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...आखिर कहां गए लाखों पौधें !
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जौनपुर। पौधरोपण के नाम पर हर साल लाखों रूपये खर्च कर पौधें लगाएं जाते है। लेकिन समुचित देखभाल नहीं होने की वजह से पौधें सुरक्षित बच नहीं पाते है। यहीं कारण है कि वन भू भाग का दायरा कुछ खास नहीं बढ़ सका है। जितने पौधे लगाएं जा रहे है उसी अनुपात में वृक्षों की कटान भी हो रहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष 14 लाख पौधरोपण किये जाने का दावा वन विभाग कर रहा है। लेकिन पौधों को सुरक्षित रखने के लिए महज एक हजार ट्री गार्ड लगाएं गए है। शहर में लगाएं गए ट्री गार्ड में बहुत कम पौधे ही सुरक्षित है। बाकी सब के सब समुचित देखभाल नहीं होने से सूख गए है। इस वर्ष तो 59 लाख पौधें 250 स्थानों पर लगाएं जाने की तैयारियां शुरू हो गई है। इसके लिए समिति की बैठक भी हाल ही हुई हैं। हर साल लाखों पौधे लगाएं जाने के बावजूद भी एक प्रतिशत भू- भाग ही जिले का पौधों से आच्छादित है। वन विभाग का दावा है कि लगाएं गए पौधों में सिर्फ दस फीसदी ही सूखते है। बाकी को सुरक्षित कर लिया जाता है। जांच कराई जाएं तो सरकार द्वारा चलाए गए पौधरोपण अभियान के हकीकत की पोल खुल सकती है।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानगी प्रभाग एपी पाठक का कहना है कि लगाएं गए पौधों में सिर्फ दस फीसदी ही सूखते है। बाकी को सुरक्षित कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जिले की आबादी अधिक है। आरक्षित वन क्षेत्र नहीं है। आबादी के बीच, नहर, तालाबएवं ग्राम समाज की भूमि पर ही पौधरोपण किया जाता है। इसलिए जिले का तकरीबन एक प्रतिशत भू भाग ही वनों से आच्छादित हैं।
दिनचर्या में शामिल कर लिया पौधों की सेवा
जौनपुर। सखी फाउंडेशन की अध्यक्ष प्रीती गुप्ता का पौधों से बेहद लगाव है। प्रीती हर रोज एक से डेढ़ घंटें पौधों की सेवा में लगाती है। अपने आवास में प्रीती ने सुंदर सा बागीचा बनाया है। जिसमें एरिका पाम, साइकस, डेनियम, कामिनी, मोरपंखी, अनार, चीकू, आंवला, नीबू, गुड़हल, कनेल, लीची, आम सहित कई तरह के पौधें लगाया है। इसके अलावा शहर के विभिन्न स्कूल, कालेजों, नदी के किनारे एवं अन्य विभिन्न स्थानों पर 100 से अधिक छायादार पौधें अपने खर्च पर लगाएं है। प्रीति का कहना है कि गोमती नदी के किनारे पौधे लगाएं जाने का प्लान कई संस्थाओं की महिलाओं की टीम ने मिलकर किया है।
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जहरीली हुई हवा, सांस लेना दूभर
जौनपुर। लखनऊ से वाराणसी हाइवे का निर्माण चार साल से चल रहा है। निर्माण कार्य के चलते धूल एवं गंदगी से हाइवे के किनारे हरिहरपुर से त्रिलोचन महादेव तक रहने वाले तकरीबन 200 से अधिक गांवों के लोग जहरीली हवाओं की वजह से परेशान है। सांस की बीमारी के हजारों लोग मरीज बन गए है। कमोवेश ऐसी ही स्थिति गोमती नदी के किनारे रहने वाले सैकड़ों गांवों के लोगों के साथ भी है। नदी में प्रदूषण की वजह से लोग पेट संबंधी बीमारियों से परेशान है। पीने का पानी उनका प्रदूषित हो चुका है। इसकी पुष्टि जांच में होने के बावजूद भी कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका है।
पर्यावरण संरक्षण से ही धरती पर जीवन सुरक्षित-डा. क्षितिज
पर्यावरण संरक्षण से ही धरती पर जीवन सुरक्षित-डा. क्षितिज
