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श्री कृष्ण रूक्मणी विवाह लीला के साथ भागवत कथा का समापन
Updated Fri, 14 Dec 2018 11:48 PM IST
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सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के शक्ति पीठ मां काली मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन फिरोजाबाद से आए संत स्वामी विवेकानंद सरस्वती महराज ने कृष्ण रुक्मिणी विवाह को बड़े ही भाव पूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाह झांकी देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
मंगल गीतों से मंदिर परिसर कृष्णमय हो गया। हरे कृष्ण हरे राम के जयकारों से कथा परिसर गुंजायमान हो गया। पूर्व में गाजे-बाजे के साथ भगवान श्रीकृष्ण की निकाली गई बारात का स्वागत के साथ श्रद्धालुओं ने दर्शन कर अपने को धन्य किया। श्रद्धालुओं ने पांव पूजन तथा कन्या दान किया। संत विवेकानंद ने कहा कि भागवत कथा जीवन रूपी नौका का खेवनहार है। क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई अमृत कथा है। इसे महाप्रसाद के रूप में जीवन में उतारना ही घर स्वर्ग रूपी मंदिर हो जाता है। अंत में मुख्य यजमान भगौती प्रसाद कसौधन, कृष्णा देवी, प्रेमा देवी सहित अन्य लोगों ने संत के चरणों का आशीर्वाद लिया। उपहार देकर उनकी विदाई की।
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मंगल गीतों से मंदिर परिसर कृष्णमय हो गया। हरे कृष्ण हरे राम के जयकारों से कथा परिसर गुंजायमान हो गया। पूर्व में गाजे-बाजे के साथ भगवान श्रीकृष्ण की निकाली गई बारात का स्वागत के साथ श्रद्धालुओं ने दर्शन कर अपने को धन्य किया। श्रद्धालुओं ने पांव पूजन तथा कन्या दान किया। संत विवेकानंद ने कहा कि भागवत कथा जीवन रूपी नौका का खेवनहार है। क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई अमृत कथा है। इसे महाप्रसाद के रूप में जीवन में उतारना ही घर स्वर्ग रूपी मंदिर हो जाता है। अंत में मुख्य यजमान भगौती प्रसाद कसौधन, कृष्णा देवी, प्रेमा देवी सहित अन्य लोगों ने संत के चरणों का आशीर्वाद लिया। उपहार देकर उनकी विदाई की।
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