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कोर्ट ने दिया डीएम का खाता बंद करने की चेतावनी
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जौनपुर। 1991 के चुनाव में ड्यूटी के दौरान हादसे में सिपाही की हुई मौत के मामले में क्षतिपूर्ति अदा न करने पर अपर जिला जज द्वितीय ने जिलाधिकारी का खाता बंद करने की चेतावनी दी है। उन्होंने जिलाधिकारी के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए कहा कि कहा कि क्यों न उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखा जाए। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जिलाधिकारी एक जून 2019 को कोर्ट में स्पष्टीकरण दें। उधर राज्य सरकार द्वारा की गई अपील में हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2018 को आदेश दिया था कि 6 माह के भीतर क्षतिपूर्ति अदा की जाए।
वाराणसी पीएसी में तैनात सिपाही आत्मा प्रकाश पांडेय 18 मई 1991 को निर्वाचन ड्यूटी में पुलिस लाइन जौनपुर से पुलिस की गाड़ी में बैठकर मड़ियाहूं जा रहे थे। चकटाला गांव के पास प्राइवेट बस ने गाड़ी में टक्कर मार दिया जिसमें उक्त सिपाही मौत हो गई। सिपाही की पत्नी मंजू ने पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश राज्य जरिए जिलाधिकारी समेत तीन के खिलाफ क्षतिपूर्ति का मुकदमा कोर्ट में दाखिल किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस व समस्त साक्ष्य लेने के बाद 21 जुलाई 1999 को आदेश दिया कि राज्य सरकार 3.29 लाख रुपए याची व उसके बच्चों को अदा करें। फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में अपील किया जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को धनराशि अदा करने का आदेश दिया। इसके बावजूद बकाया धनराशि अदा न करने पर याची मंजू ने पुन: हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2018 को राज्य सरकार को आदेश दिया कि 6 माह के भीतर क्षतिपूर्ति अदा की जाए। आदेश का पालन न होने पर अपर जिला जज द्वितीय ने अवमानना नोटिस जारी किया लेकिन धनराशि अदा नहीं की गई। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी का खाता बंद करने की चेतावनी दी है।
वाराणसी पीएसी में तैनात सिपाही आत्मा प्रकाश पांडेय 18 मई 1991 को निर्वाचन ड्यूटी में पुलिस लाइन जौनपुर से पुलिस की गाड़ी में बैठकर मड़ियाहूं जा रहे थे। चकटाला गांव के पास प्राइवेट बस ने गाड़ी में टक्कर मार दिया जिसमें उक्त सिपाही मौत हो गई। सिपाही की पत्नी मंजू ने पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश राज्य जरिए जिलाधिकारी समेत तीन के खिलाफ क्षतिपूर्ति का मुकदमा कोर्ट में दाखिल किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस व समस्त साक्ष्य लेने के बाद 21 जुलाई 1999 को आदेश दिया कि राज्य सरकार 3.29 लाख रुपए याची व उसके बच्चों को अदा करें। फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में अपील किया जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को धनराशि अदा करने का आदेश दिया। इसके बावजूद बकाया धनराशि अदा न करने पर याची मंजू ने पुन: हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2018 को राज्य सरकार को आदेश दिया कि 6 माह के भीतर क्षतिपूर्ति अदा की जाए। आदेश का पालन न होने पर अपर जिला जज द्वितीय ने अवमानना नोटिस जारी किया लेकिन धनराशि अदा नहीं की गई। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी का खाता बंद करने की चेतावनी दी है।
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