जौनपुर। लायन्स क्लब इंटरनेशनल रीजन आई के तहत विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को शाही किला से पर्यावरण की सुरक्षा व संरक्षण हेतु जागरूकता रैली मेन अध्यक्ष लायंस अशोक कुमार मौर्य के नेतृत्व में निकली गई। रैली नगर का भ्रमण करती हुई ताड़तला स्थित कुमुद हास्पिटल के सभागार में संगोष्ठी के रूप में परिवर्तित हो गई। रैली को डा. क्षितिज शर्मा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया।उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण गम्भीर समस्या है, जो हमारे द्वारा की गई छोटी- छोटी बिना सोचे समझे की जाने वाली हरकतों की वजह से पर्यावरण प्रदूषण का कारण हो जाती है। वृक्ष मनुष्य के परिवार के अंग है। वे हमे प्राण व वायु प्रदान करके जीवित रखते हैं। इस दौरान सैय्यद मोहम्मद मुस्तफा,रामकुमार साहू ,अमित पाण्डेय ने संबोधित किया। इस अवसरसोमेश्वर केसरवानी, महेंद्र नाथ सेठ, डा विकास रस्तोगी, अरूण त्रिपाठी, , परमजीत सिंह, संजय सिंघानिया,नीरज शाह, शत्रुधन मौर्य आदि उपस्थित रहे।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानगी प्रभाग एपी पाठक का कहना है कि लगाएं गए पौधों में सिर्फ दस फीसदी ही सूखते है। बाकी को सुरक्षित कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जिले की आबादी अधिक है। आरक्षित वन क्षेत्र नहीं है। आबादी के बीच, नहर, तालाबएवं ग्राम समाज की भूमि पर ही पौधरोपण किया जाता है। इसलिए जिले का तकरीबन एक प्रतिशत भू भाग ही वनों से आच्छादित हैं।
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दिनचर्या में शामिल कर लिया पौधों की सेवा
जौनपुर। सखी फाउंडेशन की अध्यक्ष प्रीती गुप्ता का पौधों से बेहद लगाव है। प्रीती हर रोज एक से डेढ़ घंटें पौधों की सेवा में लगाती है। अपने आवास में प्रीती ने सुंदर सा बागीचा बनाया है। जिसमें एरिका पाम, साइकस, डेनियम, कामिनी, मोरपंखी, अनार, चीकू, आंवला, नीबू, गुड़हल, कनेल, लीची, आम सहित कई तरह के पौधें लगाया है। इसके अलावा शहर के विभिन्न स्कूल, कालेजों, नदी के किनारे एवं अन्य विभिन्न स्थानों पर 100 से अधिक छायादार पौधें अपने खर्च पर लगाएं है। प्रीति का कहना है कि गोमती नदी के किनारे पौधे लगाएं जाने का प्लान कई संस्थाओं की महिलाओं की टीम ने मिलकर किया है।
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जहरीली हुई हवा, सांस लेना दूभर
जौनपुर। लखनऊ से वाराणसी हाइवे का निर्माण चार साल से चल रहा है। निर्माण कार्य के चलते धूल एवं गंदगी से हाइवे के किनारे हरिहरपुर से त्रिलोचन महादेव तक रहने वाले तकरीबन 200 से अधिक गांवों के लोग जहरीली हवाओं की वजह से परेशान है। सांस की बीमारी के हजारों लोग मरीज बन गए है। कमोवेश ऐसी ही स्थिति गोमती नदी के किनारे रहने वाले सैकड़ों गांवों के लोगों के साथ भी है। नदी में प्रदूषण की वजह से लोग पेट संबंधी बीमारियों से परेशान है। पीने का पानी उनका प्रदूषित हो चुका है। इसकी पुष्टि जांच में होने के बावजूद भी कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका है।
पर्यावरण संरक्षण से ही धरती पर जीवन सुरक्षित-डा. क्षितिज
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जौनपुर। लायन्स क्लब इंटरनेशनल रीजन आई के तहत विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को शाही किला से पर्यावरण की सुरक्षा व संरक्षण हेतु जागरूकता रैली मेन अध्यक्ष लायंस अशोक कुमार मौर्य के नेतृत्व में निकली गई। रैली नगर का भ्रमण करती हुई ताड़तला स्थित कुमुद हास्पिटल के सभागार में संगोष्ठी के रूप में परिवर्तित हो गई। रैली को डा. क्षितिज शर्मा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया।उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण गम्भीर समस्या है, जो हमारे द्वारा की गई छोटी- छोटी बिना सोचे समझे की जाने वाली हरकतों की वजह से पर्यावरण प्रदूषण का कारण हो जाती है। वृक्ष मनुष्य के परिवार के अंग है। वे हमे प्राण व वायु प्रदान करके जीवित रखते हैं। इस दौरान सैय्यद मोहम्मद मुस्तफा,रामकुमार साहू ,अमित पाण्डेय ने संबोधित किया। इस अवसरसोमेश्वर केसरवानी, महेंद्र नाथ सेठ, डा विकास रस्तोगी, अरूण त्रिपाठी, , परमजीत सिंह, संजय सिंघानिया,नीरज शाह, शत्रुधन मौर्य आदि उपस्थित रहे।