{"_id":"5cf95e92bdec22076357be1f","slug":"155984654116-jaunpur-news105","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान के सरकारी बीज पर किसानों को नहीं है भरोसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान के सरकारी बीज पर किसानों को नहीं है भरोसा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। राजकीय बीज गोदामों पर धान का बीज उपलब्ध होने के बाद भी किसान खुले बाजार से महंगे दाम पर बीज खरीद रहे हैं।सरकारी बीज से किसानों का भरोसा उठता जा रहा है। जिले की सभी 21 राजकीय बीज गोदामों पर विभिन्न प्रजातियों के 1200 कुंतल धान का बीज उपलब्ध है। जो किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर दिया जाना है। लेकिन किसानों की दलील है कि बीज पर पचास फीसदी अनुदान के चक्कर में वे खेती को चौपट नहीं कर सकते। तमाम किसानों की शिकायत है कि पिछले वर्षों में वे सरकारी बीज गोदाम से धान का बीज लिए थे लेकिन बीज खराब निकल गया। इस बार वे कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं।
जिले में कुल 6.55 लाख किसान हैं। जिसमें से करीब चार लाख किसान धान की खेती करते हैं। जिले भर में 2.20 हेक्टेयर एरिया में दान की खेती की जाती है। किसान धान की नर्सरी डालने की तैयारी में जुट गए हैं। वे समय से नर्सरी डाल देना चाहते हैं। नर्सरी डालने का सही समय 10 जून से 20 जून के बीच माना जाता है। किसानों की सुविधा के लिए राजकीय बीज गोदामों पर सांभा सब वन, स्वर्णा सब वन, सांभा मंसूरी, आईआर 20 आदि धान की प्रजातियों का प्रमाणित बीज उपलब्ध हैं। जिसे किसानों को पचास फीसदी अनुदान पर दिया जाना है। जिला कृषि अधिकारी अमित चौबे का कहना है कि राजकीय गोदामो से पूरे दाम पर किसानों को बीज दिया जाएगा। किसानों को 50 फीसदी अनुदान उनके बैंक खाते में भेज दिया जाएगा। इसका लाभ लेने के लिए किसानों को प्रधान मंत्री किसान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। बिना रजिस्ट्रेशन के अनुदान की राशि खाते में किसानों को नहीं भेजी जा सकेगी। जबकि किसान पचास फीसदी अनुदान पर भी सरकारी गोदामों से बीज लेने को तैयार नहीं है। बक्शा के किसान फुर्तीलाल का कहना है कि पिछले साल वह आधी नर्सरी बाजार से बीज खरीद कर डाले थे और आधी नर्सरी राजकीय गोदाम से बीज लेकर डाले थे। डेढ़ बीघा में जहां सरकारी बीज से धान की रोपाई की थी वह फसल चौपट हो गई। जबकि उसी प्रजाति का धान बाजार से खरीदकर जो नर्सरी तैयार की थी उसकी उपज अच्छी हुई। अब व दोबारा जोखिम नहीं लेना चाहते। किसान राम सूरत यादव का कहना है कि उन्हें जितनी नर्सरी डालनी है उतनी नर्सरी के लिए अधिकतम 500 रुपये अनुदान मिल सकता है लेकिन राजकीय बीज गोदाम से मिलने वाले बीज पर उतना भरोसा नहीं है । इस नाते पांच सौ के चक्कर मे ंखेती चौपट नहीं करेंगे। उतिराई गांव के उमेश यादव, करंजाकला के फूलचंद्र यादव, रामराज विश्वकर्मा आदि किसान भी सरकारी गोदाम से बीज खरीदना नही चाहते।
विज्ञापन
जिले में कुल 6.55 लाख किसान हैं। जिसमें से करीब चार लाख किसान धान की खेती करते हैं। जिले भर में 2.20 हेक्टेयर एरिया में दान की खेती की जाती है। किसान धान की नर्सरी डालने की तैयारी में जुट गए हैं। वे समय से नर्सरी डाल देना चाहते हैं। नर्सरी डालने का सही समय 10 जून से 20 जून के बीच माना जाता है। किसानों की सुविधा के लिए राजकीय बीज गोदामों पर सांभा सब वन, स्वर्णा सब वन, सांभा मंसूरी, आईआर 20 आदि धान की प्रजातियों का प्रमाणित बीज उपलब्ध हैं। जिसे किसानों को पचास फीसदी अनुदान पर दिया जाना है। जिला कृषि अधिकारी अमित चौबे का कहना है कि राजकीय गोदामो से पूरे दाम पर किसानों को बीज दिया जाएगा। किसानों को 50 फीसदी अनुदान उनके बैंक खाते में भेज दिया जाएगा। इसका लाभ लेने के लिए किसानों को प्रधान मंत्री किसान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। बिना रजिस्ट्रेशन के अनुदान की राशि खाते में किसानों को नहीं भेजी जा सकेगी। जबकि किसान पचास फीसदी अनुदान पर भी सरकारी गोदामों से बीज लेने को तैयार नहीं है। बक्शा के किसान फुर्तीलाल का कहना है कि पिछले साल वह आधी नर्सरी बाजार से बीज खरीद कर डाले थे और आधी नर्सरी राजकीय गोदाम से बीज लेकर डाले थे। डेढ़ बीघा में जहां सरकारी बीज से धान की रोपाई की थी वह फसल चौपट हो गई। जबकि उसी प्रजाति का धान बाजार से खरीदकर जो नर्सरी तैयार की थी उसकी उपज अच्छी हुई। अब व दोबारा जोखिम नहीं लेना चाहते। किसान राम सूरत यादव का कहना है कि उन्हें जितनी नर्सरी डालनी है उतनी नर्सरी के लिए अधिकतम 500 रुपये अनुदान मिल सकता है लेकिन राजकीय बीज गोदाम से मिलने वाले बीज पर उतना भरोसा नहीं है । इस नाते पांच सौ के चक्कर मे ंखेती चौपट नहीं करेंगे। उतिराई गांव के उमेश यादव, करंजाकला के फूलचंद्र यादव, रामराज विश्वकर्मा आदि किसान भी सरकारी गोदाम से बीज खरीदना नही चाहते।
विज्ञापन