में पांच वर्ष तक छिड़काव कराया जाए। जापानी बुखार से वर्ष 2017 में सिकरारा में विमला देवी और सोंधी क्षेत्र के डोमइला में एक किशोरी वर्ष 2018 पीड़ित स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में सिर्फ दर्ज है। नियमानुसार इन गांवों में पांच साल तक लगातार छिड़काव होना चाहिए लेकिन इन गांवों में छिड़काव नहीं कराए गए हैं।
मलेरिया विभाग के पास फागिंग के लिए कोई बजट नहीं आता है। छिड़काव भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार उन गांवों में कराया जाता है जहां मलेरिया, काला जार, और जापानी बुखार के मरीज पाएं जाते है।
नगरपालिका परिषद मेलरिया विभाग से मलैथियान लेकर डीजल का अपने संसाधन से इंतजाम कराकर फागिंग कराया जाता है। इसके लिए रोस्टर तैयार कर लिया गया है। संचारी रोक की बैठक के बाद फागिंग कार्य में तेजी आएगी।
कृष्णचंद
अधिशासी अधिकारी